Gautam Adani को USA में बड़ी राहत, SEC रिश्वत केस में सेटलमेंट पर बनी सहमति

गौतम अडानी ने रिश्वत मामले को निपटाने के लिए अमेरिकी एसईसी के साथ जुर्माना भरने पर सहमति जताई है, जिससे समूह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राहत मिली है। इस समझौते के पीछे अडानी की नई कानूनी टीम की रणनीति और अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश का प्रस्ताव अहम कारक माने जा रहे हैं, हालांकि अंतिम फैसला अदालत द्वारा लिया जाएगा।
अडानी समूह से जुड़ा मामला एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। अमेरिका के प्रतिभूति और विनिमय आयोग यानी एसईसी ने भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे रिश्वत और निवेशकों को गुमराह करने से जुड़े दीवानी मुकदमे में समझौता कर लिया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, यह समझौता अब अदालत की मंजूरी के बाद ही पूरी तरह लागू हो सकेगा।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी न्याय विभाग भी गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे आपराधिक धोखाधड़ी के मामले को वापस लेने की तैयारी में है। अदालत में पेश दस्तावेजों के अनुसार, गौतम अडानी ने 60 लाख डॉलर का दीवानी जुर्माना भरने पर सहमति जताई है, जबकि उनके भतीजे और अडानी ग्रीन एनर्जी के अधिकारी सागर अडानी 1 करोड़ 20 लाख डॉलर का भुगतान करेंगे। हालांकि इस समझौते में किसी भी प्रकार के अपराध को स्वीकार नहीं किया गया।
बता दें कि यह मामला साल 2024 में उस समय सामने आया था जब अमेरिकी एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि भारत में सौर ऊर्जा परियोजना हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत दी गई थी और अमेरिकी निवेशकों के सामने गलत जानकारी पेश की गई थीं।
गौरतलब है कि अमेरिका में यह कार्रवाई पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के दौरान शुरू हुई थी। वहीं भारत में इस मामले को लेकर किसी बड़ी जांच की खबर सामने नहीं आई हैं। हालांकि आरोप सामने आने के बाद अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई थी और कई कंपनियों के शेयर 23 प्रतिशत तक टूट गए थे।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गौतम अडानी ने हाल ही में नई कानूनी टीम नियुक्त की थी, जिसकी अगुवाई रॉबर्ट जिउफ्रा कर रहे थे। रॉबर्ट जिउफ्रा को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी वकीलों में गिना जाता हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल में हुई बैठक के दौरान अडानी पक्ष के वकीलों ने 100 से ज्यादा प्रस्तुति स्लाइड्स के जरिए यह दलील दी कि अमेरिकी एजेंसियों के पास पर्याप्त सबूत और अधिकार क्षेत्र दोनों की कमी थीं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अडानी समूह ने अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने और करीब 15 हजार रोजगार पैदा करने का प्रस्ताव भी रखा था। गौरतलब है कि गौतम अडानी ने नवंबर 2024 में डोनाल्ड ट्रंप की चुनावी जीत के बाद सोशल मीडिया पर भी अमेरिका में बड़े निवेश की बात कही थी।
उस समय गौतम अडानी ने कहा था कि भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत होने के साथ अडानी समूह ऊर्जा सुरक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में 10 अरब डॉलर तक निवेश करने के लिए तैयार है। कंपनी का दावा था कि इससे अमेरिका में हजारों नौकरियां पैदा हो सकती हैं।
फिलहाल इस मामले पर अंतिम फैसला अदालत की मंजूरी के बाद ही साफ हो पाएगा। हालांकि इस घटनाक्रम ने एक बार फिर वैश्विक कारोबारी जगत में अडानी समूह और अमेरिकी एजेंसियों के संबंधों को चर्चा के केंद्र में ला दिया हैं।
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