बांग्लादेश में अवामी लीग के 7 नेताओं को मौत की सज़ा, 2024 हिंसा मामले में दोषी करार

Bangladesh
ANI
अभिनय आकाश । Sep 15 2026 3:31PM

बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर समेत सात नेताओं को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने उन पर हत्या और हिंसा भड़काने के आरोप साबित पाए हैं। इससे पहले ट्रिब्यूनल पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भी मौत की सजा सुना चुका है।

बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए आंदोलन से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए अवामी लीग के सात वरिष्ठ नेताओं को मौत की सज़ा सुनाई है, जिनमें पार्टी के महासचिव ओबैदुल कादर भी शामिल हैं। जस्टिस नज़रुल इस्लाम चौधरी की अध्यक्षता वाली ट्रिब्यूनल-2 कोर्ट ने मंगलवार को यह फ़ैसला सुनाया। मौत की सज़ा पाने वाले अन्य नेताओं में अवामी लीग के संयुक्त महासचिव बहाउद्दीन नसीम; सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात; जुबो लीग के अध्यक्ष शेख फज़ले शम्स पराश और महासचिव मैनुल हुसैन खान निखिल; तथा छात्र लीग के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन और महासचिव शेख वली आसिफ़ एनन शामिल हैं। 

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ट्रिब्यूनल के अनुसार, इन सातों पर जुलाई-अगस्त 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन के दौरान हत्या, हिंसा भड़काने और हत्या के लिए उकसाने के आरोप थे। कोर्ट ने कहा कि आरोप साबित हो गए हैं और मौत की सज़ा सुनाई। यह फ़ैसला तब आया है जब बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-1 ने हसीना को विद्रोह के दौरान मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों का दोषी पाए जाने के बाद 2025 में मौत की सज़ा सुनाई थी। ट्रिब्यूनल ने हसीना को उन पर लगाए गए सभी पांच आरोपों में दोषी पाया। इन आरोपों में लोगों को भड़काना, अत्याचारों को रोकने या दोषियों को सज़ा देने में नाकाम रहना और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ ड्रोन, हेलिकॉप्टर और जानलेवा हथियारों के इस्तेमाल का आदेश देना शामिल है। 

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हसीना के साथ-साथ पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-ममुन और पूर्व गृह मंत्री असदुज़्ज़मान खान कमाल पर भी आरोप लगाए गए थे। छात्रों के बड़े पैमाने पर हुए विद्रोह के बीच अपनी सरकार गिरने के बाद, 78 वर्षीय हसीना 5 अगस्त, 2024 को भारत भाग गई थीं। ट्रिब्यूनल ने इससे पहले हसीना, कमाल और ममुन पर पांच आरोप तय किए थे, जिनमें लोगों को भड़काना, प्रदर्शनकारियों की हत्या का आदेश देना, सीनियर कमांड की ज़िम्मेदारी और संयुक्त आपराधिक साज़िश शामिल थी। इस मामले की कार्यवाही ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है और ट्रिब्यूनल के फ़ैसले 2024 के विद्रोह के दौरान हुई हिंसा के लिए एक बड़ी कानूनी जवाबदेही तय करते हैं।

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