Ectopic Pregnancy के क्या हैं लक्षण, जानें इसके उपचार का तरीका

ectopic pregnancy
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फर्टिलाइज एग जब गर्भाशय तक ना पहुंच कर फेलोपियन ट्यूब अथवा एब्डोमिनल कैविटी में चला जाता है इस स्थिति को एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहा जाता है। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण फेलोपियन फट सकती है। स्मोकिंग, पेल्विक डिसीज, अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी, आईवीएफ या फर्टिलिटी की दवाओं का सेवन इसका कारण हो सकते हैं।

प्रेग्नेंसी की कन्फर्मेशन तब होती है जब एग यूटरस {गर्भाशय } से जाकर जुड़ता है लेकिन किन्ही मामलों में एग यूटरस में ना जाकर फेलोपियन ट्यूब में चला जाता है, यह स्थिति एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहलाती है। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी 9 प्रकार की होती है जिसमें ट्यूबल एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की समस्या ज्यादा देखी जाती है। यदि फर्टिलाइज एग फेलोपियन ट्यूब में ही रहे तो इससे अन्य अंगो को नुकसान पहुंच सकता है और एग का विकास नहीं होगा क्योकि फर्टिलाइज एग की ग्रोथ गर्भाशय में ही संभव है। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की समस्या कुछ महिलाओं के साथ ही होते हैं। शुरू में दवाओं के जरिये इसका इलाज संभव है, समस्या बढ़ने पर सर्जरी की सहायता ली जाती है। आइये जानते हैं एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण-

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण
- अधिक उम्र में गर्भधारण
- आईवीएफ के द्वारा गर्भधारण
- फेलोपियन ट्यूब में सूजन
- हार्मोन्स का असंतुलन
- फर्टिलिटी दवाओं का सेवन
- फर्टिलाइज एग का ठीक से विकसित ना होना
- डैमेज ट्यूब

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एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षण
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में मुख्य रूप से फेलोपियन ट्यूब का फटना, हल्की या ज्यादा ब्लीडिंग होना,उल्टी, पेट ख़राब होना, पेल्विक हिस्से में दर्द, पेट में मरोड़ या ऐंठन, चक्कर आना, बेहोशी और कमजोरी होना आदि लक्षण होते हैं। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की समस्या गर्भावस्था की शुरूआत में ही देखी जाती है। कभी-कभी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के ये लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, यदि आपका एचसीजी लेवल कम हो तो भी आपको एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का खतरा हो सकता है।  
 
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का इलाज

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का पता लगाने के लिए अल्ट्रा साउंड, पेल्विक एक्जामिनेशन और प्रेग्नेंसी टेस्ट किया जाता है। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में एग को दवाओं या सर्जरी के द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है। यदि आपकी प्रेग्नेंसी कुछ ही सप्ताह की है तो आपको methotrejaat दिया जाता है यह ट्यूब में कोशिकाओं की ग्रोथ नहीं होने देगा।
   
बचाव

ज्यादा धूम्रपान ना करें, यौन संक्रमित और पेल्विक इन्फ्लामेट्री बीमारियों से बचें। पौष्टिक भोजन करें और हार्मोनल संतुलन का विशेष ध्यान रखें, इन उपायों से एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के खतरे से बचा जा सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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