गंगा सप्तमी पर गंगा पूजन से मिलता है यश और सम्मान

गंगा सप्तमी पर गंगा पूजन से मिलता है यश और सम्मान
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बैसाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन गंगा जी अवतरित हुईं थीं। इस साल गंगा सप्तमी 8 मई को है। गंगा पापनाशिनी तथा मोक्षदायक हैं। गंगा नदी में स्नान मात्र से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।

मोक्षदायिनी मां गंगा का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान एवं पूजन विशेष फलदायी माना जाता है, तो आइए हम आपको गंगा सप्तमी के महत्व के बारे में बताते हैं।

गंगा सप्तमी के बारे में विशेष जानकारी 

बैसाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन गंगा जी अवतरित हुईं थीं। इस साल गंगा सप्तमी 8 मई को है। गंगा पापनाशिनी तथा मोक्षदायक हैं। गंगा नदी में स्नान मात्र से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन गंगा मां की पूजा करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही नहीं गंगा मैया के पूजन एवं स्नान से रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान की प्राप्ति होती है और समस्त पापों का क्षय होता है।

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गंगा सप्तमी से जुड़ी पौराणिक कथा भी है खास 

गंगा सप्तमी से जुड़ी एक पौराणिक कथा प्रचलित है। इस कथा के अनुसार गंगा नदी एक बार तीव्र गति से बह रही थी वहीं जह्नु ऋषि तपस्या में लीन और उनका सामान भी रखा हुआ था। गंगा की तेज बहाव के कारण उनका सामान बह गया। जब ऋषि की नींद खुली तो वह बहुत क्रुद्ध हुए और गुस्से में गंगा नदी को पी गए। इसके बाद भागीरथ ऋषि ने जह्नु ऋषि से प्रार्थना की गंगा को पुनः मुक्त करें। तब जह्नु ऋषि ने भगीरथ की प्रार्थना स्वीकार कर ली और गंगा को मुक्ति प्रदान की। उसके बाद गंगा जह्नु ऋषि के कान से प्रवाहित हुईं। यह घटना बैसाख महीने की सप्तमी तिथि को हुई थीं। इसलिए बैसाख शुक्ल पक्ष सप्तमी को गंगा सप्तमी मनायी जाती है तथा जह्नु ऋषि की पुत्री होने के कारण गंगा को जाह्नवी भी कहा जाता है। 

ऐसे करें पूजा, होगा लाभ

गंगा सप्तमी का हिन्दू धर्म में खास महत्व होता है। इस दिन घर में विशेष पूजा-पाठ का खास महत्व होता है। इस दिन साधक प्राकः काल उठकर स्नान कर घर के मंदिर की साफ-सफाई करें। उसके बाद शुभ मुहूर्त में उत्तर दिशा में एक चौकी रखकर लाल कपड़ा बिछा लें। उसके बाद लाल कपड़े पर गंगा जल मिले कलश की स्थापना करें। उसके बाद जल में गाय का दूध, रोली, चावल, शक्कर, शहद और इत्र मिलाएं। अब कलश में आम या अशोक के पांच पत्ते रखकर उसके ऊपर नारियल रख दें। अब मंत्रोच्चार से पूजा करें और लाल चंदन, कनेर का फूल, मौसमी फल तथा गुड़ का प्रसाद चढ़ाएं। साथ ही  अगर आपके लिए गंगा स्नान संभव ना हो तो आप घर पर ही अपने ऊपर गंगा जल की कुछ बूंदे लेकर छिड़क लें। स्नान के बाद गंगा मां की प्रतिमा का पूजन करें। इस दिन यदि आप भगवान शिव की अराधना करते हैं तो यह भी बहुत फलदायी मानी जाती है। आप भगीरथ की पूजा भी कर सकते हैं, जो गंगा को अपने तप से पृथ्वी पर लाए थे। गंगा सप्तमी के दिन दान-पुण्य करने से भी फल मिलता है।

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जानें गंगा सप्तमी का महत्व 

गंगा सप्तमी पर गंगा में स्नान करने का महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी कष्ट कट जाते हैं और उसका उद्धार होता है। मनुष्य के पापों का हरण होता है और भगवान उससे प्रसन्न होते हैं। पंडितों की मान्यता के अनुसार गंगा सप्तमी की कथा पढ़ने या सुनने के बाद किसी भी रूप में गरीबों की सहायता जरूर करें। दान देने के बाद गाय को भोजन अवश्य कराएं क्योंकि गाय में सभी देवी देवताओं का वास माना जाता है। गंगा सप्तमी के दिन भगवान विष्णु और भगवान शंकर की भी विधिवत पूजा की जाती है, भगवान शंकर का गंगा जल से अभिषेक करने पर शिवजी और गंगा मैया की कृपा प्राप्त होती है। शास्त्रों की मान्यता है कि गंगा मैया के पावन जल के छींटे मात्र शरीर पर पडऩे से जन्म-जन्मांतर के पाप दूर हो जाते हैं। गंगा पूजन व स्नान करने से लौकिक व परलौकिक सुखों की प्राप्ति होती है।

धन प्राप्ति के लिए करें ये उपाय

गंगा सप्तमी हिन्दुओं का विशेष त्यौहार है। इस दिन धन प्राप्ति हेतु ईश्वर से प्रार्थना करें तथा चांदी या स्टील के लोटे में गंगाजल भरकर उसमें पांच बेलपत्र लें। 

जानें गंगा सप्तमी का महत्व 

गंगा सप्तमी पर गंगा में स्नान करने का महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी कष्ट कट जाते हैं और उसका उद्धार होता है। मनुष्य के पापों का हरण होता है और भगवान उससे प्रसन्न होते हैं।

- प्रज्ञा पाण्डेय