Nirmala Sitharaman ने राज्यों से Industrial Corridors की भूमि व संपर्क बाधाएं दूर करने को कहा

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नयी दिल्ली में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन न्यास की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने राज्यों से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की भूमि, संपर्क और वैधानिक मंजूरियों की बाधाएं जल्द दूर करने की अपील की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी उपस्थित रहे।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि औद्योगिक गलियारे देश में विनिर्माण के विस्तार का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने साथ ही राज्यों से भूमि, संपर्क, बुनियादी सेवाओं और वैधानिक मंजूरियों से जुड़ी बाधाओं को दूर करने का आग्रह किया। सीतारमण ने यहां राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन न्यास (एनआईसीडीआईटी) के शीर्ष निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि अब ध्यान केवल परियोजनाओं को मंजूरी देने के बजाय बुनियादी ढांचे को समय पर पूरा करने, भूमि आवंटन, निवेश और उत्पादन शुरू करने पर होना चाहिए।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बयान में कहा कि उन्होंने राज्यों से भूमि, संपर्क, बुनियादी सेवाओं, वैधानिक मंजूरियों और परियोजनाओं के लिए गठित विशेष उद्देश्यीय इकाइयों (एसपीवी) के अधिकारों से जुड़ी बाधाओं को दूर करने का आग्रह किया। बैठक में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (एनआईसीडीपी) के तहत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और औद्योगिक गलियारों के विकास के अगले चरण की प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। बैठक में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी भी शामिल हुए।

सीतारमण ने कहा कि औद्योगिक गलियारे भारत में विनिर्माण का विस्तार करने, माल ढुलाई की प्रतिस्पर्धी क्षमता मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक परिवेश तैयार करने की रणनीति का महत्वपूर्ण आधार हैं। गोयल ने औद्योगिक गलियारा परियोजनाओं को तेजी से और परिणाम आधारित तरीके से लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने समय पर निवेश सुनिश्चित करने और परियोजनाओं को चालू करने पर अधिक ध्यान देने की जरूरत बताई।

उन्होंने निवेशकों तक पहुंच बढ़ाने और औद्योगिक क्षेत्रों के बेहतर संपर्क पर भी जोर दिया। इसमें भारत के मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने तथा देश और क्षेत्र विशेष के औद्योगिक क्षेत्रों की संभावनाएं तलाशने का सुझाव दिया गया। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के तहत अब 13 राज्यों और सात औद्योगिक गलियारों में 20 स्वीकृत परियोजनाएं शामिल हैं।

धोलेरा (गुजरात), शेंद्रा-बिडकिन (महाराष्ट्र), ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) और विक्रम उद्योगपुरी (मध्य प्रदेश) की चार औद्योगिक स्मार्ट सिटी में उत्पादन शुरू हो चुका है। अगस्त, 2024 में मंजूर की गई 12 परियोजनाओं पर भी काम आगे बढ़ रहा है। इनमें बुनियादी ढांचे का विकास, भूमि आवंटन और निवेशकों से संपर्क की गतिविधियां एक साथ जारी हैं।

अब तक करीब 5,348 एकड़ में फैले 469 भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। इनमें करीब 2.21 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है और लगभग 1.29 लाख लोगों के लिए रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इनमें से 134 इकाइयों में उत्पादन शुरू हो चुका है, जबकि 95 अन्य इकाइयों का निर्माण कार्य जारी है।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इन औद्योगिक गलियारों के साथ राष्ट्रीय जलमार्गों के एकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने गलियारों के विकास के लिए जलमार्गों को संभावित मुख्य आधार के रूप में उपयोग करने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया।

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