सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम क्या है? इसमें निवेश के नियम क्या हैं? इसमें निवेश क्यों लाभदायक है?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम के तहत सस्ता सोना खरीदने का मतलब यह है कि ग्राहक अपने बजट के लिहाज से न्यूनतम एक ग्राम सोना भी खरीद सकते हैं, जबकि एक व्यक्ति अधिकतम 4 किलो तक सोना खरीद सकते हैं।
यदि आप सस्ता सोना खरीदने के इच्छुक हैं तो आरबीआई ऐसे ही लोगों के लिए ही एक विशेष प्रकार की स्कीम लेकर आई है, जिसके माध्यम से आप डिस्काउंट के साथ सस्ते दर के गोल्ड में निवेश कर सकते हैं। इस स्कीम का नाम सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना है। यह एक ऐसी निवेश योजना है, जिसके जरिये सरकार एक वित्तीय वर्ष में चार-चार बार सस्ते में सोना खरीदने यानी इसमें निवेश करने का मौका आपको देती है। बता दें कि आरबीआई सरकार की तरफ से ये बॉन्ड जारी करता है।
इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं कि इस योजना के नियम क्या हैं? इसमें निवेश क्यों करना चाहिए? इसमें किया हुआ निवेश कितना लाभदायक है?
गौरतलब है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना सोने में निवेश की एक सरकारी स्कीम है, जिसे आरबीआई की ओर से जारी किया जाता है। इसमें फिजिकल रूप से सोने की खरीद करने के बजाय डिजिटल गोल्ड खरीदने की सुविधा होती है। सरकार ने इस योजना की शुरुआत 2015 में की थी। इसके तहत हरेक फाइनेंशियल ईयर में 4 बार सब्सक्रिप्शन का चांस मिलता है। इस बार सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की तीसरी सीरीज खुली है, जो कि गत 19 दिसंबर को खुल चुकी है और आगामी से 23 दिसंबर तक खुली रहेगी। इसके तहत आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से सोना खरीद सकते हैं। इसके निपटान की तारीख 27 दिसंबर, 2022 होगी।
बात यह है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम के तहत सस्ता सोना खरीदने का मतलब यह है कि ग्राहक अपने बजट के लिहाज से न्यूनतम एक ग्राम सोना भी खरीद सकते हैं, जबकि एक व्यक्ति अधिकतम 4 किलो तक सोना खरीद सकते हैं। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम के तहत खरीदे हुए गोल्ड बॉन्ड पर आकर्षक रिटर्न मिलता है। इसमें निवेश की गई रकम पर ब्याज मिलता है। यहां 8 साल में 20 प्रतिशत का ब्याज मिलेगा। वहीं निकासी पर गोल्ड के बाजार भाव के आधार पर पेमेंट होगा। यहां पर ब्याज के अलावा सोने में तेजी का भी फायदा आपको मिलेगा।
इसे भी पढ़ें: हर महीने की एक तारीख को चाहिए पेंशन तो एमपी के सीनियर सिटीजन यहां करें अप्लाई
# जानिए, कहां-कहां से खरीद सकते हैं सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2022-23 को कॉमर्शियल बैंकों, जैसे- स्माल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और रिजनल ग्रामीण बैंक, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसएचसीआईएल), क्लियर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआईएल), कुछ डाकघर और स्टॉक एक्सचेंज- एनएसई और बीएसई से खरीद सकते हैं। भारत सरकार की ओर से केंद्रीय बैंक इस स्कीम के तहत डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन तरीके से सोना खरीदने वाले लोगों को 50 रुपये प्रति ग्राम पर छूट भी दे रही है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, ऐसे निवेशकों को 5,359 रुपये प्रति ग्राम पर देना होगा।
# सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम में इनवेस्टमेंट क्यों है फायदे का सौदा?
पहला, सालाना 2.5% का ब्याज मिलता है। दूसरा, छमाही आधार पर ब्याज का पेमेंट होता है। तीसरा, यह जीएसटी के दायरे में नहीं आता है, जबकि फिजिकल गोल्ड पर 3 प्रतिशत जीएसटी लगता है। चतुर्थ, गोल्ड बॉन्ड में ट्रांसफर का भी ऑप्शन है। पांचवां, इस बॉन्ड के बदले लोन लेने की भी सुविधा मिलती है। छठा, मैच्योरिटी के बाद कोई टैक्स नहीं लगता है। सातवां, बॉन्ड में 8 साल का लॉक इन पीरियड है, जबकि 5 साल के बाद निकलने का भी ऑप्शन मौजूद है।
इसे भी पढ़ें: प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) क्या है? इससे किसको फायदा होगा?
# ये हैं सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स पर टैक्स के अलग-अलग नियम
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स पर टैक्स के अलग-अलग नियम हैं। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स से होने वाला लाभ यदि मैच्योरिटी तक आयोजित किया जाता है, तो इस पर टैक्स नहीं लगाया जाता है। हालांकि निवेशक पांच साल के बाद समय से पहले एसजीबी को रिडीम कर सकते हैं। ऐसे में अगर आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स को पांच से आठ साल के बीच निवेशित रहते हैं, तो लाभ को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ माना जाता है। इंडेक्सेशन लाभ के साथ इस पर 20.8 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है।
वहीं, यदि एसजीबी को तीन साल से पहले बेचा जाता है, तो पूंजीगत लाभ निवेशक की आय में जोड़ा जाता है और लागू आयकर स्लैब के आधार पर टैक्स लगाया जाता है। इसके अलावा, तीन साल के बाद स्टॉक एक्सचेंज पर एसजीबी बेचने पर निवेशकों द्वारा अर्जित पूंजीगत लाभ लंबी अवधि के होते हैं और इंडेक्सेशन लाभ के साथ 20 प्रतिशत पर कर लगाया जाता है।
# सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम का चौथा सीरीज कब होगा ओपेन
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने कहा है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2022-23 का चौथा सीरीज 06 से 10 मार्च 2023 के लिए ओपेन होगा। इस स्कीम के तहत गोल्ड बॉन्ड का टेन्योर 8 साल तक होता है और 5 साल के बाद इस स्कीम से निकलने की अनुमति दी जाती है।
- कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार
अन्य न्यूज़














