Trump को तगड़ा झटका, चीनी कंपनियों की भारत में दनादन एंट्री!

आपको बता दें कि भारत ने साल 2020 में चीनी कंपनियों पर यह प्रतिबंध लगाए थे। जब गलवान घाटी की घटना के बाद से दोनों ही देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव बेहद बढ़ गया था। इस प्रतिबंध के तहत चीनी कंपनियों को भारत सरकार द्वारा बनाई गई एक समिति में पंजीकरण कराना होगा और राजनीतिक व सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया था।
भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ समय से सुधार देखने को मिल रहा है और इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आई है जो इन दोनों देशों के रिश्तों में बेहद सुधार ला सकती है। दरअसल रॉयटर्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक भारत चीन को एक बड़ी राहत देने जा रहा है। इसके लिए भारत चीनी कंपनियों पर लगाए गए 5 साल पुराने प्रतिबंध को अब हटा सकता है। जिसके बाद चीनी कंपनियां फिर से सरकारी टेंडरों में बोली लगा पाएंगी। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वित्त मंत्रालय ऐसी योजना बना रहा है जो 5 साल पहले चाइनीस कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा देगी। यह कदम सरकार द्वारा भारत चीन की सीमा पर तनाव कम होने के बाद लिया जा रहा है। आपको बता दें कि भारत ने साल 2020 में चीनी कंपनियों पर यह प्रतिबंध लगाए थे। जब गलवान घाटी की घटना के बाद से दोनों ही देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव बेहद बढ़ गया था। इस प्रतिबंध के तहत चीनी कंपनियों को भारत सरकार द्वारा बनाई गई एक समिति में पंजीकरण कराना होगा और राजनीतिक व सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया था।
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जिसके बाद ही चीन की कंपनियां किसी भी सरकारी टेंडर में भाग ले सकेंगी। इस प्रतिबंध की वजह से चीनी कंपनियों को लगभग 700 से 750 अरब डॉलर के भारतीय सरकारी टेंडरों में हिस्सा लेने का मौका ही नहीं मिला। आपको बता दें कि लागू करने के साथ ही इन प्रतिबंधों का बड़ा असर देखने को मिला था। जहां चीन की सरकारी कंपनी सीआरआरसी को 216 मिलियन के ट्रेन निर्माण टेंडर से बाहर कर दिया गया था। अब्रॉटर्स के रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि अन्य सरकारी विभागों ने शिकायत की कि 2020 के इन प्रतिबंधों की वजह से सामान की कमी हो।
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इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति के टेरिफ लगाने की वजह से चीन और भारत के बीच व्यापारिक रिश्ते वापस से पटरी पर आते दिख रहे हैं। जहां पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की एसईओ मीटिंग के लिए चीन के दौरे को बेहद अहम बताया जा रहा है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री के एसईओ दौरे के बाद से ही दोनों देशों के बीच बेहद सुधार देखने को मिला। जहां दोनों देशों के बीच सीधी फ्लाइट शुरू हुई। वहीं भारत की ओर से चाइनीस प्रोफेशनल्स के लिए वीजा देने में तेजी लाई गई।
भारत में फोन की एसेंबलिंग तो हो रही है लेकिन चिप्स और पुर्जे, मशीनरी अभी चीन से ही आ रही है। सिर्फ जुलाई 2025 में चीन ने भारत को 1 अरब डॉलर के कंप्यूटर चिप्ल भेजे। इसके अलावा अरबों डॉलर के फोन और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स भारतीय फैक्ट्रियों तक पहुंचे। यानी एप्पल की मेड इन इंडिया कहानी के पीछे भी मेड इन चाइना का तड़का लगा हुआ है। ये रिकॉर्ड ब्रेकिंग व्यापार उस वक्त हो रहा है जब अमेरिका ने चीन और भारत पर हाई टैरिफ लगा रखे हैं। ट्रंप प्रशासन ने सोचा कि टैरिफ बढ़ाओ और चीन-भारत की कमर टूट जाएगी। अमेरिका जीत जाएगा। लेकिन चीन ने अपनी रणनीति बदली। भारत के साथ उतर गया। भारत, अफ्रीका और साउथ ईस्ट एशिया जैसा नया मार्केट पकड़ चुका है। यूरोप में भी नया ग्राहक ढूढ़ लिया है।
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