शंखनाद और मंत्रोच्चार के बीच Balen Shah का कूल अंदाज, Sunglasses पहनकर ली PM पद की शपथ

35 वर्षीय बालेन्द्र शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गए हैं, जो मधेशी समुदाय से इस पद पर पहुंचने वाले पहले नेता हैं; उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की भारी जीत नेपाली राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है।
नेपाल की राजनीति में आज का दिन काफी ऐतिहासिक रहा। नेपाल बदलाव की ओर बढ़ रहा है या नहीं यह तो आने वाला समय तय करेगा लेकिन एक समय रैपर के रूप में पहचाने जाने वाले शाह अब देश की सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 35 वर्षीय बालेन्द्र शाह ने देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के तौर पर आज शपथ ली।
शाह ने नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76(1) के तहत प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। वह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी यानी RSP के संसदीय दल के नेता हैं और उसी हैसियत से उन्हें यह पद मिला। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने काठमांडू के शीतल निवास स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उन्हें शपथ दिलाई। शपथ लेते हुए शाह ने कहा कि वे देश और जनता के नाम पर संविधान के प्रति पूरी निष्ठा रखेंगे और प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाएंगे।
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बालेन्द्र शाह का शपथ ग्रहण समारोह भी अपने आप में काफी खास रहा। समारोह के समय पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच शंखनाद हुआ, 108 बटुकों ने स्वस्तिशांति का पाठ किया और 16 बौद्ध भिक्षुओं ने अष्टमंगल का उच्चारण किया। इस पूरे आयोजन ने आधुनिक राजनीति और पारंपरिक संस्कृति का एक अनोखा संगम पेश किया।
इतना ही नहीं शाह का अंदाज भी हमेशा की तरह अलग नजर आया। उन्होंने पूरी तरह काले कपड़े पहने और अपने सिग्नेचर डार्क सनग्लासेस के साथ शपथ ग्रहण समारोह में दिखाई दिए। बालेन्द्र शाह की इस उपलब्धि का एक और अहम पहलू है और वो है कि वह मधेशी समुदाय से आने वाले पहले नेता बन गए हैं जो नेपाल के सर्वोच्च कार्यकारी पद तक पहुंचे हैं। यह न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत है बल्कि उस समुदाय के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है जो लंबे समय से प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है।
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अगर उनके राजनीतिक सफर की बात करें तो यह काफी दिलचस्प रहा है। शाह पहले काठमांडू के मेयर रह चुके हैं और वहीं से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कई बार खुले तौर पर केंद्र सरकार और सत्ता के सबसे बड़े केंद्र सिंह दरबार को चुनौती दी। उनका आक्रामक और बेबाक अंदाज ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लेकर आया। काठमांडू के प्रशासनिक अधिकारों को लेकर उनकी आवाज काफी मुखर रही है। चाहे सरकारी टकराव हो या सांस्कृतिक विवाद, शाह ने हमेशा अपने विचार साफ तौर पर रखे और कई बार अधिकारियों के साथ उनकी सीधी भिड़ंत भी देखने को मिली। यही वजह है कि उन्हें एक ऐसे नेता के तौर पर देखा जाता है जो परंपरागत राजनीति से अलग रास्ता अपनाता है।
उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता हाल ही में हुए 5 मार्च के प्रतिनिधि सभा चुनावों से साफ हुआ। इन चुनावों में RSP ने 182 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सबको चौंका दिया। पार्टी ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर जीत मिली तो बालेन्द्र शाह ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे और अब वह वादा हकीकत में बदल चुका है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि एक युवा, अलग सोच रखने वाला और सिस्टम को चुनौती देने वाला नेता देश को किस दिशा में लेकर जाता है। शाह के सामने उम्मीदें भी बड़ी हैं और चुनौतियां भी कम नहीं। लेकिन फिलहाल इतना जरूर है कि नेपाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है।
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