IDBI Bank निजीकरण का AIBEA ने किया विरोध, विदेशी निवेश से जुड़े फैसले को वापस लेने की मांग

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (AIBEA) ने केंद्र सरकार द्वारा आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के कदम का कड़ा विरोध किया है। संगठन का कहना है कि बैंक अब मुनाफा कमा रहा है, ऐसे में सार्वजनिक बचत और नियंत्रण को विदेशी निवेशक के हाथों में सौंपना ठीक नहीं है।
बैंक कर्मचारी संगठनों ने आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के सरकार के फैसले का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। संगठनों का आरोप है कि बैंक में विदेशी निवेशक को हिस्सेदारी बेचने से सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था कमजोर होगी। ‘ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन’ (एआईबीईए) ने बयान में कहा कि बैंक की हिस्सेदारी बेचने का फैसला उचित नहीं है, क्योंकि बैंक पहले की वित्तीय मुश्किलों से उबर चुका है और हाल के वर्षों में अच्छा मुनाफा कमा रहा है।
फिलहाल, केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के पास आईडीबीआई बैंक की कुल करीब 94 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को करीब 53,000 करोड़ रुपये (5.5 अरब अमेरिकी डॉलर) में आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दी थी। सरकार इस सौदे को रणनीतिक पुनर्गठन बता रही है।
उसका कहना है कि हिस्सेदारी बिक्री के बाद भी केंद्र और एलआईसी की बैंक में कुल 34 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी। संगठन ने दावा किया कि आईडीबीआई के आईडीबीआई बैंक में विलय के दौरान सरकार ने संसद को आश्वासन दिया था कि बैंक में उसकी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से कम नहीं होगी। प्रस्तावित निजीकरण इस आश्वासन के विपरीत है।
यूनियन के मुताबिक, आईडीबीआई बैंक ने पिछले तीन वर्षों में क्रमशः 5,600 करोड़ रुपये, 7,500 करोड़ रुपये और 9,500 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। बैंक में आम लोगों की करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि है। संगठन ने आशंका जताई कि इस बिक्री से सार्वजनिक बचत की बड़ी राशि पर विदेशी निवेशक का नियंत्रण हो जाएगा।
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