Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी व्रत से होते हैं सभी संकट दूर

पंडितों के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में उत्तम फलदायी होता है क्योंकि जो व्यक्ति पूरे वर्ष की सभी एकादशी व्रत नहीं कर सकता है, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके सभी 24 एकादशी व्रतों का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही उसे विष्णु कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
25 मई को निर्जला एकादशी व्रत है, सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आने वाली निर्जला एकादशी अत्यंत पुण्यदायी और मंगलकारी मानी जाती है। निर्जला एकादशी आत्मशुद्धि, संयम, भक्ति और दान का दिव्य पर्व है, इस व्रत से साधक को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है तो आइए हम आपको निर्जला एकादशी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं।
जानें निर्जला एकादशी के बारे में
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत को रखने से व्यक्ति के जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर होते हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साल 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगी। इस साल निर्जला एकादशी व्रत की खास बात यह है कि इस दिन शुभ रवि योग का संयोग भी बन रहा है। पंडितों के अनुसार यह योग बेहद प्रभावशाली होता है, इसमें पूजा-पाठ करने से साधक को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं और सभी प्रकार के दोषों से राहत मिलती हैं। हालांकि, संपूर्ण सामग्रियों के साथ पूजा करना शुभ माना जाता है।
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निर्जला एकादशी पर दान का है विशेष महत्व
शास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी के अवसर पर दान करने का अधिक महत्व है। दान करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी अधिक प्रसन्न होते हैं, जिससे दरिद्रता का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। अगर आप भी अपना जीवन खुशहाल चाहते हैं, तो निर्जला एकादशी के दिन इन विशेष चीजों का दान जरूर करें। इससे जीवन में आर्थिक उन्नति और शुभ फल की प्राप्ति होगी। निर्जला एकादशी के अवसर पर जल दान को महादान माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन जल से भरा घड़ा मंदिर या गरीब लोगों में दान करने से धन के मार्ग खुलते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही साधक को जीवन में किसी भी चीज की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।
अगर आप शुभ फल की प्राप्ति चाहते हैं, तो निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद फल का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन फल का दान करने से अटका हुआ धन वापस मिलता और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। अगर आप दांपत्य जीवन खुशहाल चाहते हैं, तो निर्जला एकादशी के दिन सुहागिन महिलाओं को सुहाग की सामग्री का दान करें। इसके अलावा पीले वस्त्र, चने की दाल, और हल्दी का दान भी करें। ऐसा माना जाता है कि इन चीजों का दान करने से आर्थिक तंगी की समस्या दूर होती है और दांपत्य जीवन खुशहाल होता है। जीवन में आ रहे सभी कष्टों से छुटकारा पाने के लिए एकादशी के दिन जूता या चप्पल का दान करना शुभ माना जाता है। इससे साधक के जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है और बिगड़े काम बनते हैं। साथ ही कारोबार में सफलता प्राप्त होती है।
निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त
पंडितों के अनुसार निर्जला एकादशी पर पूजा के लिए शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 05:25 ए एम से 07:10 ए एम तक है। इस समय में पूजा कर सकते हैं, नहीं तो लाभ-उन्नति मुहूर्त 12:24 पी एम से 02:09 पी एम भी है। उस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:05 ए एम से 04:45 ए एम और अभिजीत मुहूर्त 11:56 ए एम से 12:52 पी एम तक है। एकादशी पर राहुकाल दोपहर 02:09 पी एम से 03:53 पी एम तक रहेगा।
निर्जला एकादशी का पारण
शास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून शुक्रवार को होगा। पारण सुबह 05:25 ए एम से लेकर सुबह 08:13 ए एम के बीच कर सकते हैं। पारण के दिन द्वादशी का समापन रात 10:22 पी एम पर होगा।
जानें पारण का सही समय
निर्जला एकादशी का व्रत द्वादशी तिथि पर विधिपूर्वक खोला जाता है। स्नान, पूजा और दान के बाद ही जल और अन्न ग्रहण करना चाहिए। हिन्दू पंचांग के अनुसार 26 जून 2026 को द्वादशी तिथि पर पारण का समय प्रातः 6 बजे से 8 बजकर 39 मिनट तक शुभ माना गया है। पारण से पूर्व भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा करें और तत्पश्चात अन्नदान करके व्रत खोलें।
भक्तों के पूरे साल रहता है निर्जला एकादशी का इंतजार
पंडितों के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में उत्तम फलदायी होता है क्योंकि जो व्यक्ति पूरे वर्ष की सभी एकादशी व्रत नहीं कर सकता है, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके सभी 24 एकादशी व्रतों का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही उसे विष्णु कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। वेद व्यास जी की सलाह पर भीमसेन ने भी निर्जला एकादशी का व्रत रखा था, इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस एकादशी के पुण्य प्रभाव को देखकर ही पूरे वर्ष निर्जला एकादशी का इंतजार रहता है।
निर्जला एकादशी पर जरूर करें ये काम, होगा लाभ
शास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी के दिन व्रत रखें या न रखें, उस दिन पूजा के बाद आप जल का दान करें। पितरों को जल अर्पित करें। किसी प्यासे को पानी पिलाएं या घर के बाहर राहगीरों के लिए पानी की व्यवस्था करें। निर्जला एकादशी पर जल का दान करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलेगा और आप सुखी रहेंगे।
निर्जला एकादशी में पूजा के दौरान करें इन सामग्रियों का दान
पंडितों के अनुसार भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर, पीले पुष्प और भगवान को अर्पित करने के लिए पीले वस्त्र। इसके अलावा मौसमी फल, पंचमेवा और मिष्ठान व पीला वस्त्र, जल से भरा कलश और कुछ आम के पत्ते, नारियल, तुलसी दल और पंचामृत, पान, लौंग, सुपारी और कपूर, हल्दी, कुमकुम, अक्षत और पीला चंदन, धूप, दीपक, तिल और पूजा की मौली भी दान के लिए खास मानी जाती है। यही नहीं दान के लिए चने की दाल, गुड़, पंखा, पानी का घड़ा और पीले फल, मिठाई और लड्डू भी निर्जला एकादशी के दिन दान के लिए खास माने जाते हैं।
निर्जला एकादशी का है विशेष धार्मिक महत्व
शास्त्रों में निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार महाबली भीमसेन भोजन के बिना नहीं रह पाते थे, इसलिए महर्षि वेदव्यास ने उन्हें वर्ष भर की सभी एकादशियों के फल की प्राप्ति हेतु केवल एक निर्जला एकादशी का व्रत रखने का उपदेश दिया था। तभी से यह एकादशी विशेष रूप से भीमसेन एकादशी के नाम से भी विख्यात हुई। निर्जला शब्द का अर्थ है बिना जल के। इस दिन साधक सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तक अन्न और जल दोनों का त्याग करता है। यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है, परंतु इसकी महिमा भी उतनी ही महान है। धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि यह व्रत करने से मनुष्य के संचित पाप नष्ट होते हैं और उसे भगवान विष्णु का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- प्रज्ञा पाण्डेय
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