Hyundai India का बड़ा ऐलान: सितंबर से बढ़ेंगे गाड़ियों के रेट, 2026 में तीसरी बार Price Hike का बढ़ेगा दबाव

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Ankit Jaiswal । Aug 19 2026 8:04PM

कच्चे माल और परिवहन खर्चों में निरंतर वृद्धि के कारण हुंडई इंडिया का सितंबर से कीमतों में इजाफा करने का फैसला ऑटोमोबाइल सेक्टर में बढ़ते लागत प्रबंधन की गंभीर चुनौती को उजागर करता है। बढ़ते व्यय का एक हिस्सा ग्राहकों पर डालने की यह रणनीतिक विवशता दर्शाती है कि कंपनियां अब परिचालन संबंधी खर्चों को खुद वहन करने की अधिकतम सीमा तक पहुंच चुकी हैं।

कार खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए सितंबर से खर्च थोड़ा बढ़ सकता है। हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड ने अपनी सभी गाड़ियों की कीमतों में सितंबर 2026 से 1 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। कंपनी ने बुधवार को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि अलग-अलग मॉडल और उनके वर्जन के हिसाब से कीमत बढ़ने की मात्रा अलग होगी।

कंपनी के मुताबिक, गाड़ियों की कीमत बढ़ाने के पीछे उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले सामान और अन्य कच्चे माल की बढ़ती लागत प्रमुख वजह है। इसके अलावा परिचालन खर्च बढ़ने और लगातार बने हुए वैश्विक तथा आर्थिक अनिश्चितताओं का भी लागत पर असर पड़ा है। कंपनी ने कहा है कि वह लागत को नियंत्रित रखने और बढ़े हुए खर्च का एक हिस्सा खुद वहन करने की लगातार कोशिश कर रही है।

हालांकि, लागत का दबाव लंबे समय तक बने रहने के कारण इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना जरूरी हो गया है। हुंडई ने इसे सीमित बढ़ोतरी बताया है, जिसका उद्देश्य बढ़ती लागत की भरपाई करना है, जबकि ग्राहकों पर इसका असर कम से कम रखने की कोशिश की जाएगी।

गौरतलब है कि 2026 में यह हुंडई की गाड़ियों की कीमत बढ़ाने की तीसरी घोषणा है। कंपनी ने इस साल की शुरुआत में 1 जनवरी से अपनी गाड़ियों के दाम में औसतन 0.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद अप्रैल में कंपनी ने कीमतों में 1 प्रतिशत तक और बढ़ाने की घोषणा की थी।

दूसरी बढ़ोतरी पहले मई से लागू होनी थी, लेकिन इसे बाद में टाल दिया गया और 1 जून से लागू किया गया। उस समय अलग-अलग मॉडल और संस्करण के आधार पर गाड़ियों की कीमत में अधिकतम 12,800 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई थी।

मौजूदा बढ़ोतरी ऐसे समय में की जा रही है जब वाहन कंपनियों पर उत्पादन लागत का दबाव बना हुआ है। भारत में इस साल कई वाहन निर्माता कंपनियों ने अपनी गाड़ियों के दाम बढ़ाए हैं। मारुति सुजुकी ने भी हाल के महीनों में अपने पूरे वाहन पोर्टफोलियो की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी की है। टाटा मोटर्स यात्री वाहन कारोबार ने भी कीमतें बढ़ाई हैं।

बता दें कि वाहन कंपनियों के लिए कच्चे माल की कीमत, ईंधन और परिवहन खर्च, उत्पादन लागत और दूसरी परिचालन लागत सीधे तौर पर गाड़ियों की कीमत को प्रभावित करती हैं। कंपनियां आम तौर पर लागत बढ़ने पर उसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, जबकि बाकी खर्च खुद संभालने की कोशिश करती हैं।

इस बीच बुधवार को शेयर बाजार में हुंडई मोटर इंडिया के शेयर में भी गिरावट रही। कंपनी का शेयर राष्ट्रीय शेयर बाजार में 0.53 प्रतिशत नीचे आकर 2,174.50 रुपये पर बंद हुआ। बाजार में व्यापक कमजोरी के बीच शेयर में यह गिरावट दर्ज की गई है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, सितंबर में लागू होने वाली नई बढ़ोतरी का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ग्राहक कौन-सा मॉडल और कौन-सा संस्करण खरीदते हैं। ऐसे में नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए अगस्त में मौजूदा कीमत पर खरीदारी करना सितंबर की तुलना में कुछ सस्ता पड़ सकता है।

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