'समय कम है', Iran का Peace Proposal लेकर America पहुंचा Pakistan, क्या टलेगा बड़ा युद्ध?

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अभिनय आकाश । May 18 2026 2:17PM

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्र के हवाले रिपोर्ट में कहा है कि यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से साझा किया गया था, जो दोनों देशों के बीच मुख्य वार्ताकार के रूप में उभरा है। रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है, हमारे पास ज्यादा समय नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता ठप होने के कारण दोनों पक्ष अपने लक्ष्य लगातार बदल रहे हैं।

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान द्वारा शांति का एक संशोधित प्रस्ताव संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ साझा किया गया है, जो वर्तमान में अस्थायी युद्धविराम के तहत है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने  सूत्र के हवाले रिपोर्ट में कहा है कि यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से साझा किया गया था, जो दोनों देशों के बीच मुख्य वार्ताकार के रूप में उभरा है। रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है, हमारे पास ज्यादा समय नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता ठप होने के कारण दोनों पक्ष अपने लक्ष्य लगातार बदल रहे हैं।

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पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, अमेरिका-इजराइल के साथ पड़ोसी देश के हालिया टकराव और युद्ध-विराम को स्थायी शांति में तब्दील करने के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया गया। मीडिया में आई एक खबर में यह जानकारी दी गई है। नकवी शनिवार को बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के ईरान पहुंचे। इस यात्रा का मकसद स्पष्ट रूप से वार्ता के जरिये अमेरिका-ईरान युद्ध का समाधान निकालने के प्रयास करना है। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ अखबार ने ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के हवाले से प्रकाशित खबर में कहा कि नकवी ने रविवार को तेहरान में पेजेश्कियान के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। खबर में तेहरान स्थित पाकिस्तानी दूतावास के एक बयान के हवाले से कहा गया है कि नकवी ने राष्ट्रपति कार्यालय में ईरानी राष्ट्रपति के साथ लगभग 90 मिनट तक बैठक की। खबर के मुताबिक, पेजेश्कियान ने अपने-अपने क्षेत्रों को ईरान के खिलाफ सशस्त्र अभियानों में इस्तेमाल नहीं होने देने के लिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक की तारीफ की। खबर के अनुसार, पेजेश्कियान ने कहा कि क्षेत्रीय शांति के लिए इस्लामी देशों के बीच एकजुटता जरूरी है, क्योंकि इससे बाहरी हस्तक्षेप की संभावना कम हो जाती है।

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