नहीं लेने तुम्हारे फोकट के हेलीकॉप्टर, बालेन शाह ने ट्रंप के ऑफर को मारी लात!

बालेन शाह ने चीन पर बड़ा एक्शन लिया है। जिससे शी जिनपिंग को झटका लगा है। सबसे पहले बात करते हैं उस ऑफर की जिसने खलबली मचाई है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने नेपाली सेनाएं नेपाली आर्मी को छह बेल हेलीकॉप्टर देने का प्रस्ताव भेजा है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेपाल की आर्मी के लिए छह एकदम नए लड़ाकू हेलीकॉप्टर देने का बड़ा ऑफर दिया। लेकिन काठमांडू के गलियारों से खबर आ रही है कि नेपाल इस तोहफे को लेने के मूड में नहीं है। बालेन शाह की बढ़ती लोकप्रियता और वहां की वर्तमान सरकार के रुख ने अमेरिका को सोच में डाल दिया है। इसके पीछे चीन का हाथ है या नेपाल वाकई अब किसी के इशारों पर नाचना नहीं चाहता। किसी की कठपुतली, किसी का मोहरा, किसी का टूल नहीं बनना चाहता। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने नेपाली सेनाएं नेपाली आर्मी को छह बेल हेलीकॉप्टर देने का प्रस्ताव भेजा है।
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अमेरिका का कहना है कि वो नेपाल की आपदा, राहत और सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना चाहता है। जहां पर यह हेलीकॉप्टर काम में आएंगे जब कभी आपदा आती है तो। लेकिनअंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुछ भी फ्री में नहीं होता है। कोई भी फ्री में नहीं देता है। जानकारों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस ऑफर के जरिए नेपाल की सेना पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। नेपाल वो देश है जो चीन और भारत के बीच में आता है। अमेरिका चाहता है कि नेपाल की सेना के पास अमेरिकी साजो सामान हो ताकि भविष्य में उसकी निर्भरता चीन पर कम हो सके। दखल अंदाजी अमेरिके की बढ़ जाए। लेकिन नेपाल इस चुंबकीय ऑफर के पीछे छिपे भू-राजनीतिक यानी जिओपॉलिटिकल खेल को पूरी तरह से समझ चुका है।
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नेपाल का कहना और मानना है कि हेलीकॉप्टर तो फ्री में मिल जाएंगे। अमेरिका दे देगा लेकिन उनका रखरखाव मेंटेनेंस करेगा। नेपाल की अर्थव्यवस्था पर ये बोझ ना मन जाए। सफेद हाथी ना साबित हो जाए। नेपाल को डर है कि इन हेलीकॉप्टर्स को चलाने का खर्च इतना ज्यादा होगा कि वो सेना का बजट बिगाड़ कर रख देगा। दूसरा यह है कि बालेन शाह और राष्ट्रवादी लहर इस वक्त नेपाल में चरम पर है। काठमांडू के काठमांडू के मेयर बालन शाह की नेपाल फर्स्ट वाली राजनीति ने जो कि अब प्रधानमंत्री बन चुके हैं। वहां के युवाओं में एक अलग राष्ट्रवादी लहर पैदा कर दी है। जनता अब किसी भी देश चाहे वो भारत हो, चीन हो, अमेरिका हो, कोई भी हो। उनके अंधे समर्थन के खिलाफ है। सरकार को डर है कि अमेरिका से सैन्य मदद लेने पर जनता इसे संप्रभुता यानी सोवरनिटी पर खतरा बांध सकती है। नेपाल के काम में अड़ंगा बांध सकती है। दखल अंदाजी बांध सकती है। रिपोर्ट में एक बहुत ही दिलचस्प मोड़ तब आया जब नेपाल ने सिर्फ मना नहीं किया अमेरिका को बल्कि अमेरिका को एक काउंटर प्रपोजल भेजने की तैयारी भी कर दी।
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नेपाल का कहना है कि हमें छोटे हेलीकॉप्टर या इस तरह के हेलीकॉप्टर मत दो। अगर देना ही है तो भारी परिवहन विमान यानी हैवी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जैसे C130 हरकुलिस दो। नेपाल का तर्क बिल्कुल सीधा है। नेपाल एक पहाड़ी देश है जहां अक्सर भूकंप और भूस्खलन जैसी आपदाएं आती हैं। वहां सामान पहुंचाने के लिए छोटे हेलीकॉप्टर पहले से ही काफी हैं। लेकिन बड़े पैमाने पर राहत सामग्री ढोने के लिए बड़े जहाजों की हवाई जहाजों की हेलीकॉप्टर्स की कमी है।
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