Vishwakhabram: Dragon की सेना में आई दरार, अपने ही जनरल बन रहे खतरा, अपनी सत्ता बचाने की जंग लड़ रहे Xi Jinping

Xi Jinping
ANI

हम आपको बता दें कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान के नाम पर चल रही कार्रवाई ने सेना के सबसे ऊंचे हलकों को झकझोर दिया है। केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य एक एक कर हटाए जा रहे हैं या जांच के घेरे में आ रहे हैं।

मार्च 2023 में जब चीन की सेना का शीर्ष नेतृत्व राष्ट्र के सामने एकजुट खड़ा दिखाया गया, तब संदेश साफ था कि शी जिनपिंग ने लगभग एक दशक की सत्ता के बाद अपनी पसंद का सैन्य ढांचा खड़ा कर लिया है। अपने भरोसे के अधिकारियों को ऊपर बैठाकर उन्होंने जन मुक्ति सेना को विश्व स्तर की शक्ति बनाने का लक्ष्य रखा था। पर अब वही ढांचा भीतर से हिलता दिख रहा है।

हम आपको बता दें कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान के नाम पर चल रही कार्रवाई ने सेना के सबसे ऊंचे हलकों को झकझोर दिया है। केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य एक एक कर हटाए जा रहे हैं या जांच के घेरे में आ रहे हैं। ताजा और सबसे चौंकाने वाला मामला शी जिनपिंग के करीबी माने जाने वाले शीर्ष सेनापति झांग योउश्या का है। उनके साथ एक और प्रमुख कमान संभालने वाले अधिकारी लियू झेनली भी पद से हटाए गए हैं।

साल 2023 की शुरुआत में चीन के पास कम से कम तीस ऐसे जनरल और एडमिरल स्तर के अधिकारी थे जो विशेष विभागों और क्षेत्रीय कमानों का संचालन कर रहे थे। अब इनमें से लगभग सभी या तो बाहर कर दिए गए हैं या सार्वजनिक जीवन से गायब हैं। उनकी जगह लगाए गए कई नए अधिकारी भी ज्यादा समय तक नहीं टिके। सक्रिय भूमिका में बचे अधिकारियों की संख्या बेहद कम बताई जा रही है।

शी जिनपिंग की इस कार्रवाई से सेना में नेतृत्व का खालीपन पैदा हुआ है। झांग योउश्या और लियू झेनली जैसे अधिकारी युद्ध की तैयारी और संचालन की योजना में अहम माने जाते थे। उनके अचानक हटने से जन मुक्ति सेना की तैयारी और भरोसे पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

केंद्रीय सैन्य आयोग में अब जो प्रमुख चेहरा बचा है वह झांग शेंगमिन हैं, जिनकी पहचान राजनीतिक अनुशासन और भ्रष्टाचार विरोधी जांच से जुड़ी रही है। उन्होंने प्रक्षेपास्त्र बल में लंबा समय अनुशासन अधिकारी के रूप में बिताया। यही बल चीन के परमाणु और पारंपरिक प्रक्षेपास्त्र कार्यक्रम संभालता है। पिछले वर्ष उन्हें आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया था।

हम आपको यह भी बता दें कि कार्रवाई केवल थल सेना तक सीमित नहीं रही है। नौसेना, प्रक्षेपास्त्र बल और लगभग सभी शाखाओं में यह कार्रवाई चली है। साथ ही पांचों क्षेत्रीय कमान, जिन्हें 2016 में नई संरचना के तहत बनाया गया था, भी इससे अछूती नहीं रहीं। पूर्वी क्षेत्रीय कमान, जो ताइवान के आसपास की गतिविधियों के लिए जिम्मेदार है, वहां भी बड़े स्तर पर बदलाव हुए हैं और हाल में नया कमांडर लगाया गया है।

इस बीच, सैन्य अखबार ने अधिकारियों और जवानों से अपील की है कि वे फैसलों का समर्थन करें और शी जिनपिंग के साथ खड़े रहें। साथ ही यह भी माना गया कि इन कदमों से अल्प अवधि की कठिनाई और पीड़ा हो रही है मगर दावा किया गया है कि अंत में सेना और मजबूत बनकर उभरेगी।

इसे भी पढ़ें: Pakistan की क्रूरता का होगा पर्दाफाश! बलूच नेता ने International Community को 'ग्राउंड जीरो' पर बुलाया

इसी बीच रक्षा क्षेत्र से जुड़े तीन सांसदों को भी उनके पद से हटा दिया गया है। ये लोग रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष उड़ान और परमाणु उद्योग से जुड़े थे। इनमें एक बड़ी सरकारी विमान निर्माण कंपनी के पूर्व प्रमुख, एक लंबे समय से परमाणु हथियार अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक और एक सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी के मुख्य अभियंता शामिल हैं। कारण सार्वजनिक नहीं किए गए, पर यह कदम संसद के वार्षिक अधिवेशन से ठीक पहले उठाया गया।

चीन ने 2035 तक पूर्ण सैन्य आधुनिकीकरण का लक्ष्य रखा है। पर सेना के भीतर भ्रष्टाचार को इस राह में बाधा माना जा रहा है। कुछ हटाए गए अधिकारियों के नाम उनकी संस्थाओं की सूची से भी गायब कर दिए गए हैं। साथ ही कई रक्षा कंपनियों में भ्रष्टाचार विरोधी बैठकें तेज कर दी गई हैं।

वहीं सबसे गंभीर आरोप यह है कि शीर्ष सेनापति झांग योउश्या पर परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी अमेरिका तक पहुंचाने और रिश्वत लेकर पदोन्नति कराने के आरोप लगे हैं। हालांकि आधिकारिक बयान में उन पर केवल अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन की बात कही गई, पर अंदरूनी ब्रीफिंग में जासूसी और रिश्वत के आरोप चर्चा में रहे। इन घटनाओं के बीच शी जिनपिंग 2027 से आगे भी पार्टी प्रमुख के रूप में बने रहने की राह देख रहे हैं और माना जा रहा है कि उन्हें चौथा कार्यकाल मिल जाएगा। पर उससे पहले उन्हें नए भरोसेमंद सैन्य चेहरे खोजने होंगे।

देखा जाये तो जो कुछ चीन की सेना में चल रहा है वह केवल भ्रष्टाचार विरोधी अभियान नहीं, बल्कि सत्ता की लोहे की मुट्ठी कसने की कहानी है। शी जिनपिंग ने पहले अपने वफादारों को ऊपर बिठाया, अब वही वफादार भी शक के घेरे में हैं। संदेश साफ है: वफादारी स्थायी नहीं, केवल शी के प्रति पूर्ण समर्पण ही सुरक्षा कवच है।

इसका सामरिक असर भी गहरा है। सेना किसी भी देश की ताकत का आधार होती है। जब शीर्ष कमान बार बार बदले, जब अधिकारियों को हर समय डर रहे कि अगली बारी उनकी है, तब साहसी और स्पष्ट निर्णय लेना कठिन हो जाता है। युद्ध की तैयारी भरोसे, निरंतरता और स्पष्ट आदेश श्रृंखला पर टिकती है। वहां यदि भय और संदेह घर कर जाए तो कागज पर मजबूत दिखने वाली सेना मैदान में डगमगा सकती है।

परमाणु और प्रक्षेपास्त्र बल में उठापटक खास चिंता की बात है। यह वही क्षेत्र है जो प्रतिरोध की अंतिम दीवार माना जाता है। यदि यहां राजनीतिक निष्ठा को पेशेवर दक्षता पर तरजीह दी गई तो गलत आकलन का खतरा बढेगा। दुनिया के लिए यह अस्थिरता का संकेत है।

ताइवान के संदर्भ में भी यह बदलाव मायने रखते हैं। एक तरफ चीन दबाव बनाए रखना चाहता है, दूसरी तरफ उसकी कमान संरचना भीतर से हिल रही है। यह स्थिति या तो उसे जल्दबाजी में कदम उठाने को उकसा सकती है ताकि अंदरूनी कमजोरी छिपे, या फिर उसे कुछ समय के लिए सतर्क बना सकती है। दोनों ही हालात क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित करते हैं।

साथ ही शी जिनपिंग के इरादे समझना कठिन नहीं। वह सेना को केवल राष्ट्रीय रक्षा का साधन नहीं, बल्कि अपनी सत्ता की ढाल और तलवार दोनों बनाना चाहते हैं। उन्हें ऐसी सेना चाहिए जो पहले पार्टी के प्रति, फिर देश के प्रति जवाबदेह हो, और अंत में पेशेवर मानकों की बात करे। वह 2035 का लक्ष्य और 2027 के बाद की अपनी कुर्सी, दोनों सुरक्षित करना चाहते हैं।

पर इतिहास बताता है कि डर पर खड़ी व्यवस्था भले बाहर से कठोर दिखे, पर भीतर से वह खोखली हो सकती है। लगातार सफाई अभियान से कुछ समय के लिए नियंत्रण बढ़ता है, पर साथ ही पहल करने की भावना मरती है। हर अधिकारी जोखिम लेने से बचेगा, हर निर्णय ऊपर की ओर धकेला जाएगा। युद्ध और कूटनीति दोनों में यह कमजोरी बन सकती है। इसलिए चीन की यह अंदरूनी उथलपुथल केवल उसका घरेलू मामला नहीं। यह एशिया की सुरक्षा, वैश्विक शक्ति संतुलन और परमाणु स्थिरता से जुड़ा सवाल है। शी जिनपिंग अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, पर जितनी कसकर मुट्ठी बंद होगी, उतना ही खतरा है कि रेत फिसल भी सकती है।

-नीरज कुमार दुबे

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
All the updates here:

अन्य न्यूज़