पूर्वोत्तर राज्यों में शुरू हुआ हाथी का मांस खाने का नया चलन

By दिनकर कुमार | Publish Date: Jul 29 2019 1:19PM
पूर्वोत्तर राज्यों में शुरू हुआ हाथी का मांस खाने का नया चलन
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मिजोरम के क्वास्था डिवीजन के कनमुन फॉरेस्ट रेंज में लक्ष्मी नामक पालतू हथिनी को असम से लाया गया था। कुछ हफ्ते पहले 47 वर्षीया हथिनी की मौत हो गई। जिसके तुरंत बाद ग्रामीणों ने हथिनी के शरीर को काट कर उसके मांस का सेवन किया।

वैसे तो नगालैंड और मिजोरम में पहले से सांप और कुत्ते जैसे जीवों का मांस खाने का चलन रहा है, लेकिन पहली बार हाथी का मांस खाने की खबर आने से वन्य जीव अधिकार के लिए लड़ रहे कार्यकर्ता चिंतित हो उठे हैं। इन राज्यों के प्रचलित खाद्याभ्यास में हाथी का मांस खाना शामिल नहीं रहा है। पहले मिजोरम से हाथी का मांस खाने की खबर आई और उसके बाद नागालैंड में हाथी के मांस का सेवन करने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई।
 
मिजोरम के क्वास्था डिवीजन के कनमुन फॉरेस्ट रेंज में लक्ष्मी नामक पालतू हथिनी को असम से लाया गया था। कुछ हफ्ते पहले 47 वर्षीया हथिनी की मौत हो गई। जिसके तुरंत बाद ग्रामीणों ने हथिनी के शरीर को काट कर उसके मांस का सेवन किया। जिस समय हथिनी के शव को काटा जा रहा था, उस समय ग्रामीणों को रोकने के लिए मिजोरम वन विभाग का कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। इस वीभत्स दृश्य को लाखों लोगों ने इंटरनेट पर देखा।
हथिनी के मालिक असम के कछार जिले के सोनाई के निवासी मोहम्मद मुस्तफा अहमद लस्कर ने हथिनी को किराये पर मिजोरम के कनमुन के पु खुलहीना को दिया था। पु खुलहीना नामक महिला एक लकड़ी व्यापारी है और जंगल से लकड़ियां लादने के लिए वह हथिनी का इस्तेमाल कर रहा थी। इस हथिनी के स्वामित्व का प्रमाणपत्र सिलचर के वन संरक्षक कार्यालय से 1 सितंबर 2009 को जारी किया गया था। स्वामित्व प्रमाणपत्र की अवधि अगस्त 2014 में समाप्त हो गई थी।
 
मिजोरम के स्थानीय लोगों का कहना है कि हथिनी से जरूरत से अधिक मेहनत करवाई गई, जिसके चलते हृदयाघात से उसकी मौत हो गई। असम के वन अधिकारियों का कहना है कि लक्ष्मी को असम से मिजोरम ले जाने के लिए कोई विभागीय अनुमति नहीं ली गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जब किसी हाथी को एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजा जाता है तो सबसे पहले दोनों राज्यों के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डेन की अनुमति जरूरी होती है।


 
मिजोरम के बाद नगालैंड के जुनहेबोटो जिले में हाथी का मांस खाने की घटना सामने आई। इस जिले के लिटामी गांव के पास जंगल में गोली मार कर एक हाथी की हत्या की गई। फिर ग्रामीणों ने हाथी के शव को काट कर उसके मांस का सेवन किया। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हाथी पालतू था या जंगली था। न ही हत्यारे की शिनाख्त हो पाई है।
 
बैंगलूर की वन्यजीव कार्यकर्ता सुपर्णा गांगुली ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के प्रोजेक्ट एलीफेंट डिवीजन को पत्र लिखकर मिजोरम और नगालैंड में हाथी का मांस खाये जाने की घटना का संज्ञान लेकर ठोस कदम उठाने की मांग की है। वन्यजीव बचाव एवं पुनर्वास केंद्र की सह संस्थापक ट्रस्टी गांगुली ने प्रोजेक्ट एलीफेंट डिवीजन के प्रमुख नोवल थॉमस से अनुरोध किया है कि वे हाथियों की सुरक्षा के लिए तुरंत कारगर कदम उठाएं।


असम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष एवं राज्यसभा के सदस्य रिपुन बोरा ने हाथी का मांस खाये जाने की घटनाओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है— इस तरह की क्रूरता के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाना चाहिए। इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की पुनरावृति नहीं होनी चाहिए। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जो कानून हैं, उनका कड़ाई से पालन होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए जा चुके हैं। यह तो बर्बरता की चरम सीमा कही जाएगी कि पहले हाथी की हत्या की गई और फिर उसको काट कर सभी लोगों ने उसके मांस को खाया।
 
असम के निर्दलीय सांसद नब सरनिया ने कहा— इस तरह की घटनाओं से पता चलता है कि पूर्वोत्तर के लोगों में जागरूकता की कितनी कमी है। ऐसी कुछ जनजातियां हैं जो वन्यजीवों को मारकर खाती रही हैं। उनको जागरूक करने की जरूरत है और इस तरह की क्रूर घटनाओं पर रोक लगाने की जरूरत है।
 
मिजोरम वन विभाग के प्रवक्ता ने बताया है कि चीफ फॉरेस्ट वार्डेन ने संबंधित डीएफओ को जांच करने का आदेश दिया है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि हथिनी की मौत होने के बाद उसे दफनाया क्यों नहीं गया और किसकी गफलत की वजह से ग्रामीणों ने हथिनी के शव को अपने कब्जे में लेकर उसके मांस को काटा। यह भी पता लगाया जाएगा कि अवैध तरीके से असम से मिजोरम लाई गई हथिनी को वन विभाग की तरफ से 7 जून 2019 को लकड़ी लादने के काम में इस्तेमाल करने के लिए प्रमाणपत्र कैसे जारी किया गया। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कारवाई की जाएगी।
 
दूसरी तरफ नागालैंड के वन विभाग ने कहा है कि उसे सोशल मीडिया से ही इस मामले की जानकारी मिली है और वह मामले की पूरी जांच करवाने के बाद ही किसी नतीजे तक पहुंच सकता है। अभी तक वन विभाग को मारे गए हाथी के बारे में कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह भी पता नहीं चल पाया है कि मारा गया हाथी पालतू था या जंगली।
 
असम के वन विभाग ने हथिनी के मालिक को कानूनी नोटिस जारी किया है। ज़्यादातर हाथी असम से ही मिजोरम और नागालैंड में लकड़ी लादने के काम के लिए भेजे जाते रहे हैं और ऐसा करते समय उनके मालिक प्रचलित नियमों का धड़ल्ले से उल्लंघन करते रहे हैं। अब असम का वन विभाग ऐसे तमाम हाथी मालिकों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
 
-दिनकर कुमार
 

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