Satluj Release Journey | सेंसरशिप की जंग में दिलजीत दोसांझ की फिल्म ने OTT नियमों को दी चुनौती, क्या पब्लिसिटी पाने का था सोचा-समझा प्लान?

Diljit Dosanjh
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रेनू तिवारी । Jul 8 2026 12:15PM

एक ऐसी फिल्म जिसे सिनेमाघरों के परदे तक पहुंचाने और सेंसर बोर्ड की कैंची से बचाने के लिए मेकर्स ने सालों तक कानूनी लड़ाई लड़ी, वह आखिरकार ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आई तो सही, लेकिन महज 48 घंटों के भीतर ही गायब हो गई।

एक ऐसी फिल्म जिसे सिनेमाघरों के परदे तक पहुंचाने और सेंसर बोर्ड की कैंची से बचाने के लिए मेकर्स ने सालों तक कानूनी लड़ाई लड़ी, वह आखिरकार ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आई तो सही, लेकिन महज 48 घंटों के भीतर ही गायब हो गई। ग्लोबल स्टार दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) की मुख्य भूमिका वाली फिल्म 'सतलुज' (Sutlej) को 3 जुलाई को चुपचाप ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर स्ट्रीम किया गया और दो दिनों के भीतर ही इसे भारत में कैटलॉग से हटा दिया गया।

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मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी और पंजाब में 90 के दशक के उग्रवाद के काले दौर पर आधारित इस फिल्म के अचानक आने और जाने ने भारतीय डिजिटल मीडिया, सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने 5 ऐसे बड़े सवालों को जन्म दिया है, जिनके जवाब कानूनी और नैतिक रूप से बेहद पेचीदा हैं:

1. 127 कट्स की अड़चन: मेकर्स ने 'पंजाब '95' का नाम बदलकर ओटीटी को क्यों चुना?

इस फिल्म का सफर बेहद विवादित रहा है। मूल रूप से इस फिल्म का नाम 'घल्लूघारा' (जिसका पंजाबी में अर्थ 'नरसंहार' होता है) रखा गया था। बाद में इसे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास 'पंजाब '95' के नाम से भेजा गया। सेंसर बोर्ड ने फिल्म के संवेदनशील विषय को देखते हुए इसमें टाइटल, विजुअल्स और डायलॉग्स सहित कम से कम 127 कट्स लगाने की शर्त रख दी। मेकर्स ने इसके खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन थिएटर में रिलीज का कोई रास्ता न देख आखिरकार याचिका वापस ले ली गई।

इसके बाद मेकर्स ने कानूनी खामियों या कहें 'रेगुलेटरी गैप' का फायदा उठाने की रणनीति बनाई। सिनेमाघरों के लिए जहां CBFC का सर्टिफिकेट अनिवार्य है, वहीं ओटीटी प्लेटफॉर्म 'सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021' के तहत आते हैं, जहां सेल्फ-क्लासिफिकेशन (स्व-वर्गीकरण) का नियम लागू होता है। मेकर्स ने फिल्म का नाम बदलकर 'सतलुज' किया और बिना प्री-सर्टिफिकेशन के इसे सीधे ZEE5 पर उतार दिया। एक्टर-राइटर गज़ल ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार को यह भ्रम में रखकर कि 'पंजाब '95' पर अभी बात चल रही है, चुपचाप 'सतलुज' को रिलीज करना एक सोची-समझा प्री-प्लान्ड कदम था। निर्देशक हनी त्रेहान के मुताबिक, वे दर्शकों को कट्स से कटी-फटी फिल्म नहीं दिखाना चाहते थे, इसलिए ओटीटी ही एकमात्र रास्ता था।

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2. फीफा वर्ल्ड कप की व्यूअरशिप के बीच किसने लगवाया 'शैडो बैन'?

ZEE5 ने इस फिल्म का अपनी होम स्क्रीन पर जमकर प्रमोशन किया। यह वो वक्त था जब भारत में फुटबॉल वर्ल्ड कप के एक्सक्लूसिव ब्रॉडकास्टिंग राइट्स होने के कारण प्लेटफॉर्म पर दर्शकों का ट्रैफिक रिकॉर्ड स्तर पर था। लेकिन महज 48 घंटे में फिल्म को हटा दिया गया। प्लेटफॉर्म ने इसके पीछे सिर्फ "मौजूदा घटनाक्रमों" का हवाला दिया।

सरकारी सूत्रों और पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने सुरक्षा कारणों और 'आईटी नियम, 2021' के तहत मध्यस्थ दायित्वों का हवाला देते हुए ZEE5 को फिल्म हटाने का निर्देश दिया था। अधिकारियों को आशंका थी कि फिल्म का इस्तेमाल विदेशों या पंजाब में कमजोर पड़ रहे खालिस्तान-समर्थक आंदोलन को हवा देने और समर्थन जुटाने के लिए किया जा सकता है। हैरान करने वाली बात यह है कि बिना किसी लंबी कानूनी लड़ाई के ZEE5 ने तुरंत आदेश मान लिया। हालांकि, यह फिल्म भारत के बाहर 'ZEE5 ग्लोबल' पर अब भी स्ट्रीम हो रही है, जिससे भारत में इसे "शैडो बैन" (अप्रत्यक्ष प्रतिबंध) दिए जाने के आरोपों को बल मिला है।

3. 'डाउनलोड कर लो...' क्या दिलजीत दोसांझ ने पायरेसी को बढ़ावा दिया?

भारत में फिल्म बैन होने के तुरंत बाद दिलजीत दोसांझ का एक इंस्टाग्राम लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। दोसांझ ने कहा, "डर था कि इसे हटाया जा सकता है, इसलिए मुझे लगता है कि आपने अब तक इसे डाउनलोड कर लिया होगा। एक बार जो चीज ऑनलाइन आ जाती है, वो कभी डिलीट नहीं होती।" उन्होंने फैंस से अपील की कि वे इस डाउनलोड किए गए अनकट वर्जन को दूसरों के साथ शेयर करें।

इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया क्योंकि कानूनी तौर पर बिना अनुमति के कॉपीराइट कंटेंट को व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर बांटना पायरेसी के दायरे में आता है। एक्स (X) पर अर्शदीप सिंह सैनी जैसे यूजर्स ने आक्रोश जताते हुए कहा कि अमेरिकी नागरिक बन चुके दोसांझ देश के युवाओं को उकसा रहे हैं और ऐसी फिल्म प्रमोट कर रहे हैं जो उग्रवाद को सही ठहराती है। उन्होंने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय से दोसांझ पर भारत में पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की। हालांकि बाद में ZEE5 और मेकर्स ने बयान जारी कर प्रशंसकों से पायरेटेड कॉपियों से दूर रहने का आग्रह किया, जो कि इस पूरे विवाद की एक बड़ी विडंबना बन गया।

4. क्या ओटीटी की आजादी पर कसने जा रहा है शिकंजा?

'सतलुज' के इस 48 घंटे के एपिसोड ने यह साबित कर दिया कि भले ही ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को प्री-सेंसिंग से छूट मिली हो, लेकिन वे सरकारी दखल और 'पब्लिक ऑर्डर' (सार्वजनिक व्यवस्था) के नियमों से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं। फिल्म को रिलीज कर मेकर्स ने सेंसर बोर्ड को बायपास तो कर दिया, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर सरकार ने इसे पोस्ट-पब्लिकेशन रिव्यू में ब्लॉक करवा दिया। यह घटनाक्रम भविष्य में भारत के भीतर ओटीटी कंटेंट रेगुलेशन और स्ट्रीमिंग गाइडलाइंस को और ज्यादा कड़ा करने का आधार बन सकता है।

5. अंततः 'सतलुज' के इस गायब होने के खेल से फायदा किसे हुआ?

यदि ठंडे दिमाग से इस पूरे विवाद का विश्लेषण किया जाए, तो इस 48 घंटे की रिलीज से हर किसी को कुछ न कुछ फायदा हुआ है:

मेकर्स और डायरेक्टर: वे दुनिया के सामने फिल्म का वो 'अनकट और ओरिजिनल' वर्जन लाने में सफल रहे, जिसे वे असली कला मानते थे। अब जो भी फाइलें पायरेसी नेटवर्क पर घूम रही हैं, उन्हें मेकर्स के प्रामाणिक वर्जन के रूप में मान्यता मिल चुकी है।

ओटीटी प्लेटफॉर्म (ZEE5): भले ही फिल्म हटानी पड़ी, लेकिन इस विवाद ने फुटबॉल वर्ल्ड कप के साथ-साथ प्लेटफॉर्म को देश भर में जबरदस्त पब्लिसिटी और बज (Buzz) दिला दिया।

दिलजीत दोसांझ और राजनीतिक दल: फरवरी 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों से एक साल से भी कम समय पहले यह मुद्दा गरमाया है। सिख संगठनों और विपक्षी दलों को सेंसरशिप और पंजाब के इतिहास को दबाने के नाम पर सरकार को घेरने का एक बड़ा सियासी हथियार मिल गया है।

नुकसान सिर्फ उस दर्शक का हुआ है जो कानूनी और आधिकारिक तरीके से सिनेमा देखना पसंद करता है। इस विवाद के बाद 'सतलुज' भले ही कानूनी तौर पर भारत के डिजिटल स्पेस से गायब हो गई हो, लेकिन इंटरनेट के भूमिगत रास्तों (व्हाट्सएप, टेलीग्राम) पर यह रातों-रात वायरल हो चुकी है। जैसा कि इंटरनेट पर एक यूजर ने तंज कसा, "अब वो दौर आ गया है जब मेकर्स अपनी फिल्मों को वायरल करने के लिए खुद उस पर बैन लगाने की मिन्नतें करेंगे।"

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