PFRDA और ग्रामीण विकास विभाग के बीच समझौता, गांव-गांव वित्तीय जागरूकता फैलाएंगी 'पेंशन सखियां'

ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ग्रामीण विकास विभाग और पीएफआरडीए ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल के तहत डीएवाई-एनआरएलएम नेटवर्क और स्वयं सहायता समूहों के जरिए 'पेंशन सखियां' तैयार की जाएंगी। ये सखियां ग्रामीणों और लखपति दीदियों को पेंशन योजनाओं के पंजीकरण और सेवानिवृत्ति की योजना से जुड़ी अहम जानकारियां उपलब्ध कराएंगी।
ग्रामीण परिवारों में पेंशन के प्रति जागरूकता तथा सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग (डीओआरडी) और पेंशन कोष विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने मंगलवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘पेंशन सखियों’ के सामुदायिक स्तर पर संपर्क तंत्र को तैयार करने और उसे सहयोग देने की व्यवस्था की जाएगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बयान में कहा कि एमओयू पर डीओआरडी के संयुक्त सचिव अमित शुक्ला और पीएफआरडीए की कार्यकारी निदेशक सुमीत कौर कपूर ने हस्ताक्षर किए।
इस दौरान ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल भी मौजूद रहे। इसमें कहा गया कि इस साझेदारी का उद्देश्य दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत बनाए गए व्यापक नेटवर्क का लाभ उठाना है। इसमें ‘बैंकिंग प्रतिनिधि’ (बीसी) सखियां भी शामिल हैं।
इसके जरिये ग्रामीण परिवारों में पेंशन के प्रति जागरूकता, वित्तीय जागरूकता, पंजीकरण तथा उसके बाद सहायता को बढ़ावा दिया जाएगा। इस पहल के तहत महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के संस्थागत ढांचे की ताकत का इस्तेमाल किया जाएगा। पेंशन सखियां सामुदायिक स्तर पर सुविधाकर्ता के रूप में काम करेंगी और खास तौर पर एसएचजी सदस्यों, ग्रामीण महिलाओं, लखपति दीदियों तथा अन्य ग्रामीण लोगों तक पहुंच बनाएंगी।
वे परिवारों को पेंशन और सेवानिवृत्ति की योजना से जुड़ी जानकारी देंगी, पंजीकरण की प्रक्रिया में मदद करेंगी और पेंशन संबंधी सेवाओं को समझने में सहायता करेंगी। इस अवसर पर कंसल ने कहा कि एसएचजी आंदोलन से जुड़े ग्रामीण परिवारों में बचत के तौर-तरीके, आजीविका एवं जोखिम की स्थिति अलग-अलग होती है। उन्होंने कहा, ‘‘सामाजिक सुरक्षा केवल कमजोरियों से बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवारों को निरंतर आर्थिक प्रगति के लिए प्रयास करने का भरोसा और मजबूती देने के बारे में भी है।’’ ग्रामीण विकास सचिव ने इस बात के महत्व को रेखांकित किया कि ग्रामीण नागरिकों को पेंशन और वित्तीय जागरूकता के बारे में पारदर्शी जानकारी मिले, ताकि वे अपनी दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के बारे में सोच-समझकर निर्णय ले सकें।
मंत्रालय ने कहा कि यह सहयोग डिजिटल डैशबोर्ड और मोबाइल तथा वेब आधारित समाधान के जरिये संपर्क एवं पंजीकरण की निगरानी को भी मजबूत करेगा। इसमें विभाग की अपनी प्रणाली भी शामिल है। इससे संबंधित संस्थाएं प्रगति पर नजर रख सकेंगी और ‘कवरेज’ में मौजूद कमियों की पहचान कर सकेंगी।
सामुदायिक स्तर पर संपर्क अभियान को निगरानी और सेवाओं की उपलब्धता के लिए उपयुक्त डिजिटल प्रणालियों का सहयोग मिलेगा। मंत्रालय ने कहा, ‘‘यह पहल मिशन के सामुदायिक कार्यकर्ताओं की भूमिका में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है। अब वे बैंकिंग और आजीविका तक पहुंच सुगम बनाने के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों को दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा एवं मजबूती बनाने में भी मदद करेंगे।
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