Silver Import पर मोदी सरकार की बड़ी सख्ती, 'Restricted' लिस्ट में आई चांदी, अब लाइसेंस जरूरी।

सरकार ने चांदी के आयात पर नए प्रतिबंध लागू कर दिए हैं, जिसका उद्देश्य बढ़ते व्यापार घाटे और डॉलर के दबाव को नियंत्रित करना है। इस नीतिगत बदलाव से घरेलू बाजार में चांदी की उपलब्धता कम हो सकती है, जिससे इसकी कीमतें बढ़ने और इलेक्ट्रॉनिक्स व सौर ऊर्जा जैसे उद्योगों पर असर पड़ने की आशंका है।
देश में चांदी की बढ़ती मांग और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव के बीच केंद्र सरकार ने चांदी के आयात को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने चांदी की कई श्रेणियों को अब “मुक्त आयात” व्यवस्था से हटाकर “प्रतिबंधित आयात” श्रेणी में डाल दिया है। इसका मतलब यह है कि अब कुछ प्रकार की चांदी को विदेश से मंगाने के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी होगी।
बताया जा रहा है कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर पर दबाव के कारण भारत सरकार विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सरकार ने सोना और अन्य कीमती धातुओं पर सीमा शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था, जो पहले 6 प्रतिशत था। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी।
मौजूद जानकारी के अनुसार अब 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली चांदी की सिल्लियां, बिना ढली चांदी, अर्धनिर्मित चांदी और पाउडर के रूप में आने वाली चांदी के आयात पर सख्ती लागू की गई है। इन सभी को आयात करने के लिए अब सरकार से विशेष अनुमति लेनी होगी।
सरकार ने यह बदलाव आयात नीति अनुसूची और आईटीसी (एचएस) वर्गीकरण में संशोधन के जरिए लागू किया हैं। जानकारों का मानना है कि सरकार चांदी को अब केवल एक सामान्य धातु नहीं बल्कि विदेशी मुद्रा और व्यापार संतुलन से जुड़ी संवेदनशील वस्तु के तौर पर देख रही है।
भारत में चांदी का घरेलू उत्पादन सीमित हैं और देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता हैं। ऐसे में आयात पर सख्ती का असर सीधे घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अगर आयात प्रक्रिया कठिन होती है तो देश में चांदी की उपलब्धता कम हो सकती हैं। इससे स्थानीय बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ेगा और घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से अधिक हो सकती है।
बताया जा रहा है कि चांदी केवल निवेश का माध्यम नहीं बल्कि उद्योगों में भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल होती हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा, मशीन निर्माण और कई अन्य क्षेत्रों में चांदी की मांग लगातार बनी रहती हैं। ऐसे में आपूर्ति घटने की आशंका के चलते कारोबारी और उद्योग पहले से अधिक भंडारण शुरू कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आने वाले समय में घरेलू वायदा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल सकता हैं। इससे देश के बाजार में चांदी की कीमतें और तेजी से बढ़ सकती है।
गौरतलब है कि रुपये में कमजोरी, बढ़ते व्यापार घाटे और डॉलर की बढ़ती मांग के बीच सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही हैं जिससे विदेशी मुद्रा का दबाव कम किया जा सके। चांदी आयात पर नई सख्ती को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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