इतिहास में पहली बार आपातकालीन भंडार का इस्तेमाल, ऑयल रिलीज करने के सामूहिक प्रयास से ओपेक को सीधा संदेश

इतिहास में पहली बार आपातकालीन भंडार का इस्तेमाल, ऑयल रिलीज करने के सामूहिक प्रयास से ओपेक को सीधा संदेश

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मंगलवार को एक समय सीमा निर्दिष्ट किए बिना एक बयान में कहा, अमेरिका, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ "समानांतर और परामर्श से" तेल जारी किया जाएगा। यूके ने घोषणा की है कि वह 1.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करेगा; अमेरिका 50 मिलियन बैरल रिलीज करने के लिए तैयार है।

कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए भारत अपने स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व में से 50 लाख बैरल रिलीज करने का ऐलान किया है। कच्चे तेल के इमरजेंसी स्टॉक को रिलीज करने का प्लान अमेरिका ने भारत, जापान समेत कुछ बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के साथ मिलकर बनाया है। इस कदम से पेट्रोल-डीजल के दाम कुछ कम हो सकते हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मंगलवार को एक समय सीमा निर्दिष्ट किए बिना एक बयान में कहा, अमेरिका, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ "समानांतर और परामर्श से" तेल जारी किया जाएगा। यूके ने घोषणा की है कि वह 1.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करेगा; अमेरिका 50 मिलियन बैरल रिलीज करने के लिए तैयार है।

ये देश सामरिक भंडार से तेल क्यों रिलीज कर रहे हैं?

बता दें कि बीते दिनों अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज प्लस (ओपेक+) से कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाने के लिए कहा था। जिसके पीछे कोरोना महामारी कम होने के बाद बढ़ी डिमांड का हवाला दिया था। ओपेक+ ने बाइडेन की बात को नजरअंदाज कर दिया। जिसके बाद सभी देशों ने मिलकर स्ट्रैटजिक ऑयल रिजर्व से तेल रिलीज करने का प्लान बनाया गया है। इस तरह देशों का साथ मिलकर ऑयल रिलीज करना इतिहास में पहली बार होगा। भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और तेल उत्पादक देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता में ओपेक+ द्वारा आपूर्ति में वृद्धि का आह्वान किया है। भारत का तर्क है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें कोविड के बाद खासकर विकासशील देशों में आर्थिक सुधार को प्रभावित कर रही हैं।

 कच्चे तेल की कीमतें होंगी प्रभावित ?

भारत के 3.8 करोड़ बैरल के भंडार में से 50 लाख बैरल निकालने की बात हो या अमेरिका के 60 करोड़ बैरल के भंडार में से 5 करोड़ बैरल निकालने की। ये मात्रा इतनी कम है कि इसका कोई और अर्थ नहीं लिया जा सकता। निश्चित रूप से ये एक सांकेतिक कदम है। अब देखने वाली बात है कि इसे ओपेक देश किस रूप में लेते हैं। 

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भारत को कैसे प्रभावित किया है?

उच्च वैश्विक कीमतों ने उपभोक्ताओं को देश भर में पेट्रोल और डीजल के लिए रिकॉर्ड उच्च कीमतों का भुगतान करने पर मजबूर किया।  दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 104.0 रुपये प्रति लीटर पर और डीजल की कीमतें 86.7 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई, जो एक साल पहले की तुलना में क्रमशः 27 प्रतिशत और 21 प्रतिशत अधिक है। पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती के केंद्र के हालिया कदम के बावजूद, उपभोक्ताओं को 2021 से पहले की तुलना में काफी अधिक कीमतें अदा करनी पड़ रही हैं। केंद्र ने 2020 में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में क्रमशः 13 रुपये और 16 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी, ताकि महामारी की वजह से नीचे जाती को स्थर करने के लिए राजस्व को बढ़ाया जा सके। कुछ राज्यों ने ईंधन पर वैट भी बढ़ाया है।