IVF Cycle के मुश्किल दौर में Counselor की मदद से रिश्ते और मानसिक सेहत को ऐसे संभालें

IVF Treatment
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IVF प्रक्रिया में दवाओं से ज्यादा मानसिक और भावनात्मक थकान कपल्स को परेशान करती है। एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद का इंतजार और असफलता का डर रिश्ते पर भी असर डाल सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार अपनी बात सीमित लोगों से साझा करके, काउंसलर की मदद लेकर और जरूरी ब्रेक लेकर इस तनाव को कम किया जा सकता है।

IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन लाखों कपल के लिए माता-पिता बनने की उम्मीद बन चुका है। हालांकि आईवीएफ के इंजेक्शन या दवाएं ज्यादा मुश्किल नहीं होती है। बल्कि महिलाएं एक सप्ताह के अंदर इस ट्रीटमेंट की आदत डाल लेती हैं। लेकिन इस प्रोसेस में असली थकान मानसिक रूप से होती है। जो ट्रीटमेंट के दौरान महिलाओं के आसपास रहता है। इस दौरान लंबा इंतजार, बात को छिपाने की मजबूरी और फैमिली के सवालों से महिलाएं अक्सर मानसिक रूप से परेशान हो जाती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस मुश्किल समय में कपल्स खुद को कैसे संभाल सकते हैं।

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद का इंतजार

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक आईवीएफ में एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद महिलाओं के लिए 14 दिन घबराहट और उम्मीद वाले होते हैं। कई बार 2 हफ्ते का समय कई सालों जितना लंबा लगता है। कई पेशेंट्स बार-बार कैलेंडर देखती हैं। महिलाएं इस दौरान अक्सर पेट पर हाथ रखकर अपने आने वाले बच्चे से बातें करती थीं।

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लेकिन जब कोई आईवीएफ फेल होता है, तो यह सिर्फ मेडिकल फेलियर नहीं बल्कि महिला के लिए बहुत मुश्किल समय होता है। लोगों को उम्मीद होती है कि आप नॉर्मल होकर अगले दिन अपने काम पर लौट जाएं, जबकि यह दर्द वास्तन में रियल होता है। इसलिए एक्सपर्ट की सलाह है कि न तो खुद को कमजोर समझें और न ही ओवररिएक्ट करें।

महिलाएं खुद को करती हैं ब्लेम

अक्सर महिलाएं ट्रीटमेंट के दौरान खुद को ब्लेम करने लगती हैं। उनके मन में सवाल आने लगते हैं कि क्या शादी के बाद उन्होंने ज्यादा वेट कर लिया, लेट लाइट काम करने की वजह से ऐसा हुआ या एक ट्रिप की वजह से ऐसा हुआ। जबकि इन सभी सवालों का जवाब नहीं है।  इनफर्टिलिटी थायराइड या शुगर जैसी ही एक नॉर्मल मेडिकल कंडीशन होती है। यह किसी की गलती के कारण नहीं है। इस ट्रीटमेंट के फेल होने पर स्मार्ट और समझदार महिलाएं भी अपना कॉन्फिडेंस खो देती हैं।

रिश्ते पर पड़ता है असर

इस ट्रीटमेंट के स्ट्रेस का असर कई बार पति-पत्नी के रिश्ते पर भी देखने को मिलता है। अक्सर पति की चुप्पी को पत्नी उसका अनकेयरिंग एटीट्यूड समझ लेती है। जब देर रात पत्नी इस पर बात करना चाहती हैं, लेकिन पति सोकर सब भूलना चाहता है। इस मौके पर गलत दोनों में से कोई नहीं है। बस दोनों के दुख जताने का तरीका अलग है।

खुद को कैसे संभाले

अगर आप भी इस मुश्किल दौर से बाहर निकलना चाहती हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

कम लोगों से शेयर करें अपनी बात

पति-पत्नी मिलकर यह तय कर लें कि इस ट्रीटमेंट के बारे में किसे बताना है और किसको नहीं बताना है। क्योंकि आपका सर्कल जितना छोटा होगा, आपको भी उतने ही कम सवालों का सामना करना पड़ेगा।

2 हफ्ते के इंतजार को पहले से करें प्लान

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद के 2 सप्ताह में कपल को खुद को छोटे-मोटे कामों में व्यस्त रखना चाहिए। शाम को बैठकर मूवी देख सकते हैं, साथ में वॉक कर सकते हैं या स्ट्रीट फूड का लुत्फ उठा सकते हैं।

काउंसलर की मदद

किसी भी काउंसलर से बात करने ज्यादा महंगा नहीं बल्कि यह ट्रीटमेंट का एक जरूरी हिस्सा होता है।

ब्रेक है जरूरी

अगर आपको एक साइकिल के बाद दूसरे साइकिल के बीच में 1 से 2 महीने का ब्रेक चाहिए, जो वह ब्रेक जरूर लें। क्योंकि इस दौरान खुद को रिलैक्स करना बेहद जरूरी है।

पतियों के लिए खास टिप्स

एक्सपर्ट के मुताबिक अगर आपकी पत्नी उदास है, तो उनकी उदासी को फौरन फिक्स करने की कोशिश नहीं करना चाहिए। बस उनके पास बैठें, उनके साथ रहें। आपका यह छोटा सा सपोर्ट भी उनके लिए काफी मायने रखता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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