देश में रसोई गैस की किल्लत, Indian Oil ने Iran से खरीदा LPG का बड़ा कंसाइनमेंट

Indian Oil
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Ankit Jaiswal । Mar 30 2026 9:46PM

देश में गहराते रसोई गैस संकट से निपटने के लिए भारत ने लगभग आठ साल बाद ईरान से 43 हजार टन एलपीजी का आयात किया है, जिसे इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल द्वारा साझा किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से घरेलू उपलब्धता पर भारी दबाव बना हुआ है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आपूर्ति बाधाओं के बीच भारत ने एक अहम कदम उठाते हुए लगभग आठ साल बाद ईरान से रसोई गैस की खरीद शुरू की है। मौजूद जानकारी के अनुसार इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने यह गैस खरीदी है, जिसे अन्य सरकारी कंपनियों के साथ साझा किया जाएगा।

गौरतलब है कि यह खरीद ऐसे समय में की गई है जब वैश्विक स्तर पर आपूर्ति बाधित होने के कारण देश में रसोई गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक इस खेप को भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ मिलकर इस्तेमाल किया जाएगा।

बताया जा रहा है कि करीब 43 हजार टन गैस की यह खेप ब्यूटेन और प्रोपेन का मिश्रण है, जो भारत की कुल मांग के हिसाब से बहुत सीमित मानी जा रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार यह मात्रा देश की आधे दिन की जरूरत ही पूरी कर सकती है।

बता दें कि भारत अपनी रसोई गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है और इसमें भी ज्यादातर आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती है। हाल के घटनाक्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर पड़ने से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे देश में दबाव और बढ़ गया है।

कई इलाकों में गैस की कमी के कारण लोगों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है और कुछ जगहों पर सिलेंडर के लिए लंबी कतारें भी देखी गई हैं। सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए होटल और व्यावसायिक उपयोग पर आंशिक रोक लगाई है और प्राकृतिक गैस पाइपलाइन विस्तार को तेज करने के निर्देश दिए हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार यह खरीद ऐसे समय में संभव हो पाई है जब अमेरिका की ओर से कुछ शर्तों के साथ ईरान से ऊर्जा आयात की अनुमति दी गई है। इससे पहले कड़े प्रतिबंधों के कारण लंबे समय से यह व्यापार रुका हुआ था।

सूत्रों के मुताबिक यह गैस लेकर आ रहा जहाज भारत के तटीय क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में देश के दक्षिणी बंदरगाह पर पहुंच सकता है। साथ ही भारत दो अन्य गैस खेपों के सुरक्षित मार्ग को लेकर भी बातचीत के अंतिम चरण में बताया जा रहा है।

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