Hormuz Strait में फंसे भारत आ रहे 28 जहाज, गहराया Energy Crisis, सैकड़ों नाविकों की सुरक्षा दांव पर।

Strait of Hormuz
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Ankit Jaiswal । Mar 31 2026 9:03PM

पश्चिम एशिया में हॉर्मुज संकट के कारण भारत के कई ऊर्जा टैंकर फंस गए हैं, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर दबाव बन गया है। सरकार राजनयिक स्तर पर ईरान से बातचीत कर रही है और कुछ जहाजों को सुरक्षित निकालने में सफलता मिली है, जबकि सैकड़ों भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है, और इसी कड़ी में सरकार लगातार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय बनी हुई है। बता दें कि ईरान के साथ बातचीत के जरिए कुछ भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिलाने में सफलता मिली है, जिससे हाल के दिनों में कुछ टैंकर सुरक्षित रूप से स्ट्रेट पार कर पाए हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, फारस की खाड़ी में इस समय कई जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें भारत के झंडे वाले जहाजों के अलावा विदेशी झंडे वाले ऊर्जा टैंकर भी शामिल हैं, जो भारत के लिए तेल और गैस लेकर आ रहे थे। गौरतलब है कि यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बेहद अहम मार्ग माना जाता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की आवाजाही होती है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल करीब 18 भारतीय जहाज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में खड़े हैं, जिनमें से लगभग आधे ऊर्जा से जुड़े टैंकर हैं। इन जहाजों पर सैकड़ों भारतीय नाविक मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है। बता दें कि इसके अलावा करीब 10 विदेशी जहाज भी ऐसे हैं, जो भारत के लिए ऊर्जा लेकर इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं।

मौजूद स्थिति यह है कि हाल के हफ्तों में कुछ जहाजों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें रसोई गैस लेकर आने वाले टैंकर भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी सबसे जरूरी काम सभी फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना है, उसके बाद ही आगे की आपूर्ति को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, और रसोई गैस के मामले में यह निर्भरता और भी ज्यादा है। देश की कुल खपत का एक बड़ा भाग पश्चिम एशिया से आता है, और यह मार्ग बंद होने या बाधित होने से सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।

बता दें कि स्ट्रेट के जरिए वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की भारी मात्रा में आपूर्ति होती है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा हालात में ईरान चुनिंदा देशों के जहाजों को बातचीत के आधार पर सुरक्षित रास्ता दे रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्र में आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं है, बल्कि नियंत्रित तरीके से चल रही है।

ईरान की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया है कि जो देश उसके खिलाफ किसी कार्रवाई में शामिल नहीं हैं, उनके जहाज तय नियमों के तहत गुजर सकते हैं। हालांकि, युद्ध जैसे हालात के कारण सुरक्षा के कड़े उपाय लागू किए गए हैं, जिनका पालन करना जरूरी है।

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