FDI Policy में बदलाव का असर, सीमा साझा करने वाले देशों के लिए Automatic Route से मिली बड़ी राहत

भारत सरकार द्वारा एफडीआई नियमों में दी गई हालिया ढील के परिणामस्वरूप सीमा साझा करने वाले देशों से जुड़े 4,895 करोड़ रुपये के 29 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं जो आर्थिक नीतियों में रणनीतिक लचीलेपन को दर्शाते हैं। प्रेस नोट 2 के माध्यम से आए ये बदलाव 10 प्रतिशत तक की गैर-नियंत्रणकारी हिस्सेदारी को स्वत: मार्ग से अनुमति देकर निवेश प्रक्रिया को सुगम और समयबद्ध बनाते हैं। एफडीआई नीति, विदेशी निवेश नियम, भारतीय अर्थव्यवस्था, कारोबार सुगमता।
भारत में विदेशी निवेश को लेकर नियमों में बदलाव का असर अब दिखने लगा है। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, संशोधित व्यवस्था के तहत 20 अगस्त तक 29 विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रस्ताव दर्ज किए गए हैं। इन प्रस्तावों के जरिए देश में कुल 4,895.65 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। निवेश से जुड़े पक्ष मॉरीशस, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर, लक्जमबर्ग और केमैन द्वीप जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं। ये निवेश सूचना प्रौद्योगिकी, एआई, सूचना एवं संचार सेवाओं, विनिर्माण, दवा, आंकड़ा केंद्र और परिवहन सेवाओं जैसे क्षेत्रों में प्रस्तावित हैं।
मौजूदा जानकारी के अनुसार, इन निवेश प्रस्तावों का सामने आना भारत की विदेशी निवेश व्यवस्था में हालिया बदलाव के बाद हुआ है। सरकार ने भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से जुड़े निवेश के नियमों में कुछ राहत दी है। अब ऐसे विदेशी निवेशकों को, जिनकी किसी सीमा साझा करने वाले देश से गैर-नियंत्रणकारी लाभकारी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है, कुछ शर्तों के साथ स्वत: मार्ग से निवेश करने की अनुमति मिल सकती है। हालांकि इसके लिए संबंधित क्षेत्र में तय निवेश सीमा, प्रवेश शर्तों और रिपोर्टिंग नियमों का पालन जरूरी है।
बता दें कि भारत ने अप्रैल 2020 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को कड़ा किया था। उस समय सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश या ऐसे निवेश जिनका लाभकारी मालिकाना हक किसी संबंधित देश में स्थित व्यक्ति या संस्था के पास था, उनके लिए सरकारी मंजूरी जरूरी कर दी गई थी। यह बदलाव उस समय देश की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच किया गया था।
गौरतलब है कि अब इस व्यवस्था में बदलाव प्रेस नोट-2, 2026 के माध्यम से किया गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने 15 मार्च को यह बदलाव जारी किया था, जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को इसे मंजूरी दी थी। इसके बाद विदेशी मुद्रा प्रबंधन से जुड़े नियमों में जरूरी संशोधन 1 मई को अधिसूचित किए गए।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से निवेशकों को नियमों को लेकर ज्यादा स्पष्टता मिलेगी और निवेश प्रक्रिया में लगने वाला समय घटेगा। साथ ही इससे देश में कारोबार करना आसान बनाने की दिशा में मदद मिलेगी। हालांकि स्वत: मार्ग की सुविधा मिलने के बावजूद निवेशकों को क्षेत्रवार नियमों और अनिवार्य रिपोर्टिंग का पालन करना होगा।
इस बदलाव के तहत लाभकारी स्वामित्व का आकलन धनशोधन निवारण नियम, 2005 में तय मानकों के अनुरूप करने की व्यवस्था भी की गई है। ऐसे में सरकार ने निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ निगरानी की व्यवस्था को भी बनाए रखा है। 20 अगस्त तक दर्ज 29 प्रस्ताव इसी बदली हुई व्यवस्था के शुरुआती प्रभाव को दिखाते हैं।
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