AI से वित्तीय धोखाधड़ी में भारी उछाल, US में 89 करोड़ डॉलर से अधिक का नुकसान

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अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई की रिपोर्ट के अनुसार एआई आधारित वित्तीय धोखाधड़ी से अमेरिकियों को 89.3 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है। ठग आवाज की नकल और फर्जी संदेशों के जरिए परिवारों तथा बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं। विशेषज्ञों ने संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत संपर्क करने, सुरक्षा कोड तय करने और बैंकों द्वारा कड़े नियम लागू करने की सलाह दी है।

(पवन जैन, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन फ्लिंट) फ्लिंट (अमेरिका), 15 सितंबर (द कन्वरसेशन) फोन की घंटी बजती है और दूसरी तरफ आपके पोते की घबराई हुई आवाज सुनाई देती है। वह बताता है कि उसके साथ दुर्घटना हो गई है और उसे तत्काल पैसों की जरूरत है। आवाज पोते की आवाज जैसी ही होती है लेकिन पोते की आवाज नहीं होती।

यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से तैयार की गई आवाज होती है, जिसे इंटरनेट पर उपलब्ध किसी वीडियो या ऑडियो क्लिप से तैयार किया गया है। कई वर्षों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा को लेकर चेतावनियों का केंद्र कॉरपोरेट नेटवर्क और सरकारी प्रणालियां रही हैं। हालांकि, ये खतरे वास्तविक हैं, लेकिन अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के धोखाधड़ी संबंधी आंकड़ों से एक अलग तस्वीर सामने आती है—घरेलू खातों से बड़ी मात्रा में धन निकल रहा है।

एफबीआई की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, उसकी इंटरनेट क्राइम कंप्लेंट सेंटर (आईसी3) इकाई ने पहली बार एआई से जुड़े मामलों को अलग से दर्ज करना शुरू किया। अमेरिकियों ने ऐसे 22,000 से अधिक मामले दर्ज कराए और करीब 89.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर के नुकसान की सूचना दी। इनमें से 63.2 करोड़ डॉलर का नुकसान निवेश संबंधी धोखाधड़ी में हुआ जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को 35.2 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ।

ये आंकड़े केवल उन पीड़ितों को दर्शाते हैं जिन्होंने एफबीआई को शिकायत की और ये वह मामले हैं जिनमें एआई की भूमिका की पहचान की जा सकी। परामर्श कंपनी डेलॉइट का अनुमान है कि एआई से होने वाला वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक हो सकता है और अमेरिका में कुल धोखाधड़ी से होने वाला नुकसान 2027 तक बढ़कर 40 अरब डॉलर हो सकता है, जो 2023 में 12.3 अरब डॉलर था। विशेषज्ञों के अनुसार, एआई ने नई तरह की धोखाधड़ी की राह नहीं बनाई है, बल्कि पुराने तरीकों को सस्ता, तेज और अधिक विश्वसनीय बना दिया है।

कुछ सेकंड की आवाज की रिकॉर्डिंग से किसी व्यक्ति की आवाज की नकल तैयार की जा सकती है। इसी तरह, एआई आधारित मॉडल धाराप्रवाह और व्यक्तिगत फर्जी संदेश तैयार कर सकते हैं। धोखाधड़ी में डर और जल्दबाजी का इस्तेमाल प्रमुख हथियार है।

ठग परिवार के सदस्य, बैंक अधिकारी या कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी बनकर तत्काल पैसे भेजने का दबाव बनाते हैं। तनाव की स्थिति में लोग अक्सर बिना पर्याप्त जांच के निर्णय ले लेते हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को संदिग्ध फोन आने पर तुरंत कॉल काटकर संबंधित व्यक्ति या बैंक के ज्ञात नंबर पर खुद संपर्क करने की सलाह दी है।

परिवारों को आपात स्थिति के लिए एक गोपनीय कोड शब्द तय करना चाहिए और बड़ी रकम के हस्तांतरण के लिए दो लोगों की मंजूरी तथा 24 घंटे की प्रतीक्षा जैसी व्यवस्था अपनानी चाहिए। वित्तीय खातों में दो-स्तरीय प्रमाणीकरण और लेनदेन संबंधी अलर्ट सक्रिय रखने तथा किसी अनजान व्यक्ति के साथ सत्यापन कोड साझा नहीं करने की भी सलाह दी गई है। बुजुर्ग परिवार के सदस्यों को विशेष रूप से इन सावधानियों के बारे में जागरूक करना जरूरी है।

यदि पैसा धोखाधड़ी से स्थानांतरित हो चुका है तो बैंक से तुरंत संपर्क कर राशि वापस पाने का प्रयास करने और संबंधित अधिकारियों को शिकायत करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल व्यक्तिगत सावधानी पर्याप्त नहीं है। तत्काल और अपरिवर्तनीय डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बैंकों और नियामकों को भी धोखाधड़ी रोकने तथा पीड़ितों को धन वापस दिलाने के लिए अधिक प्रभावी व्यवस्था बनानी होगी।

अच्छी आदतें ऐसी धोखाधड़ी को मुश्किल बना सकती हैं, लेकिन वे अकेले पर्याप्त नहीं हैं। अमेरिका के नियम तकनीकी बदलावों से पीछे रह गए हैं। संघीय कानून उपभोक्ताओं को अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक धन हस्तांतरण से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है।

नियामकों का कहना है कि यदि धोखाधड़ी करने वाले व्यक्ति ने किसी हस्तांतरण की शुरुआत कराई है तो वह अनधिकृत माना जा सकता है, भले ही पीड़ित को धोखे से खाते की जानकारी साझा करने के लिए मजबूर किया गया हो। हालांकि, त्वरित भुगतान से जुड़ी धोखाधड़ी के पीड़ितों को अक्सर बहुत कम धन वापस मिलता है। बैंक कई बार ऐसे नुकसान को ‘अधिकृत’ मान लेते हैं, जब ग्राहक को धोखे से भुगतान मंजूर करने के लिए राजी किया गया हो।

ब्रिटेन ने अलग रास्ता अपनाया है। 2024 के अंत से वहां बैंकों को ज्यादातर धोखाधड़ी पीड़ितों को 85,000 पाउंड तक की राशि वापस करनी होती है। इसका खर्च धन भेजने वाले और प्राप्त करने वाले दोनों संस्थानों के बीच बांटा जाता है।

इस व्यवस्था के पीछे तर्क यह है कि धोखाधड़ी से निपटने के लिए बैंक सबसे बेहतर स्थिति में हैं, क्योंकि उनके पास सुरक्षा दल और ऐसे विश्लेषणात्मक उपकरण हैं जो लाखों लेनदेन में संदिग्ध पैटर्न पहचान सकते हैं। जब तक नुकसान की जिम्मेदारी का पर्याप्त वित्तीय दबाव नहीं था, तब तक इन प्रणालियों का पूरा इस्तेमाल करने के लिए बैंकों के पास उतना मजबूत प्रोत्साहन नहीं था। नियामक के आंकड़ों के अनुसार, नए नियम लागू होने के बाद धोखाधड़ी में खोई गई 88 प्रतिशत राशि पीड़ितों को वापस की जा चुकी है।

एक स्वतंत्र मूल्यांकन में यह भी पाया गया कि पहले वर्ष में धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान का करीब पांचवां हिस्सा कम हुआ। यह दर्शाता है कि जब नुकसान की जिम्मेदारी बैंकों पर आती है तो वे धोखाधड़ी रोकने के नए तरीके खोजने के लिए अधिक सक्रिय होते हैं। अमेरिकी नियामकों और कांग्रेस को इस मॉडल का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए।

जब भुगतान तत्काल और अपरिवर्तनीय हो, तो जोखिम का पूरा बोझ ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता, क्योंकि इस पूरी व्यवस्था में धोखाधड़ी रोकने के लिए ग्राहक ही सबसे कमजोर पक्ष है।

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