Global Crisis के बीच RBI बना संकटमोचक, Government को मिले 2.87 लाख करोड़, Economy को बड़ा सहारा

भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹2.87 लाख करोड़ का रिकॉर्ड लाभांश देने की घोषणा की है, जो अब तक का सबसे बड़ा अधिशेष हस्तांतरण है। इस कदम से सरकार को राजकोषीय मोर्चे पर बड़ी राहत मिलेगी और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विकास योजनाओं पर खर्च का दायरा बढ़ेगा।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है। शुक्रवार को आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2.87 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड लाभांश सरकार को देने का ऐलान किया है। बता दें कि यह अब तक का सबसे बड़ा अधिशेष हस्तांतरण माना जा रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार यह फैसला आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अतिरिक्त राशि से सरकार को राजकोषीय मोर्चे पर काफी राहत मिल सकती है और विकास योजनाओं पर खर्च बढ़ाने में मदद मिलेगी।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई की तरफ से सरकार को दिए जाने वाले लाभांश में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्रीय बैंक ने 2.69 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। वहीं वित्त वर्ष 2023-24 में यह राशि 2.1 लाख करोड़ रुपये रही थी। इससे पहले वित्त वर्ष 2022-23 में आरबीआई ने 87,416 करोड़ रुपये का अधिशेष सरकार को दिया था।
आरबीआई के बयान के अनुसार जोखिम प्रावधान और वैधानिक निधियों में राशि स्थानांतरित करने से पहले केंद्रीय बैंक की कुल शुद्ध आय वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3,95,972.10 करोड़ रुपये पहुंच गई। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 3,13,455.77 करोड़ रुपये था। यानी एक साल में आय में काफी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सिर्फ आय ही नहीं, आरबीआई की बैलेंस शीट में भी मजबूत विस्तार देखने को मिला है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक उसकी कुल बैलेंस शीट 20.61 प्रतिशत बढ़कर 91,97,121.08 करोड़ रुपये हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार, निवेश आय और सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली कमाई में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण रही है।
आर्थिक जानकारों के मुताबिक सरकार के लिए यह लाभांश ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव लगातार चुनौती बने हुए हैं। ऐसे माहौल में अतिरिक्त राजस्व मिलने से सरकार को बुनियादी ढांचा, कल्याणकारी योजनाओं और पूंजीगत खर्च पर फोकस बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
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