Smriti Mandhana का बड़ा खुलासा, World Cup के उस एक गलत शॉट ने मुझे सोने नहीं दिया था

Smriti Mandhana
प्रतिरूप फोटो
ANI
Ankit Jaiswal । Feb 2 2026 10:45PM

इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार के बाद गहरे मानसिक दबाव से जूझ रहीं स्मृति मंधाना ने न्यूजीलैंड के खिलाफ शानदार शतक लगाकर दमदार वापसी की। मंधाना ने बताया कि कैसे इंग्लैंड मैच की गलती के अफसोस और विश्व कप से बाहर होने के डर ने उन्हें करो या मरो मुकाबले में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।

आईसीसी महिला विश्व कप 2025 के दौरान भारतीय टीम लगातार तीन मैचों में हार ने टीम की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। इस खराब क्रम की तीसरी हार इंग्लैंड के खिलाफ आई, जहां भारत जीत की मजबूत स्थिति में होने के बावजूद मैच गंवा बैठा था। स्मृति मंधाना ने उस मुकाबले में 88 रनों की अहम पारी खेली थी, लेकिन निर्णायक मोड़ पर उनका आउट होना टीम के हार की वजह बना और इंग्लैंड ने चार रन से मुकाबला जीत लिया था।

गौरतलब है कि मंधाना ने आरसीबी पॉडकास्ट में इस पूरे दौर को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह विश्व कप में शानदार फॉर्म के साथ आई थीं, लेकिन शुरुआती तीन मैचों में चीजें उनके मुताबिक नहीं रहीं। एकदिवसीय क्रिकेट में शुरुआती ओवरों में विकेट न गंवाने को वह अपनी ताकत मानती हैं, लेकिन उस लय को वह हासिल नहीं कर पा रही थीं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका से हार के बाद मंधाना ने खुद से सवाल किए कि गलती कहां हो रही है। नेट्स में बल्लेबाजी अच्छी थी, लेकिन मैच में सही फैसले नहीं ले पा रही थीं। इसके बाद एक मैच में 80 रन जरूर बने, जिससे लय लौटती दिखी, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ हार उन्हें सबसे ज्यादा खली।

मंधाना ने बताया कि उस मैच में गलत शॉट खेलने का अफसोस पूरे सफर तक उनके साथ रहा। उड़ान के दौरान वह किसी से बात नहीं कर सकीं और मानसिक दबाव काफी बढ़ गया था। उन्हें यह डर सता रहा था कि घरेलू विश्व कप में सेमीफाइनल में जगह न बना पाना भारतीय महिला क्रिकेट को वर्षों पीछे धकेल सकता है।

इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबला भारतीय टीम के लिए करो या मरो जैसा था। उसी मैच में मंधाना ने 95 गेंदों पर 109 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने कहा कि मैच की अहमियत और चारों ओर के शोर के बावजूद यह पारी उनके लिए बेहद खास रही।

उन्होंने यह भी कहा कि महिला क्रिकेट को लेकर ट्रोलिंग नई बात नहीं है, लेकिन टीम के तौर पर सभी एक-दूसरे का साथ दे रहे थे। सेमीफाइनल में पहुंचने की जिद ही उन्हें अंदर से खाए जा रही थी और उसी जज्बे ने मैदान पर उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकलवाया हैं।

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