PM कुसुम योजना के तहत सोलर पंप पर पाएं 60% तक की भारी सब्सिडी

PM KUSUM Yojana
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PM कुसुम योजना, या प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान, भारत सरकार की एक स्कीम है जिसे मार्च 2019 में खेती में सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था। यह सोलर पंप और पावर प्लांट के लिए फाइनेंशियल मदद देकर किसानों की मदद करती है, जिससे डीज़ल और ग्रिड बिजली पर उनकी निर्भरता कम होती है और इनकम बढ़ती है।

भारत एक कृषि देश है और यहाँ के किसानों के लिए सिंचाई हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। डीजल की बढ़ती कीमतें और बिजली की अनिश्चित आपूर्ति खेती की लागत को बढ़ा देती है। इसी समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आय में वृद्धि करना है।

PM कुसुम योजना क्या है?

PM कुसुम योजना, या प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान, भारत सरकार की एक स्कीम है जिसे मार्च 2019 में खेती में सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था। यह सोलर पंप और पावर प्लांट के लिए फाइनेंशियल मदद देकर किसानों की मदद करती है, जिससे डीज़ल और ग्रिड बिजली पर उनकी निर्भरता कम होती है और इनकम बढ़ती है।

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यह नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा संचालित एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत किसानों को अपने खेतों में सौर ऊर्जा संचालित पंप (Solar Pumps) लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। योजना को मुख्य रूप से तीन घटकों (Components) में बांटा गया है:

- घटक A: बंजर भूमि पर छोटे सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना।

- घटक B: स्टैंडअलोन सोलर पंपों की स्थापना (जहाँ बिजली ग्रिड नहीं है)।

- घटक C: मौजूदा ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौरकरण (Solarization)।

PM-KUSUM के मुख्य उद्देश्य

यह योजना किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई लागत कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। डीजल पंपों को सौर पंपों से बदलकर प्रदूषण घटाती है और अतिरिक्त बिजली बेचने का मौका देती है। प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:

- खेती का डी-डीज़लाइज़ेशन: PM-KUSUM का एक मुख्य लक्ष्य सोलर पावर वाले पंपों को बढ़ावा देकर सिंचाई के लिए डीज़ल पर निर्भरता कम करना है। यह बदलाव न केवल किसानों के लिए फ्यूल की लागत कम करता है, बल्कि कार्बन एमिशन को कम करके एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी में भी योगदान देता है।

- किसानों के लिए एनर्जी सिक्योरिटी: इस स्कीम का मकसद किसानों को भरोसेमंद और सस्ती एनर्जी देना है, जिससे यह पक्का हो सके कि उन्हें सिंचाई और खेती के दूसरे कामों के लिए बिजली मिले। यह ग्रामीण इलाकों में खास तौर पर ज़रूरी है जहाँ बिजली की सप्लाई में उतार-चढ़ाव हो सकता है।

- किसानों की इनकम बढ़ाना: किसानों को सोलर पावर से अपनी बिजली बनाने में मदद करक यह स्कीम उन्हें ज़्यादा एनर्जी वापस ग्रिड को बेचने की इजाज़त देती है, जिससे इनकम का एक और सोर्स बनता है। इससे उनकी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी काफी बढ़ सकती है।

- रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देना: PM-KUSUM, पूरे एनर्जी मिक्स में रिन्यूएबल एनर्जी का हिस्सा बढ़ाने के भारत के कमिटमेंट से मेल खाता है। यह स्कीम डीसेंट्रलाइज़्ड सोलर पावर प्लांट लगाने में मदद करती है, जिससे 2030 तक नॉन-फॉसिल फ्यूल सोर्स से 40% इंस्टॉल्ड कैपेसिटी पाने के नेशनल गोल में मदद मिलती है।

- सस्टेनेबल खेती के लिए मदद: यह पहल इको-फ्रेंडली सिंचाई सिस्टम के इस्तेमाल को बढ़ावा देती है, जिससे खेती के सस्टेनेबल तरीकों को बढ़ावा मिलता है। सोलर पंप देकर यह स्कीम पानी बचाने और खेती के पुराने तरीकों से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को कम करने में मदद करती है।

सब्सिडी का गणित: कितना होगा लाभ?

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इस पर मिलने वाली भारी सब्सिडी है, जो किसानों के वित्तीय बोझ को कम करती है:

- केंद्र सरकार की हिस्सेदारी: केंद्र सरकार कुल लागत का 30% हिस्सा सब्सिडी के रूप में देती है।

- राज्य सरकार की हिस्सेदारी: संबंधित राज्य सरकार भी 30% तक का अनुदान प्रदान करती है।

- किसानों का योगदान: किसान को कुल लागत का केवल 10% से 40% (राज्यवार भिन्नता के आधार पर) भुगतान करना होता है।

- ऋण सुविधा: शेष राशि के लिए बैंक से आसान किश्तों पर ऋण लेने की सुविधा भी उपलब्ध है।

- विशेष राज्यों के लिए: उत्तर-पूर्वी राज्यों, पहाड़ी क्षेत्रों और केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्र की सब्सिडी 50% तक हो सकती है।

योजना के मुख्य लाभ

- मुफ्त सिंचाई: एक बार सोलर पंप लगने के बाद बिजली बिल या डीजल के खर्च से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है।

- अतिरिक्त आय का स्रोत: यदि किसान अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा करता है तो वह उसे सरकार (डिस्कॉम) को बेचकर अतिरिक्त कमाई भी कर सकता है।

- दिन में सिंचाई: सोलर पंप सूर्य की रोशनी से चलते हैं, जिससे किसानों को रात के समय खेतों में पानी देने की समस्या से छुटकारा मिलता है।

- पर्यावरण संरक्षण: यह स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज और पात्रता

इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसान के पास निम्नलिखित दस्तावेज होने अनिवार्य हैं:

- आधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्र।

- भूमि के दस्तावेज (जमाबंदी या खसरा-खतौनी की नकल)।

- बैंक खाता विवरण (पासबुक की प्रति)।

- मोबाइल नंबर (जो आधार से लिंक हो)।

- आवेदक के पास सिंचाई के लिए जल का स्रोत होना आवश्यक है।

आवेदन कैसे करें?

पीएम कुसुम योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया मुख्य रूप से ऑनलाइन है। किसान अपने राज्य के ऊर्जा विभाग (Renewable Energy Department) या आधिकारिक PM-KUSUM पोर्टल पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं।

कई फर्जी वेबसाइटें इस योजना के नाम पर पंजीकरण शुल्क मांगती हैं। कृपया केवल सरकारी वेबसाइटों (जैसे www.mnre.gov.in) का ही उपयोग करें और किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को पैसे न दें।

- जे. पी. शुक्ला

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