बंगाल में निर्ममता की हार, तुष्टिकरण पर प्रहार और विकास की बयार

यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि देश की जनता आज भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व पर अटूट विश्वास रखती है। पिछले 12 वर्षों में केंद्र में भाजपा की सरकार ने जिस तरह से विकास और सुशासन का मॉडल प्रस्तुत किया है, उसका असर हर राज्य में दिख रहा है।
पश्चिम बंगाल के जनादेश ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि जनता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के निर्णायक, प्रभावी और परिणाम देने वाले नेतृत्व पर अडिग विश्वास रखती है। यह भरोसा किसी भावनात्मक लहर का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों से दिख रहे सुशासन, पारदर्शिता और निरंतर विकास की ठोस बुनियाद पर खड़ा है। यह केवल एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि बंगाल की जनता के भीतर वर्षों से पनप रहे आक्रोश, पीड़ा और बदलाव की आकांक्षा का सशक्त विस्फोट है। इस जनादेश में साफ दिखता है कि जनता ने भय की राजनीति को नकारते हुए भरोसे को अपनाया, तुष्टिकरण को ठुकराकर विकास को चुना और भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होकर सुशासन को प्राथमिकता दी। बंगाल में यह जीत वास्तव में जनता की जीत है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रहे टोलाबाजी, सिंडिकेट राज, भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा और खुले तुष्टिकरण के खिलाफ जनता लंबे समय से सड़कों पर थी। हर वर्ग, चाहे वह किसान हो, युवा हो, महिला हो या व्यापारी, सबने इस व्यवस्था के खिलाफ मन बना लिया था।
पिछले वर्षों में पश्चिम बंगाल में जिस तरह से हिन्दू समाज के साथ भेदभाव हुआ, वह किसी से छिपा नहीं है। तुष्टिकरण की राजनीति ने सामाजिक संतुलन को बिगाड़ा और अवैध घुसपैठ को प्रोत्साहन देकर राज्य की पहचान और सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े कर दिए गए। हालात ऐसे बन गए थे कि कई इलाकों में हिन्दू समाज को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया। चुनाव के समय उन्हें वोट डालने तक से रोका गया, डराया-धमकाया गया। यह लोकतंत्र का अपमान था, लेकिन इस बार जनता ने इन सबका जवाब दिया है। ममता बनर्जी की हताशा चुनाव से पहले ही दिखने लगी थी। एक भ्रष्ट निजी कंपनी को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाना, मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की उपस्थिति का विरोध करना, ये सभी कदम इस बात के संकेत थे कि उन्हें अपनी हार का अंदाजा हो चुका था। लेकिन लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है और जनता ने अपना फैसला स्पष्ट रूप से सुना दिया।
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यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि देश की जनता आज भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व पर अटूट विश्वास रखती है। पिछले 12 वर्षों में केंद्र में भाजपा की सरकार ने जिस तरह से विकास और सुशासन का मॉडल प्रस्तुत किया है, उसका असर हर राज्य में दिख रहा है। जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां न केवल विकास हुआ है बल्कि जनता ने बार-बार उस पर मुहर लगाई है। असम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार बनना और वह भी पहले से अधिक, लगभग तीन-चौथाई बहुमत के साथ, यह बताता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में राज्य सरकारों ने विकास के नए मानक स्थापित किए हैं। असम में बुनियादी ढांचे से लेकर कानून-व्यवस्था तक हर क्षेत्र में सुधार हुआ है, जिसका परिणाम जनता के विश्वास के रूप में सामने आया है।
इन विधानसभा चुनावों में विपक्ष पूरी तरह से बिखरा हुआ नजर आया। राहुल गांधी एक बार फिर इस चुनाव में असफल नेता के रूप में सामने आए हैं। वह न तो इंडी गठबंधन को एकजुट रख पाए और न ही जनता के बीच कोई विश्वसनीय विकल्प प्रस्तुत कर पाए। चुनाव परिणामों के समय उनका विदेश में होना यह दर्शाता है कि वह इस जिम्मेदारी को गंभीरता से लेने के लिए तैयार ही नहीं हैं। इंडी गठबंधन अब केवल नाम का गठबंधन रह गया है, जिसका भविष्य अंधकारमय दिखता है। तमिलनाडु में वर्षों से जो लोग सनातन संस्कृति का अपमान करते आए, जिन्होंने हिन्दू आस्थाओं को निशाना बनाया, दीपम जैसे धार्मिक आयोजनों में बाधाएं डालीं और धर्म-भाषा के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश की। जनता ने उन्हें भी करारा जवाब दिया है। सनातन संस्कृति की तुलना डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों से करने वाली मानसिकता को जनता ने नकार दिया है। यह बदलाव धीरे-धीरे ही सही, लेकिन स्थायी रूप से उभर रहा है। पुडुचेरी में भी भाजपा के प्रति जनता का विश्वास बढ़ा है। भले ही यह प्रतिशत में कम दिखे, लेकिन यह संकेत स्पष्ट है कि दक्षिण भारत में भी भाजपा अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी वैचारिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। केरल में भी भाजपा का आधार लगातार मजबूत हो रहा है। भले ही अभी वहां सत्ता तक पहुंचने में समय लगे, लेकिन जनता के बीच वैचारिक परिवर्तन साफ दिखाई दे रहा है। यह दर्शाता है कि देश का हर कोना अब विकास और राष्ट्रवाद की राजनीति की ओर बढ़ रहा है।
बंगाल की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे भाजपा के लाखों कार्यकर्ताओं का संघर्ष और बलिदान छिपा हुआ है। पिछले कई वर्षों में, खासकर पिछले विधानसभा चुनाव के बाद, भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिस तरह की हिंसा और उत्पीड़न का सामना किया, वह अभूतपूर्व था। हजारों कार्यकर्ताओं को बेघर होना पड़ा, कईयों के घरों में आग लगा दी गई, दुकानों को लूट लिया गया, महिलाओं के साथ अत्याचार हुए और कई कार्यकर्ताओं ने अपनी जान तक गंवाई। तृणमूल कांग्रेस के गुंडों द्वारा किए गए इन अत्याचारों के बावजूद भाजपा कार्यकर्ता डटे रहे। उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि और मजबूती से संघर्ष किया। यह संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि विचारधारा और लोकतंत्र की रक्षा का संघर्ष था। आज जब बंगाल में कमल खिला है, तो यह केवल एक पार्टी की जीत नहीं, बल्कि उन सभी कार्यकर्ताओं के बलिदान का परिणाम है, जिन्होंने अपने खून-पसीने से इस जमीन को सींचा। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरती पर यह जीत विशेष महत्व रखती है। यही वह भूमि है जहां से वैकल्पिक राजनीति और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव रखी गई थी। आज उसी धरती पर भाजपा का परचम लहराना, उस विचारधारा की जीत है जो राष्ट्र की एकता और अखंडता को सर्वोपरि मानती है।
यह जनादेश लोकतंत्र की जीत है, संविधान की जीत है और सबसे बढ़कर बंगाल की जनता की जीत है। यह संदेश साफ है, जो सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती, जो भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण में डूबी होती है, उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। और जो सरकार विकास, सुशासन और विश्वास के साथ आगे बढ़ती है, जनता उसे बार-बार अपना समर्थन देती है। यह केवल शुरुआत है। आने वाले समय में देश की राजनीति और अधिक स्पष्ट होगी, एक तरफ विकास और राष्ट्रवाद की राजनीति होगी और दूसरी तरफ अवसरवाद और तुष्टिकरण की। जनता ने अपना रास्ता चुन लिया है, और यह रास्ता परिवर्तन का है, प्रगति का है और एक मजबूत भारत के निर्माण का है।
- प्रेम शुक्ल
भारतीय जनता पार्टी
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