800 साल बाद भारत में वो हुआ जिसने हिलाई दुनिया, ये होती है ताकत!

आपको याद दिला दें कि 1204 ईसवी में बख्तियार खिलजी ने बंगाल पर हमला किया था। तब बंगाल के राजा लक्ष्मण सेन थे। बख्तियार खिलजी ने लक्ष्मण सेन को हराकर बंगाल पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 1204 से 1576 तक बंगाल पर तुर्क और अफगानों का क्रूर कब्जा रहा। इसके बाद 1576 से लेकर 1757 तक डकैत और लुटेरे मुगलों ने बंगाल समेत पूरे भारत को लूटा। भारत पर अत्याचार किए। भारत पर यह इस्लामिक कब्जा था।
भारत में 800 सालों बाद वो हुआ है जो दुनिया हिलाने के लिए काफी है। पूरी दुनिया के मुस्लिम, ईसाई और वामपंथी अब सालों तक इस बात पर अध्ययन करेंगे कि 800 सालों बाद भारत में यह ऐतिहासिक चीज कैसे हो गई। बंगाल में करीब 800 सालों बाद सनातन धर्म को मानने वाली सरकार आई है। आपको याद दिला दें कि 1204 ईसवी में बख्तियार खिलजी ने बंगाल पर हमला किया था। तब बंगाल के राजा लक्ष्मण सेन थे। बख्तियार खिलजी ने लक्ष्मण सेन को हराकर बंगाल पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 1204 से 1576 तक बंगाल पर तुर्क और अफगानों का क्रूर कब्जा रहा। इसके बाद 1576 से लेकर 1757 तक डकैत और लुटेरे मुगलों ने बंगाल समेत पूरे भारत को लूटा। भारत पर अत्याचार किए। भारत पर यह इस्लामिक कब्जा था।
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1757 से 1947 तक बंगाल समेत पूरे भारत पर अंग्रेज आकर बैठ गए। अंग्रेजों ने बंगाल में भयंकर अत्याचार किए। इस दौरान यहां पर ईसाई राज रहा। इसके बाद बंगाल वामपंथी सरकारों के शिकंजे में आ गया। अब 800 साल बाद 2026 में सनातन धर्म को मानने वाले बंगाल की सत्ता में आकर बैठे हैं। आरएसएस का मानना है कि बंगाल सिर्फ एक राजनैतिक लड़ाई नहीं बल्कि एक सिविलाइजेशनल बैटल रहा है।
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आपको बता दें कि अगर ऐसा नहीं होता तो बंगाल तेजी से बांग्लादेश बनने की तरफ बढ़ रहा था। लेकिन बंगाल बाल-बाल बच गया। यह सत्य ममता बनर्जी के तीन सबसे मशहूर नारों से साबित होता है। ममता बनर्जी ने पिछले 15 सालों में जमकर तीन नारों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया। पहला था मां माटी मानुष, दूसरा था जय बांग्ला और तीसरा था खेला होबे। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि ममता बनर्जी ने ये तीनों नारे बांग्लादेश से चुराए थे। जय बांग्ला 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान शेख मुजीबुर रहमान और मुक्ति वाहिनी का युद्ध नाद था। 1991 में बांग्लादेश चुनाव में बेगम खालिदा जिया की बीएनपी पार्टी ने मां माटी मानुष का नारा लगाया था जिसे ममता बनर्जी ने कॉपी कर लिया। तीसरा नारा खेला होबे 2013 का है। जिसे बांग्लादेश की आवामी लीग के नेता शमीम उस्मान ने दिया था। ममता बनर्जी ने 2021 में बंगाल चुनावों के दौरान इस नारे को भी चुरा लिया।
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