Turkey पहुंचा भारत, 3 देशों ने पाक को दिया झटका

रान करने वाली खबर तो अब आई है जहां भारत और तुर्की के बीच ऐसा लग रहा है कि फिर से एक नए सिरे से दोस्ती को ठीक करने की कोशिशें हो रही है क्योंकि भारत और तुर्की के विदेश विभाग के बीच में 12वें दौर की बैठक हुई है
एक तरफ युद्ध का तनाव है और दूसरी तरफ लगातार सीजफायर और उसे लेकर उहापोह की स्थिति। यानी कि अमेरिका और ईरान के युद्ध ने पूरी दुनिया में उथल-पुथल मचा कर रख दिया है। और दूसरी तरफ है भारत और उसकी डिप्लोमेसी। युद्ध से ठीक उलट भारत अपने डिप्लोमेटिक रिश्तों को मजबूत कर रहा है। यही वजह है कि जहां एक वक्त भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में दरार पड़ गए थे, वहां भी बांग्लादेश और भारत के रिश्ते मजबूत होते दिख रहे हैं। यही वजह है कि बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री भारत के दौरे पर हैं। लेकिन हैरान करने वाली खबर तो अब आई है जहां भारत और तुर्की के बीच ऐसा लग रहा है कि फिर से एक नए सिरे से दोस्ती को ठीक करने की कोशिशें हो रही है क्योंकि भारत और तुर्की के विदेश विभाग के बीच में 12वें दौर की बैठक हुई है। जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय ने दी है कि तुर्कीय और भारत के फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन की एक बैठक नई दिल्ली में 8 अप्रैल को हुई है।
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यह बैठकों का 12वां दौर रहा है। इस दौरान भारत के वेस्ट सेक्रेटरी मौजूद रहे और तुर्की के तरफ से उनके विदेश मंत्रालय की डेपुटी मिनिस्टर बैरिस इकनकी मौजूद रहीं। दोनों ही पक्षों ने इस रिश्ते को लेकर समीक्षा की है और इस दिशा में जोर दिया है कि किस तरीके से द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत किया जाए और ट्रेड और इन्वेस्टमेंट टूरिज्म टेक्नोलॉजी इनोवेशन एनर्जी कोऑपरेशन इन एजुकेशनल और कल्चरल फील्ड में बढ़ाया जा सके। इसके साथ ही द्विपक्षीय रिश्तों में इस बात पर भी जोर दिया गया है। कैसे दोनों देश अपने पीपल टू पीपल कनेक्ट को बढ़ाए और साथ ही भारत और तुर्की क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म के खिलाफ कैसे एक साथ खड़े हो सकते हैं इसकी समीक्षा की गई। इसके अलावा रीजनल और ग्लोबल इशू को लेकर भी जो दोनों देशों के म्यूचुअल इंटरेस्ट है उस पर भी एक दूसरे का नजरिया साझा किया गया है। सबसे बड़ी बात ये है कि ये आश्चर्यजनक बैठक सिर्फ बांग्लादेश या तुर्की से नहीं हो रही है। इसके पहले भी ऑपरेशन सिंदूर में जिस तरीके से पाकिस्तान के साथ अज़र-बैजान खड़ा हुआ था। उसे लेकर माना यह जा रहा था कि भारत के रिश्ते खराब हो सकते हैं। वो अज़रबैजान भी हाल ही में भारत के साथ मुलाकात कर चुका है और सेक्रेटरी वेस्ट ने अज़र बैजान के विदेश मंत्री से हाल ही में मुलाकात की थी और द्विपक्षीय रिश्तों को कैसे मजबूत किया जा सके इस दिशा में बातचीत की गई थी।
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इस दौरान छठे दौर की भारत और अज़रबजान के फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन की बैठक बाकू में हुई थी। दोनों ही देशों ने उस बैठक में यह देखा था कि कैसे दोनों देश आपसी रिश्तों को मजबूत करने के लिए ट्रेड, टेक्नोलॉजी, टूरिज्म, फार्मासटिकल सेक्टर में एक दूसरे के साथ काम कर सकते हैं और क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म पर भी दोनों ने एक दूसरे के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने का कमिटमेंट जाहिर किया। यानी कि जो देश पाकिस्तान के साथ कल को सबसे ज्यादा खड़े दिखाई दे रहे थे। उन तमाम देशों के साथ आज के वक्त में भारत के रिश्ते मजबूत होते दिखते हैं। अब बात अगर हम कर लें पाकिस्तान के साथ खड़े चीन की तो वो भी भारत के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करना चाहता है और अब अज़र-बैजान से लेकर तुर्की, बांग्लादेश सब भारत के साथ अपने रिश्तों में मजबूती पर जुटे हुए हैं। मतलब खेल साफ है। पाकिस्तान जिनके दम पर फुदक रहा था वो वापस से भारत की झोली में आते हुए दिखाई दे रहे हैं।
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