गडकरी ने कहा, NHAI के अक्षम अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाने का समय

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अक्टूबर 26, 2020   18:02
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गडकरी ने कहा, NHAI के अक्षम अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाने का समय
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गडकरी ने एनएचएआई में ‘देरी’ की कार्य संस्कृति पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि अब समय आ गया है जबकि ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ को बाहर का रास्ता दिखाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग परियोजनाओं में देरी कर रहे हैं और अड़चनें पैदा कर रहे हैं।

नयी दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) में काम की सुस्त रफ्तार से काफी नाराज हैं। गडकरी ने एनएचएआई में ‘देरी’ की कार्य संस्कृति पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि अब समय आ गया है जबकि ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ को बाहर का रास्ता दिखाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग परियोजनाओं में देरी कर रहे हैं और अड़चनें पैदा कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि एनएचएआई अक्षम अधिकारियों का ‘स्थल’ बना हुआ है, जो अड़चनें पैदा कर रहे हैं। ये अधिकारी प्रत्येक मामले को समिति के पास भेज देते हैं।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जबकि ऐसे अधिकारियों को ‘निलंबित’ और बर्खास्त किया जाना चाहिए और कामकाज में सुधार लाया जाना चाहिए। गडकरी ने द्वारका में एनएचएआई के भवन के उद्घाटन के अवसर पर एक वर्चुअल बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस भवन को बनने में नौ साल लगे हैं। उन्होंने कहा कि यहां ऐसे एनपीए हैं जो केंचुएं की तरह भी काम नहीं कर सकते हैं। यहां उन्हें रखा जाता है और पदोन्नत किया जाता है। मंत्री ने कहा, ‘‘इस तरह की विरासत को आगे बढ़ाने वाले अधिकारियों के रवैये पर मुझे शर्म आती है।’’ एनएचएआई के भवन के निर्माण में देरी पर नाराजगी जताते हुए गडकरी ने कहा, ‘‘ये अधिकारी फैसले लेने में विलंब करते हैं और जटिलताएं पैदा करते हैं। ये मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम), महाप्रबंधक (जीएम) स्तर के अधिकारी हैं जो बरसों से यहां जमे हैं।’’ 

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उन्होंने कहा कि इस इमारत के लिए निविदा 2011 में दी गई थी। इसे पूरा होने में नौ साल लगे। इस दौरान सात एनएचएआई चेयरमैन और दो सरकारें आईं-गईं। उन्होंने कहा कि आठवें चेयरमैन एस एस संधू के कार्यकाल में यह भवन पूरा हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस तरह की देरी पर एक शोध पत्र तैयार होना चाहिए। इसमें देरी के लिए जिम्मेदार सीजीएम और जीएम की तस्वीरें होनी चाहिए। गडकरी ने कहा कि ऐसे लोगों का नाम और तस्वीरें सार्वजनिक करने के लिए समारोह होना चाहिए, जैसा कि मंत्रालय अच्छा काम करने वाले अधिकारियों के लिए करता है।







नवंबर में डीजल की बिक्री सात प्रतिशत गिरी, जानिए पेट्रोल के दामों का हाल

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 1, 2020   18:17
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नवंबर में डीजल की बिक्री सात प्रतिशत गिरी, जानिए पेट्रोल के दामों का हाल
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नवंबर में डीजल की बिक्री मासिक आधार पर आठ प्रतिशत अधिक रही। नवंबर, 2020 में देश में डीजल की खपत 62.3 लाख टन रही। यह साल भर पहले 67 लाख टन थी। अक्टूबर, 2020 में देश में 57 लाख टन डीजल की खपत हुई थी।

नयी दिल्ली। देश में डीजल की बिक्री आठ महीने में पहली बार अक्टूबर में सालाना आधार पर बढ़ने के बाद नवंबर में फिर घट गई है। नवंबर में सालाना आधार पर डीजल की बिक्री में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। उद्योग जगत के आंकड़ों में इसकी जानकारी मिली। नवंबर में डीजल की बिक्री मासिक आधार पर आठ प्रतिशत अधिक रही। नवंबर, 2020 में देश में डीजल की खपत 62.3 लाख टन रही। यह साल भर पहले 67 लाख टन थी। अक्टूबर, 2020 में देश में 57 लाख टन डीजल की खपत हुई थी। उद्योग जगत के एक अधिकारी ने कहा कि सितंबर में डीजल की बिक्री कोरोना महामारी से पहले के स्तर पर पहुंच गयी थी। इसके बाद नवंबर में इसके उपभोग में कमी आने से पता चलता है कि सुधार टिकाऊ नहीं है।

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इस दौरान पेट्रोल की बिक्री साल भर पहले के 22.8 लाख टन से बढ़कर 24 लाख टन पर पहुंच गयी। रसोई गैस (एलपीजी) की बिक्री भी 4.5 प्रतिशत बढ़कर 23.6 लाख टन पर पहुंच गयी। आलोच्य महीने के दौरान विमान ईंधन (एटीएफ) की बिक्री सालाना आधार पर 48 प्रतिशत नीचे 3,46,000 टन रही। यह मासिक आधार पर 6.3 प्रतिशत अधिक रही। पेट्रोलियम उत्पादों की कुल मांग अक्टूबर में 2.5 प्रतिशत बढ़कर 177.7 लाख टन रही। पेट्रोल की मांग सितंबर महीने में कोरोना वायरस महामारी से पहले के स्तर पर पहुंची थी, जबकि डीजल की मांग अक्टूबर में सामान्य हो पायी थी। अक्टूबर में डीजल की मांग सालाना आधार पर 7.4 प्रतिशत तथा पेट्रोल की बिक्री 4.5 प्रतिशत अधिक रही थी। उद्योग जगत के सूत्रों ने कहा कि मासिक आधार पर नवंबर में डीजल की बिक्री बढ़ी है, जो एक अच्छा संकेत है।







सेंसेक्स 506 अंक की बढ़त के साथ नए उच्चस्तर पर, निफ्टी 13,100 अंक के पार

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 1, 2020   18:07
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सेंसेक्स 506 अंक की बढ़त के साथ नए उच्चस्तर पर, निफ्टी 13,100 अंक के पार
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 140.10 अंक यानी 1.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 13,109.05 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में सन फार्मा का शेयर सबसे अधिक लाभ में रहा। यह पांच प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। इसके अलावा इंडसइंड बैंक, टेक महिंद्रा, ओएनजीसी, भारती एयरटेल, इंफोसिस, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज ऑटो भी बढ़त लिए रहे।

मुंबई। विदेशी निवेशकों के लगातार पूंजी निवेश के चलते शेयर बाजारों में मंगलवार को तेजी का रुख रहा। सेंसेक्स 506 अंक की बढ़त के साथ अपने नए उच्चस्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 13,100 अंक के पार निकल गया। कारोबारियों के मुताबिक डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती और अन्य एशियाई बाजारों के रुख से घरेलू शेयर बाजारों की धारणा मजबूत हुई। बीएसई का 30 शेयरों का सूचकांक सेंसेक्स 505.72 अंक यानी 1.15 प्रतिशत बढ़कर 44,655.44 अंक पर बंद हुआ।

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इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 140.10 अंक यानी 1.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 13,109.05 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में सन फार्मा का शेयर सबसे अधिक लाभ में रहा। यह पांच प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। इसके अलावा इंडसइंड बैंक, टेक महिंद्रा, ओएनजीसी, भारती एयरटेल, इंफोसिस, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज ऑटो भी बढ़त लिए रहे। वहीं दूसरी तरफ कोटक बैंक, नेस्ले इंडिया, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक और एनटीपीसी के शेयरों में गिरावट आई। आरंभिक आंकड़ों के हिसाब से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने शुक्रवार को 7,712.98 करोड़ रुपये के शेयरों की खरीद की। मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 37 पैसे की मजबूती के साथ 73.68 पर बंद हुआ। इसके अलावा शंघाई, तोक्यो, हांगकांग और सियोल के बाजार भी लाभ के साथ बंद हए। इस बीच वैश्विक बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल का भाव 0.10 प्रतिशत गिरकर 47.83 डॉलर प्रति बैरल रहा।







सरकार को बड़ी राहत, नवंबर में जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ के पार

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 1, 2020   17:43
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सरकार को बड़ी राहत, नवंबर में जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ के पार
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जीएसटी संग्रह नवंबर में लगातार दूसरे महीने एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।चालू वित्त वर्ष में यह लगातार दूसरा महीना है जबकि जीएसटी संग्रह का आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। नवंबर में जीएसटी संग्रह पिछले साल के समान महीने से 1.4 प्रतिशत अधिक है।

नयी दिल्ली। सरकार का माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह नवंबर में 1.04 लाख करोड़ रुपये रहा है। यह लगातार तीसरा महीना है जब जीएसटी संग्रह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में बढ़ा है। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को बयान में यह जानकारी दी। हालांकि, अक्टूबर की तुलना में जीएसटी राजस्व का आंकड़ा मामूली घटा है। अक्टूबर में यह 1.05 लाख करोड़ रुपये रहा था। चालू वित्त वर्ष में यह लगातार दूसरा महीना है जबकि जीएसटी संग्रह का आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। नवंबर में जीएसटी संग्रह पिछले साल के समान महीने से 1.4 प्रतिशत अधिक है। नवंबर, 2019 में जीएसटी संग्रह 1,03,491 करोड़ रुपये रहा था। जीएसटी संग्रह का आंकड़ा आर्थिक गतिविधियों की स्थिति को दर्शाता है।

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कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से अप्रैल में जीएसटी संग्रह 32,172 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था। लॉकडाउन में ढील के बाद जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी हो रही है। चालू वित्त वर्ष में सितंबर में पहली बार सालाना आधार पर जीएसटी संग्रह बढ़ा था। अक्टूबर में जीएसटी संग्रह ने एक लाख करोड़ रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार किया था। वित्त मंत्रालय ने कहा, ‘‘जीएसटी राजस्व में सुधार के हालिया रुख के अनुरूप नवंबर में संग्रह का आंकड़ा पिछले साल के समान महीने से 1.4 प्रतिशत अधिक रहा है।’’ बयान में कहा गया है कि समीक्षाधीन महीने में वस्तुओं के आयात से राजस्व पिछले साल के समान महीने की तुलना में 4.9 प्रतिशत अधिक रहा। वहीं घरेलू लेनदेन से राजस्व पिछले साल के समान महीने से 0.5 प्रतिशत अधिक रहा है। नवंबर, 2020 में कुल जीएसटी राजस्व 1,04,963 करोड़ रुपये रहा है। इसमें केंद्रीय जीएसटी 19,189 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी 25,540 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी 51,992 करोड़ रुपये है (इसमें से 22,078 करोड़ रुपये वस्तुओं के आयात पर जुटाए गए हैं)। इसमें उपकर का योगदान 8,242 करोड़ रुपये (वस्तुओं के आयात पर जुटाए गए 809 करोड़ रुपये शामिल) का रहा है।

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वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने पिछले सप्ताह कहा था कि जीएसटी अधिकारियों ने 25,000 ऐसे करदाताओं की पहचान की है जिन्होंने अक्टूबर में जीएसटी रिटर्न दाखिल किया था, लेकिन उन्होंने नवंबर में रिटर्न दाखिल नहीं किया है। 28 नवंबर तक कुल 80 लाख जीएसटी रिटर्न दाखिल किए गए थे। जीएसटी नियमों के अनुसार, अक्टूबर में की गई आपूर्ति के लिए जीएसटीआर-3बी रिटर्न नवंबर की 20, 22 और 24 तारीख तक जमा करने की जरूरत होती है। पांच करोड़ रुपये सालाना से अधिक के कारोबार वाली इकाइयों को जीएसटीआर-3बी रिटर्न महीने की 20 तारीख तक जमा कराना होता है। बीते वित्त वर्ष 2019-20 में 12 में से आठ महीनों में जीएसटी राजस्व एक लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा था। हालांकि, चालू वित्त वर्ष में कोरोना वायरस महामारी की वजह से लगाए गए लॉकडाउन से जीएसटी राजस्व प्रभावित हुआ है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल में जीएसटी संग्रह सिर्फ 32,172 करोड़ रुपये रहा था। मई में जीएसटी संग्रह 62,151 करोड़ रुपये, जून में 90,917 करोड़ रुपये, जुलाई में 87,422 करोड़ रुपये, अगस्त में 86,449 करोड़ रुपये, सितंबर में 95,480 करोड़ रुपये और अक्टूबर में 1,05,155 करोड़ रुपये रहा था।