भ्रष्टों से सख्ती से निबट तो रहे हैं योगी, पर अधिकारी भी बचने की तरकीबें जानते हैं

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अजय कुमार । Oct 07, 2019 12:57PM
बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबी माने जाने वाले पूर्व नौकरशाह नेतराम पर जब आयकर विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया तो इसे मोदी−योगी सरकार की बदले की कार्रवाई समझा गया, लेकिन नेतराम की हकीकत कुछ और ही निकली।

केन्द्र की मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ आगे बढ़ रही है। सरकारी रूख के चलते कई दशकों से भ्रष्टचार की गंगा में डुबकी लगाने और प्रदेश को दीमक की तरह खोखला करने वाले उत्तर प्रदेश के नौकरशाह (ब्यूरोक्रेसी) लगातार जांच एजेंसियों के 'रडार' पर आते जा रहे हैं। कई ऐसे आईएएस अधिकारियों की भी पोल खुल रही है जो अरोबों रूपए की काली कमाई करने के बाद भी ईमानदारी का चोला ओढ़े घूम रहे थे। रिटायर्ड आईएएस नेतराम इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं।

  

बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबी माने जाने वाले पूर्व नौकरशाह नेतराम पर जब आयकर विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया तो इसे मोदी−योगी सरकार की बदले की कार्रवाई समझा गया, लेकिन नेतराम की हकीकत कुछ और ही निकली। आयकर विभाग ने नेतराम के ठिकानों पर छापे मारकर 230 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति जब्त की। नेतराम 2003−05 के दौरान उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री के सचिव थे। नेतराम उत्तर प्रदेश में आबकारी, गन्ना उद्योग विभाग, डाक एवं पंजीकरण, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों के प्रमुख रह चुके हैं। इससे पहले आयकर विभाग ने नेतराम के दिल्ली, कोलकाता, लखनऊ समेत 12 ठिकानों पर छापे मारे थे, जिसमें करोड़ों की प्रॉपर्टी होने का खुलासा हुआ था। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नेतराम के परिसरों पर आयकर विभाग के छापों में 1.64 करोड़ रुपये की नकदी, 50 लाख रुपये मूल्य के कीमती पेन, चार आलीशान कारें और 300 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किये गये।

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पूर्व नौकरशाह नेतराम पर आयकर विभाग का शक तब गहराया जब उसे नेतराम के उत्तर प्रदेश की एक पार्टी से लोकसभा चुनाव की टिकट पाने की बातचीत के बारे में अहम सुराग हाथ लगे थे। आयकर विभाग की जांच के दायरे में आए नेतराम के ठिकानों से 30 'मुखौटा कंपनियों' से संबंधित दस्तावेज भी बरामद हुए। इन कंपनियों में नेतराम के परिजनों और ससुराल के लोगों की हिस्सेदारी है। इससे पहले मारे गए छापों में आईएएस नेतराम के ठिकानों से 300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति, कोलकाता की शेल कंपनियों के जरिए लेनदेन के दस्तावेज सहित दिल्ली के ग्रेटर कैलाश, कस्तूरबा गांधी मार्ग सहित तीन जायदादों का खुलासा हुआ था। नेताराम के यहां से अब तक कुल 2 करोड़ रुपये से ज्यादा नकदी के अलावा दिल्ली, कोलकाता और लखनऊ में जायदादों का खुलासा हो चुका है। पूर्व नौकरशाह के लग्जरी घर में प्राइवेट थिएटर से लेकर जिम तक सब सुविधा है। नेतराम के पास से तीन कंपनियों और इलाहाबाद के एक आरटीओ के नाम पर कारें मिलीं।

बात नेतराम से आगे की कि जाए तो कड़वा सच यह है कि उत्तर प्रदेश में नौकरशाहों के भ्रष्टाचार का इतिहास काफी पुराना है। यूपी के दो आईएएस अधिकारियों पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव और प्रमुख सचिव (नियुक्ति) राजीव कुमार को तो सुप्रीम कोर्ट भ्रष्टाचार का दोषी मानते हुए दो साल की सजा भी सुना चुका है। इन दोनों को सजा मिलने के बाद भ्रष्ट आईएएस अफसरों ने कोई सबक नहीं लिया। यह अधिकारी एक तरफ भ्रष्टाचार की गंगा में गोते लगाकर खूब फले−फूले तो दूसरी तरफ सरकारी संरक्षण हासिल करके अपने आप को बचाते रहे, लेकिन यह सिलसिला अब थम गया है। केंद्र की मोदी सरकार की तर्ज पर सूबे की योगी सरकार ने भी भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के तमाम भ्रष्ट अफसरों का ब्यौरा सीएम कार्यालय मंगवा लिया गया है। ये वो अफसर हैं, जिनके खिलाफ बड़े−बड़े मामले होने के बाद भी शासन की तरफ से अभियोजन की स्वीकृति नहीं दी जा रही थी।

खैर, बात नीरा यादव और राजीव कुमार से आगे बढ़ाई जाए तो अखंड प्रताप सिंह का नाम सामने आता है। 1967 बैच के आईएएस और मुख्य सचिव रह चुके अखंड प्रताप सिंह यूपी के भ्रष्ट अधिकारियों की उस सूची में शामिल थे, जिसे आईएएस एसोसिएशन द्वारा ही जारी किया गया था। आय से अधिक सम्पत्ति मामले में अखंड प्रताप सिंह भी जेल की हवा भी खा चुके हैं। इनका नाम बीज घोटाले में भी आया था। 1981 बैच के आईएएस टॉपर प्रदीप शुक्ला एनआरएचएम घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक हैं। फिलहाल मामले की जांच सीबीआई के पास है। जेल जाने के बाद अभी वे जमानत पर बाहर हैं।

1984 बैच के आईएएस टॉपर ललित वर्मा का नाम आईएएस एसोसिएशन की लिस्ट में भ्रष्ट अधिकारियों में शामिल रहा था। ललित पर यूपीएससी की गोपनीय फाइल में उम्र में हेराफेरी का आरोप लगा था। सीबीआई ने मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। फिलहाल सरकार से अनुमति न मिलने की वजह से सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में मामले को चुनौती नहीं दी है। 2000 बैच की आईएएस अफसर के. धनलक्ष्मी के घर से सीबीआई ने करीब सवा तीन करोड़ रूपये की संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए थे। इनके ऊपर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है। आईएएस सदाकांत को लेह में सड़क निर्माण की गलत तरीके से मंजूरी देने के बाद केंद्र ने उन्हें रिलीव कर दिया था। देहरादून में इनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ है।

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1971 बैच के इस आईएएस बलजीत सिंह लाली पर प्रसार भारती का सीईओ रहते हुए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे। इस मामले में सीवीसी जांच भी हुई थी। संजीव सरन (आईएएस) पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे। नोएडा में तैनाती के दौरान इन्होंने किसानों की जमीन औने−पौने दाम पर बिल्डरों को बेच दी। सरन को हाईकोर्ट के आदेश के बाद हटा दिया गया था। सपा सरकार में ये महत्वपूर्ण पदों पर रहे। योगी सरकार में भी वह प्रमुख सचिव आईटी के पद पर तैनात हुए। धन कुबेर के नाम से मशहूर यादव सिंह इंजीनियर ने अपनी काली कमाई की वजह से मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरीं। यादव सिंह अब भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद है।

उत्तर प्रदेश में खनन घोटालों ने भी खूब नाम कमाया है। इसके चलते भी कई ब्यूरोक्रेट्स शिकंजे में हैं। छह जिलों के तत्कालीन डीएम खनन के अवैध पट्टे देने के आरोप में कार्रवाई की जद में हैं। हमीरपुर, फतेहपुर और देवरिया जिलों के तत्कालीन डीएम पर सीबीआई केस दर्ज कर चुकी है। इसी प्रकार 2013 में शामली, कौशांबी और सिद्धार्थनगर जिलों में डीएम रहे अधिकारी भी सीबीआई की रडार पर हैं। यूपी के अलग−अलग जिलों में छापेमारी के दौरान सीबीआई को अहम सुबूत मिले थे। खनन घोटाले में सीबीआई की छापेमारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी सक्रिय हो गया था। खनन घोटाले में सीबीआई के कदम बढ़ाने के बाद ईडी भी कार्रवाई कर सकती है। उक्त अधिकारियों के खिलाफ ईडी की लखनऊ यूनिट मनी लांन्ड्रिग का केस दर्ज कर सकती है। खनन घोटाले में फंसे आईएएस अफसर अभय सिंह और विवेक के अलावा सीनियर पीसीएस अधिकारी देवीशरण उपाध्याय भी मनी लांन्ड्रिग के केस में फंसते नजर आ रहे हैं।

कुछ माह पूर्व सीबीआई ने छापेमारी के दौरान बुलंदशहर के जिलाधिकारी रहे आईएएस अभय सिंह के आवास से 49 लाख रुपये बरामद किए थे। 10 लाख रुपये आजमगढ़ के मुख्य विकास अधिकारी रहे 2011 बैच के आईएएस देवीशरण उपाध्याय के पास से बरामद हुए थे। आईएएस अफसर विवेक के पास से भी अहम दस्तावेज बरामद हुए थे। खनन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय आईएएस अफसर बी. चंद्रकला के खिलाफ पहले ही मनी लांन्ड्रिग का केस दर्ज कर चुका है। खनन घोटाले में नामजद अभय सिंह पर हाल ही में मामा से मारपीट करने का आरोप लगा है।

सूत्र बताते हैं कि हमीरपुर, कौशांबी, शामली, फतेहपुर, देवरिया और सहारनपुर के बाद बांदा और चित्रकूट में हुए खनन घोटाले को लेकर जल्द सीबीआई का शिकंजा कसेगा। सीबीआई ने छह जिलों की एफआईआर दर्ज करने के बाद इन दोनों जिलों में हुए घोटाले को लेकर अपनी पड़ताल शुरू कर दी है। जरूरी साक्ष्य जुटाने के बाद सीबीआई इनमें केस दर्ज करेगी। 

गौरतलब है कि बसपा और सपा सरकार के दौरान वर्ष 2007 से 2012 के बीच चित्रकूट और बांदा में अवैध खनन होने की तमाम शिकायतें मिली थीं। जांच के दायरे में सत्तारूढ़ दलों के नेता थे, इसलिए किसी भी एजेंसी ने हाथ डालने की कोशिश नहीं की। अब सीबीआई एक−एक करके अवैध खनन प्रभावित सभी जिलों की जांच कर रही है। ऐसे में इन दोनों जिलों के तत्कालीन डीएम और नेताओं की गर्दन फंसना तय माना जा रहा है।

इसी क्रम में सहारनपुर खनन घोटाले में केस दर्ज करने के लिए ईडी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। ईडी हमीरपुर, कौशांबी, शामली, फतेहपुर और देवरिया के खनन घोटाले में केस दर्ज कर पहले से ही जांच कर रही है। वहीं ईडी बाबू सिंह कुशवाहा और मोहम्मद इकबाल के खिलाफ मनी लांन्ड्रिग के मामले की भी पड़ताल कर रही है, जबकि एनआरएचएम घोटाले में बाबू सिंह की कई संपत्तियों को अटैच कर चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि ईडी और सीबीआई को तीनों घोटालों की कड़ियां जोड़ने में दिक्कत नहीं आएगी।

खनन घोटाले में फंसे आईएएस अधिकारियों की लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती है। समाजवादी पार्टी की सरकार में विशेष सचिव (खनन) रहे संतोष राय अवैध खनन घोटाले में सीबीआई की एफआईआर में नामजद हैं। एसपी सरकार में प्रमुख सचिव रहे जीवेश नंदन फतेहपुर खनन घोटाले में सीबीआई की एफआईआर में नामजद हैं

    

सिक्के का यह पहलू यह भी है कि एक तरफ तो योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त नजर आ रही है, लेकिन कहीं−कहीं उसकी कार्यशैली पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है। पिछले साल तीन आईएएस अफसर हृदय शंकर तिवारी, सतेंद्र कुमार सिंह और विमल कुमार वर्मा के यहां आयकर के छापे पड़े और लाखों की नगदी बरामद हुई, लेकिन तीनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई। बुलंदशहर में गोकशी को लेकर हुई हिंसा के मामले में एसएसपी समेत तमाम पुलिस अफसरों पर कार्रवाई हुई, लेकिन डीएम अनुज झा को सरकार ने बख्श दिया।

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उत्तर प्रदेश में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए 600 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें 200 अधिकारी ऐसे हैं, जिन्हें पिछले दो साल में जबरन रिटायरमेंट दे दिया गया। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री एवं प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने हाल ही में कहा था, ''हमारी सरकार की भ्रष्ट और ढीले−ढाले अफसरों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है, पिछले दो साल के दौरान अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उन्हें वीआरएस दिया गया है और कई अधिकारियों को चेतावनी दी गई है और उनके प्रमोशन रोक दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने 200 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों को जबरन वीआरएस दिया है, जबकि 400 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों को दंड दिया गया है यानी अब उनका प्रमोशन नहीं होगा, साथ ही उनका तबादला किया गया है।

सूत्रों के अनुसार पिछले दो साल में 600 के लगभग अधिकारियों पर कार्रवाई की गयी है। इनमें 169 बिजली विभाग के अधिकारी हैं, 25 अधिकारी पंचायती राज, 26 बेसिक शिक्षा, 18 पीडब्ल्यूडी विभाग के और बाकी अन्य विभागों के हैं। करीब 200 अधिकारियों को वीआरएस दिया गया है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो इस कार्रवाई के अलावा 150 से ज्यादा अधिकारी अब भी सरकार के रडार पर हैं। इनमें ज्यादातर आईएएस और आईपीएस अफसर हैं। इन सभी पर फैसला केंद्र सरकार लेगी। इन अधिकारियों की सूची तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी गई है।

बता दें कि 20 जून को सचिवालय प्रशासन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेईमान और भ्रष्ट अधिकारियों को आड़े हाथ लिया था। उन्होंने कहा था कि बेईमान−भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सरकार में कोई जगह नहीं है। इन्हें तत्काल वीआरएस दे दीजिए। 1996 में आईएएस एसोसिएशन ने अपने बीच के तीन महाभ्रष्ट आईएएस अधिकारियों का खुलासा किया था, जिमसें से नीरा यादव और अखण्ड प्रताप सिंह जेल जा चुके हैं और ब्रजेन्द्र यादव दिवंगत हो चुके हैं।

-अजय कुमार

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