रोज Sunscreen फिर भी Tanning? आपकी ये 3 गलतियां Skin को बना रही हैं डार्क

सनस्क्रीन लगाने के बाद भी टैनिंग होने की मुख्य वजह उसे लगाने का गलत तरीका है, जैसे कम मात्रा में लगाना और हर 2-3 घंटे में दोबारा न लगाना। पूरी सुरक्षा के लिए हमेशा ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन चुनें जो UVA और UVB, दोनों हानिकारक किरणों से त्वचा का बचाव कर सके।
अक्सर हम सोचते हैं कि सनस्क्रीन लगा लिया, तो अब धूप हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। लेकिन फिर भी जब चेहरा काला पड़ने लगता है, तो गुस्सा आना लाजिमी है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो टेंशन मत लीजिए इसमें गलती सनस्क्रीन की नहीं, बल्कि उसे लगाने के तरीके की है। आइए बिल्कुल आसान शब्दों में समझते हैं कि रोजाना सनस्क्रीन लगाने के बाद भी टैनिंग क्यों हो जाती है और हम कहां चूक कर रहे हैं।
टेनिंग असल में क्या है?
टेनिंग कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह धूप की किरणों से बचने के लिए हमारी त्वचा का अपना एक तरीका है। जब धूप की किरणें त्वचा के अंदर जाती हैं, तो हमारा शरीर मेलेनिन नाम का तत्व ज्यादा बनाने लगता है। मेलेनिन की वजह से ही हमारी त्वचा का रंग तय होता है। शरीर ऐसा इसलिए करता है ताकि त्वचा को आगे होने वाले बड़े नुकसान से बचाया जा सके। इसलिए लंबे समय तक धूप में रहने पर थोड़ी-बहुत टेनिंग होना आम बात है।
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कम मात्रा में क्रीम लगाना है सबसे बड़ी भूल
कई बार दिक्कत सनस्क्रीन में नहीं, बल्कि उसे लगाने के तरीके में होती है। ज्यादातर लोग बहुत थोड़ी सी सनस्क्रीन चेहरे पर लगा लेते हैं और सोचते हैं कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। लेकिन सच यह है कि सनस्क्रीन की एक पतली परत लगाने से पूरा फायदा नहीं मिलता। लैब में जब सनस्क्रीन की जांच की जाती है, तो उसे अच्छी-खासी मात्रा में लगाकर टेस्ट किया जाता है। इसलिए चेहरे और खुली त्वचा पर इसकी सही मात्रा लगाना बेहद जरूरी है।
हर दो से तीन घंटे में दोबारा लगाना है जरूरी
हम में से ज्यादातर लोग सुबह घर से निकलते समय एक बार सनस्क्रीन लगा लेते हैं और फिर पूरे दिन निश्चिंत रहते हैं। लेकिन पसीने, त्वचा के तेल और धूप के कारण सनस्क्रीन का असर धीरे-धीरे खत्म होने लगता है। अगर आप लगातार धूप में हैं और हर दो से तीन घंटे में दोबारा सनस्क्रीन नहीं लगाते हैं, तो आपकी त्वचा की सुरक्षा खत्म हो जाती है।
सनस्क्रीन खरीदते समय ब्रॉड-स्पेक्ट्रम का रखें ध्यान
बाजार से सनस्क्रीन खरीदते समय हम अक्सर उसके प्रकार पर ध्यान नहीं देते। कुछ सनस्क्रीन सिर्फ UVB किरणों से बचाती हैं, जो त्वचा को झुलसने से रोकती हैं। लेकिन अगर आपकी सनस्क्रीन UVA किरणों को नहीं रोक पाती, तो आपकी त्वचा टेनिंग और अंदरूनी नुकसान से नहीं बच पाएगी। इसलिए हमेशा ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन ही चुनें, जो दोनों तरह की हानिकारक किरणों से बचा सके।
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छांव और बादलों में भी छिपा है खतरा
लोग सोचते हैं कि बादलों वाले मौसम में या गाड़ी के अंदर रहने से धूप नुकसान नहीं पहुंचाएगी। लेकिन धूप की किरणें कार के शीशों और बादलों को पार करके भी हमारी त्वचा तक पहुंच सकती हैं। इतना ही नहीं, ये किरणें पानी या कंक्रीट की दीवारों से टकराकर भी चेहरे पर लगती हैं। यही वजह है कि सीधे धूप में न होने पर भी धीरे-धीरे टेनिंग होने लगती है।
सनस्क्रीन का असली काम क्या है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सनस्क्रीन का काम आपको पूरी तरह सनप्रूफ बनाना नहीं है। इसका असली काम आपकी त्वचा को गंभीर नुकसान, असमय बुढ़ापा, झाइयां और स्किन कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों से बचाना है। इसलिए थोड़ी-बहुत टेनिंग होने पर भी सनस्क्रीन लगाना न छोड़ें, क्योंकि यह आपकी त्वचा की सेहत के लिए बेहद जरूरी है।
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