प्याज और खाद्य वस्तुएं महंगी होने से अगस्त में Retail Inflation उछलकर 4.82 प्रतिशत पहुंची

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.82 प्रतिशत दर्ज की गई, जो जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी। प्याज की महंगाई दर 48.27 प्रतिशत पर पहुंचने और अन्य खाद्य सामग्रियों के महंगे होने से यह बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर बना हुआ है।
प्याज और अन्य खाद्य वस्तुओं के महंगा होने से अगस्त महीने में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.82 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के मध्यम अवधि के लक्ष्य (चार प्रतिशत) से ऊपर बनी हुई है। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
इस बीच, थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति भी अगस्त में बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 9.78 प्रतिशत थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी। जनवरी से लागू 2024 आधार वर्ष वाली नई शृंखला के बाद से अगस्त की खुदरा मुद्रास्फीति का यह आंकड़ा अबतक सबसे अधिक है।
अगले महीने की शुरुआत में जब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक होगी, तब नीतिगत ब्याज दरों पर फैसला करने में सीपीआई का यह बढ़ा हुआ स्तर एक प्रमुख कारक साबित होगा। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी अगस्त के सीपीआई आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति की दर क्रमशः 5.23 प्रतिशत और 4.31 प्रतिशत दर्ज की गई। अगस्त में खुदरा खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 5.95 प्रतिशत हो गई, जो इससे पिछले महीने 5.52 प्रतिशत थी।
प्याज की महंगाई दर जुलाई के 22.54 प्रतिशत की तुलना में अगस्त में उछलकर 48.27 प्रतिशत पर पहुंच गई। इस दौरान लहसुन और अदरक की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई। दूसरी ओर टमाटर, आलू, भिंडी और परवल की कीमतों में गिरावट देखी गई।
राज्यों में सबसे अधिक खुदरा मुद्रास्फीति तेलंगाना में 6.27 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि सबसे कम मिजोरम में 2.35 प्रतिशत रही। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति के पांच प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया है, जिसके दूसरी तिमाही में 4.7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। भारतीय रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच हाल ही में प्रमुख नीतिगत दर रेपो को यथावत रखा था।
सरकार ने आरबीआई को मुद्रास्फीति को दो से छह प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने की जिम्मेदारी दी है। इस बीच, खाद्य, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं के दाम बढ़ने से थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति भी अगस्त में बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 9.78 प्रतिशत थी।
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