RCB Podcast में छलका Virat Kohli का दर्द, बोले- काबिलियत साबित करनी पड़े तो वो जगह मेरे लिए नहीं

विराट कोहली ने अपने भविष्य पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि वह अगले वनडे विश्व कप पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, लेकिन अगर किसी माहौल में उन्हें अपनी काबिलियत और अहमियत साबित करने पर मजबूर किया गया, तो वह उस जगह को छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि वह तब तक खेलेंगे जब तक टीम को उनकी जरूरत है और उन पर पूरा भरोसा है।
नयी दिल्ली, 15 मई विराट कोहली को अब भी क्रिकेट से इतना लगाव है कि वह अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही भारत के इस स्टार बल्लेबाज ने स्पष्ट किया कि अगर किसी विशेष ‘माहौल’ में उनकी योग्यता पर लगातार सवाल उठाए जाते हैं, तो उन्हें यह स्वीकार करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी कि वह ‘जगह’ उनके लिए नहीं बनी है।
इस 37 वर्षीय सुपरस्टार ने अपनी आईपीएल फ्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पॉडकास्ट पर कहा कि उन्हें अपने महत्व को लेकर किए जा रहे आकलन में लगातार बदलाव से नफरत है। कोहली ने कहा, ‘‘मैं हमेशा तैयार रहता हूं क्योंकि यही मेरी रोजमर्रा की जिंदगी है। मैं कसरत करता हूं, हम घर पर अच्छा खाना खाते हैं। मुझे इस तरह जीना पसंद है। यह केवल क्रिकेट खेलने तक सीमित नहीं है। मेरा कहने का मतलब है कि 2027 के विश्व कप को लेकर होने वाली बातें और बाकी सब। मुझे कई बार पूछा गया है कि क्या आप 2027 में खेलना चाहते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे इसका जवाब पता है और अगर मैं खेल रहा हूं तो फिर मैं क्रिकेट खेलना चाहता हूं। मैं खेलना जारी रखना चाहता हूं। भारत के लिए विश्व कप खेलना शानदार है।’’ कोहली ने कहा, ‘‘मेरा नजरिया बिल्कुल स्पष्ट है। मैं जिस माहौल का हिस्सा हूं उसमें कुछ योगदान दे सकता हूं और टीम को भी लगता है कि मैं योगदान दे सकता हूं, तो मैं खेलता रहूंगा। अगर मुझे अपनी काबिलियत और अहमियत साबित करने की जरूरत महसूस कराई जाती है तो मैं उस माहौल में नहीं रह सकता।’’
कोहली 2024 में टी20 अंतरराष्ट्रीय और 2025 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अब केवल वनडे में खेलते हैं। पिछले कुछ वर्षों से बहुत कम वनडे मैच खेले जा रहे हैं जिससे कोहली कम अवसरों पर ही भारत का प्रतिनिधित्व कर पा रहे हैं। भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने कोहली और एक अन्य स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा के टीम का हिस्सा बनने की उनकी इच्छा के बावजूद उनके भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है। कोहली ने कहा कि जब तक टीम को उनकी जरूरत होगी, वह टीम के साथ बने रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपनी तैयारियों के प्रति ईमानदार हूं, मैं खेल के प्रति अपने दृष्टिकोण के प्रति ईमानदार हूं। मैं पूरी लगन से मेहनत करता हूं। जब मैं खेलने के लिए जाता हूं तो मैं दूसरों से कम नहीं बल्कि उनसे भी ज्यादा मेहनत करता हूं और सही तरीके से खेलता हूं।’’
कोहली ने खेल के प्रति अपने दृष्टिकोण के बारे में कहा कि वह हमेशा कड़ी मेहनत के लिए तैयार रहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसी तरह से तैयारी करता हूं। मैं 50 ओवर तक फील्डिंग करने के लिए तैयार हूं। इस तरह से खेलने के बाद भी अगर मुझे अपनी काबिलियत और अहमियत साबित करनी पड़े, तो वह जगह मेरे लिए नहीं है।’’ कोहली ने 2025-26 सत्र के दौरान दो दशकों के बाद विजय हजारे ट्रॉफी में खेलने का उदाहरण दिया। उन्होंने दिल्ली के लिए दो मैच खेले और उनमें से एक में शतक लगाने के साथ-साथ लिस्ट ए में सबसे कम पारियों में 16,000 रन बनाने वाले खिलाड़ी भी बने। उन्होंने कहा, ‘‘मैं तब स्पष्ट सोच के साथ वहां गया था कि मुझे वहां किसी को कुछ साबित नहीं करना है। मैं वहां खेलने गया क्योंकि मुझे खेल खेलना पसंद है।’’
कोहली ने कहा, ‘‘मैं इसलिए खेलना चाहता हूं क्योंकि मुझे खेल से प्यार है। मुझे बल्लेबाजी करने में बहुत मजा आने लगा। मुझे फिर से एक बच्चे जैसा महसूस हुआ। मुझे लगा कि यह किसी और को लेकर नहीं बल्कि यह केवल मेरे और खेल के बारे में है।’’ सर्वकालिक महान वनडे बल्लेबाजों में गिने जाने वाले कोहली ने इस प्रारूप में 311 मैचों में 58.71 के औसत से 14,797 रन बनाए हैं। उन्होंने अपने वनडे करियर में 54 शतक और 77 अर्धशतक जड़े हैं और दबाव में शानदार प्रदर्शन करने की क्षमता के कारण उन्हें ‘चेज मास्टर’ (लक्ष्य का पीछा करने में माहिर) का उपनाम मिला है। कोहली ने कहा कि उन्हें खेलने में आनंद आता है, लेकिन ऐसे माहौल में नहीं जहां चयन के बाद सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जिस क्षण मुझे लगता है कि लोग मेरे लिए मामले को जटिल बनाने की कोशिश कर रहे हैं तथा ‘यह और वह’ जैसी बातें कर रहे हैं, तो या तो वे स्पष्ट, ईमानदार और खुलकर बात करें या चुप रहें और मुझे अपना काम करने दें।’’
कोहली ने कहा, ‘‘अगर पहले लोग यह कहते हैं कि हमें आपकी क्षमता पर विश्वास है और एक सप्ताह बाद वह सवाल उठाने लगते हैं तो वह मुझे पहले दिन ही बता दे कि मैं अच्छा नहीं कर रहा हूं और मेरी जरूरत नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अगर आप कहते हैं कि मैं अच्छा हूं और आप इसके अलावा कुछ नहीं सोच रहे हैं तो चुप रहें। अगर आप परिणाम के आधार पर अपनी सोच बदलते हैं तो फिर आपके रवैये में कभी निरंतरता नहीं रहेगी।
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