Cognizant में 'Project Leap' की तैयारी, 15 हजार IT Jobs पर लटकी तलवार, भारत पर बड़ा असर

Cognizant
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Ankit Jaiswal । May 1 2026 9:53PM

कॉग्निजेंट में 15 हजार तक की संभावित छंटनी आईटी सेक्टर में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहां पारंपरिक सेवाओं की मांग घटने और AI का प्रभाव बढ़ने से कंपनियां अपनी रणनीति बदल रही हैं। यह कदम सिर्फ लागत कटौती नहीं, बल्कि बदलते बाजार में कंपनी को प्रासंगिक बनाए रखने और परिणाम-आधारित सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उठाया जा रहा है।

आईटी क्षेत्र से एक अहम खबर सामने आ रही है, जहां अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी कॉग्निजेंट अपने बड़े पुनर्गठन की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि कंपनी अपने ‘प्रोजेक्ट लीप’ कार्यक्रम के तहत हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है, जिससे आईटी उद्योग में एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल बनता दिख रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, कॉग्निजेंट करीब 7 हजार से लेकर 15 हजार तक नौकरियां कम कर सकती है। यह संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि कर्मचारियों को दिए जाने वाले मुआवजा पैकेज की अवधि तीन महीने होगी या छह महीने, और किन-किन क्षेत्रों में इसका असर पड़ेगा। गौरतलब है कि कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि कुमार के नेतृत्व में यह दूसरा बड़ा पुनर्गठन कार्यक्रम है। इससे पहले ‘नेक्स्टजेन’ योजना के तहत भी कंपनी ने अपने संचालन ढांचे में बदलाव किया था।

बता दें कि उस समय कंपनी ने धीमी विकास दर के चलते करीब 400 मिलियन डॉलर खर्च कर पुनर्गठन किया था, जिसमें 3500 गैर-राजस्व वाले पदों को खत्म किया गया था। वर्तमान में कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या करीब 3 लाख 57 हजार 600 है, जिनमें से अधिकांश भारत में कार्यरत हैं। मौजूद आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 2 लाख 56 हजार 900 कर्मचारी हैं, जिससे यहां इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।

कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी जतिन दलाल ने संकेत दिए हैं कि ‘प्रोजेक्ट लीप’ का उद्देश्य लागत में कमी लाना और संचालन को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुरूप बनाना है। उनका कहना है कि इससे कंपनी के मुनाफे में सुधार हो सकता है। गौरतलब है कि हाल के महीनों में कंपनी के शेयरों में भी गिरावट आई है और इस साल की शुरुआत से अब तक इसके मूल्य में करीब एक तिहाई कमी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी क्षेत्र इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार, पारंपरिक सेवाओं की मांग कमजोर हो रही है, वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल से काम करने के तरीके बदल रहे हैं। इसके अलावा वैश्विक कंपनियां अब अपने काम खुद संभालने की ओर भी बढ़ रही हैं, जिससे आईटी सेवा कंपनियों पर दबाव बढ़ा है।

उद्योग विशेषज्ञ फिल फर्श्ट का कहना है कि यह कदम सिर्फ लागत घटाने के लिए नहीं, बल्कि कंपनी को नए दौर के लिए तैयार करने के लिए उठाया जा रहा है। वहीं नीवे ग्लोबल के प्रमुख प्रवीण भदाड़ा के अनुसार, यह बदलाव इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि अब ग्राहक सिर्फ काम नहीं बल्कि परिणाम चाहते हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस पूरी व्यवस्था को बदल रही है।

गौरतलब है कि जहां एक ओर कंपनी मध्य स्तर के कर्मचारियों की संख्या कम कर सकती है, वहीं दूसरी ओर नए इंजीनियरों की भर्ती भी जारी है। बताया जा रहा है कि कंपनी ने हाल ही में करीब 6 हजार नए इंजीनियरों को शामिल किया है और आगे भी निचले स्तर पर भर्ती बढ़ाने की योजना है।

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