भारत के 114 राफेल वाली मांग पर आया फ्रांस का जवाब, डील को लेकर अब क्या नया धमाका होने वाला है?

France
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अभिनय आकाश । Jul 27 2026 12:50PM

भारत ने इसी साल मई के महीने में फ्रांस को 114 राफेल फाइटर जेट्स के लिए आधिकारिक तौर पर एलओआर जारी किया था। यानी कि लेटर ऑफ रिक्वेस्ट। अब ताजा जानकारी यह आ रही है कि फ्रांसीसी अधिकारियों ने इस पर अपना विस्तृत जवाब देने के लिए अगस्त महीने के मध्य तक का समय मांगा है।

भारत और फ्रांस के बीच होने जा रहे 114 राफेल विमानों की डील पर बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। जहां फ्रांस की ओर से इस डील को लेकर भारत ने जो एलओआर यानी कि लेटर ऑफ रिक्वेस्ट जारी किया था। उसका जवाब अब फ्रांस देने जा रहा है। जिस खबर का इंतजार भारतीय वायुसेना और रक्षा गलियारे महीनों से कर रहे थे। उस पर पेरिस में हलचल तेज हो गई है। दरअसल भारत ने इसी साल मई के महीने में फ्रांस को 114 राफेल फाइटर जेट्स के लिए आधिकारिक तौर पर एलओआर जारी किया था। यानी कि लेटर ऑफ रिक्वेस्ट। अब ताजा जानकारी यह आ रही है कि फ्रांसीसी अधिकारियों ने इस पर अपना विस्तृत जवाब देने के लिए अगस्त महीने के मध्य तक का समय मांगा है। यानी कि 15 अगस्त के आसपास इस डील को लेकर बड़ा धमाका हो सकता है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक जैसे ही फ्रांस का जवाब टेबल पर आएगा दोनों देशों के बीच कीमत, तकनीक के ट्रांसफर और डिलीवरी टाइमलाइन पर अंतिम दौर की बातचीत शुरू हो जाएगी। लेकिन इस डील की जो बात दुनिया को हैरान कर रही है वो है इसका मेक इन इंडिया कनेक्शन। 

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इस सौदे के तहत कुल 114 राफेल विमानों में से 94 राफेल जेट भारत में ही बनाए जाएंगे। फ्रांस की कंपनी डसल्ट एिएशन एक भारतीय पार्टनर के साथ मिलकर हिंदुस्तान की धरती पर ही इन राफेल विमानों को तैयार करेगी। यह ना सिर्फ वायुसेना की ताकत बढ़ाएगी बल्कि भारत को लड़ाकू विमान बनाने का एक बड़ा हब बनाएगी। भारतीय वायुसेना के लिए यह डील बेहद ज्यादा जरूरी हो जाती है क्योंकि इस वक्त भारतीय वायुसेना लगातार स्क्वाड्रंस की कमी को झेल रही है। पुराने MIG2-21 और अन्य रूसी मूल के लड़ाकू विमान धीरे-धीरे सेवा से बाहर हो रहे हैं। जबकि स्वदेशी एलसीए तेजस मार्क वन, अल्फा और मार्क 2 परियोजनाओं में देरी का सामना करना पड़ रहा है। जिसकी वजह से नए स्क्वाडंस का गठन अपेक्षित गति से धीमा चल रहा है। ऐसे में राफेल जैसे अत्याधुनिक 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की ताकत को कई गुना तक बढ़ा सकते हैं। फिलहाल भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना मिलाकर 62 राफेल विमानों का आर्डर पहले ही दे चुकी है। अगर 114 नए राफेल विमान शामिल हो जाते हैं तो भारत के पास राफेल्स की संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी। इतना ही नहीं भारतीय नौसेना भविष्य में 31 और राफेल मरीन खरीदने की योजना रखती है। यानी कि आने वाले समय में भारत के बेड़े में 200 से अधिक राफेल विमान शामिल हो सकते हैं। 

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रक्षा मंत्रालय इस प्रोजेक्ट को सुपरफास्ट मोड पर चला रहा है। डिफेंस एक्विजेशन काउंसिल यानी कि डीएसी ने इसे पहले ही हरी झंडी दे दी है और अब सबकी निगाहें टिकी है अगस्त के महीने में जब फ्रांस का जवाब इस बार सामने आएगा जो कि यह तय करेगा कि भारत कितनी जल्दी इन घातक विमानों को अपने बेड़े में शामिल करता है जो चीन के जे विमान और पाकिस्तान के किसी भी विमान के लिए काल बनकर उभरेगा।  अगर अगस्त में फ्रांस की प्रतिक्रिया सकारात्मक रहती है तो इसके बाद कीमत और शर्तों पर बातचीत तेज हो जाएगी और भारत की सबसे बड़ी फाइटर जेट डील अपने निर्णायक चरण में पहुंच जाएगी। यानी कि आने वाले कुछ हफ्तों में भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं क्योंकि 114 नए लड़ाकू राफेल विमानों की खरीद का मामला लगभग तय होने वाला है। 

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