भारत में Retail Inflation 5.54 फीसदी पर पहुंचा, 22 महीने के उच्चतम स्तर पर महंगाई

भारत में सितंबर महीने की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई है, जो 22 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। खाद्य महंगाई, महंगे कच्चे तेल और कम बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। आरबीआई की पिछली बढ़ोतरी के बाद अब वित्तीय संस्था एचएसबीसी ने दिसंबर में भी ब्याज दरें बढ़ने की संभावना जताई है।
देश में महंगाई एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा रही है। सितंबर में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 4.82% थी। महंगाई में यह बढ़ोतरी अर्थशास्त्रियों के अनुमान से भी ज्यादा रही है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक पर कीमतों को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों को लेकर सख्त कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सितंबर में महंगाई दर अर्थशास्त्रियों के 5.40% के अनुमान से ऊपर रही। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत में खुदरा महंगाई लगातार 11 महीनों से बढ़ रही है। सितंबर का आंकड़ा पिछले 22 महीनों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। आम लोगों के लिए इसका सीधा मतलब है कि खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के खर्चों पर दबाव बढ़ सकता है।
खास तौर पर खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी ने चिंता बढ़ाई है। सितंबर में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 7.74% हो गई, जबकि अगस्त में यह 5.97% थी। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के मुताबिक, गांवों में खाद्य पदार्थों की कीमतें शहरों के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ीं। इसके अलावा, सामान ढोने से जुड़ी परिवहन सेवाओं की महंगाई दर 14.73% रही, जबकि निजी परिवहन की महंगाई दर 7.46% दर्ज की गई। परिवहन लागत बढ़ने से सामान की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि आरबीआई ने अक्टूबर की शुरुआत में 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी। केंद्रीय बैंक ने साफ किया था कि मौजूदा हालात में निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश नहीं है। आगे जरूरत पड़ने पर ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं या उन्हें मौजूदा स्तर पर रखा जा सकता है। ब्याज दरें बढ़ने से महंगाई को काबू करने में मदद मिल सकती है, लेकिन कर्ज लेना भी महंगा हो सकता है।
भारत के लिए एक बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भी है। देश अपनी ईंधन जरूरतों का करीब 85% आयात करता है। ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इसके साथ ही, तूफान इसायस और क्षेत्रीय तनाव के कारण तेल की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव रहने का अनुमान है।
आरबीआई ने मार्च 2027 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए मुख्य महंगाई दर 4.4% और खुदरा महंगाई दर 5.2% रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि, बैंक का मध्यम अवधि का महंगाई लक्ष्य 4% है। केंद्रीय बैंक ने देश की आर्थिक विकास दर का अनुमान 0.40 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.1% किया है, लेकिन उसने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक जारी वैश्विक तनाव, व्यापार से जुड़ी समस्याएं और महंगी वस्तुएं अर्थव्यवस्था की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं।
महंगाई की चिंता केवल तेल तक सीमित नहीं है। जून से सितंबर के बीच भारत में एक दशक से अधिक समय में सबसे कम बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, यह 2001 के बाद चौथी सबसे कम और 1901 के बाद 13वीं सबसे कम बारिश रही। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति है। इससे खेती, फसलों की पैदावार और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति पर असर पड़ने का खतरा है। संभावित सुपर अल नीनो की आशंका भी चिंता बढ़ा रही है।
वहीं, एचएसबीसी ने 7 अक्टूबर की अपनी रिपोर्ट में दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना जताई है। बता दें कि महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो आरबीआई को आर्थिक विकास और कीमतों पर नियंत्रण के बीच संतुलन बनाना होगा। आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतें, कच्चे तेल का बाजार और बारिश की स्थिति तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि महंगाई पर कितनी जल्दी काबू पाया जा सकता है।
अन्य न्यूज़













