HNGIL का विनिर्माण क्षमता विस्तार पर 500 करोड़ रुपये तक निवेश का लक्ष्य

माधवानी-टर्नर समूह की कंपनी हिंदुस्तान नेशनल ग्लास एंड इंडस्ट्रीज चालू वित्त वर्ष के अंत तक अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए 300 से 500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। कंपनी के मुख्य रणनीति अधिकारी सूरज मेहता ने बताया कि यह राशि क्षमता विस्तार और परिचालन खर्चों में लगाई जाएगी। सितंबर 2025 में आईबीसी प्रक्रिया के जरिए नए स्वामित्व में आने के बाद कंपनी पहले ही करीब 700 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है।
हिंदुस्तान नेशनल ग्लास एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एचएनजीआईएल) चालू वित्त वर्ष के अंत तक अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए अगले पांच महीने में 300-500 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है। कंपनी अब अफ्रीका के माधवानी-टर्नर समूह का हिस्सा है। कंपनी का अधिग्रहण सितंबर 2025 में दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत दिवाला समाधान प्रक्रिया के जरिये इंडिपेंडेंट शुगर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 2,250 करोड़ रुपये में किया था।
स्वामित्व बदलने के बाद से कंपनी अपने कारोबार में करीब 700 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है। एचएनजीआईएल के मुख्य रणनीति अधिकारी सूरज मेहता ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘चालू वित्त वर्ष के बाकी समय में 300-500 करोड़ रुपये का और निवेश किया जाएगा। यह निवेश क्षमता विस्तार और परिचालन खर्चों को पूरा करने के लिए होगा।’’ मुंबई स्थित यह कंपनी कांच की बोतलें और जार बनाती है।
दिवाला समाधान प्रक्रिया के दौरान कंपनी को मिले कई ऑर्डर की आपूर्ति चालू वित्त वर्ष में की जा रही है। मेहता ने कहा कि दिवाला समाधान प्रक्रिया पूरी होने और प्रबंधन में बदलाव के बाद कंपनी का कारोबार फिर से पटरी पर आ गया है। उसे चालू तिमाही से लाभ होने की उम्मीद है और इसका असर वित्तीय नतीजों में दिखना शुरू हो जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी आय में वृद्धि सीधे विनिर्माण क्षमता बढ़ाने से जुड़ी है और फिलहाल हमारा मुख्य ध्यान इसी पर है। हमें उम्मीद है कि चालू तिमाही से लाभ पर इसका असर दिखने लगेगा और इस तिमाही के नतीजे काफी मजबूत रह सकते हैं।’’ मेहता के मुताबिक, स्वामित्व बदलने के बाद से कंपनी ने प्रतिदिन 1,100-1,200 टन विनिर्माण क्षमता बहाल की है। पिछले सप्ताह कंपनी ने हरियाणा के बहादुरगढ़ स्थित अपने संयंत्र में दूसरी भट्ठी चालू की।
इससे इस इकाई की उत्पादन क्षमता 300 टन प्रतिदिन से बढ़कर 600 टन प्रतिदिन हो गई है।
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