UN में भारत की खरी-खरी, कहा- आतंकवाद पर दोहरा रवैया नहीं चलेगा, अच्छा या बुरा नहीं होता कोई आतंकी

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद पर दुनिया के दोहरे रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि कोई आतंकी अच्छा या बुरा नहीं होता और इसे किसी भी वजह से सही नहीं ठहराया जा सकता। भारत ने दशकों से सीमा पार आतंकवाद झेलने का दर्द बयां करते हुए आतंकी फंडिंग रोकने और उन्हें पनाह देने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को मजबूती से दोहराया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि हरीश पर्वथानेनी ने दुनिया के सभी देशों से अपील की है कि वे आतंकवाद की खूनी सोच को जड़ से खत्म करने के लिए एक साथ मिलकर काम करें। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी शिकायत या वजह के नाम पर आतंकवाद को सही नहीं ठहराया जा सकता।
आतंकवाद पर दोहरा मापदंड बंद करे दुनिया
वैश्विक मंच पर भारत ने दो टूक अंदाज में कहा कि आतंकवाद के मामले में दुनिया को दोहरा रवैया बंद करना होगा। कोई भी आतंकवादी अच्छा या बुरा नहीं होता, आतंकी सिर्फ आतंकी होता है। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले, उन्हें पैसा देने वाले और अपने यहां पनाह देने वाले देशों को कानून के कठघरे में खड़ा करना बेहद जरूरी है। राजदूत पर्वथानेनी ने भारत का दर्द बयां करते हुए कहा कि हमारा देश दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है। हमने अपनों को खोया है और समाज को भारी नुकसान झेला है, इसलिए आतंकवाद के पक्ष में कोई दलील नहीं दी जा सकती।
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फंडिंग रोकने और नई टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल पर चिंता
भारत ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवादियों तक पहुंचने वाले पैसे को रोकना सबसे जरूरी है। इसके लिए सभी देशों को आपस में वित्तीय खुफिया जानकारी साझा करनी चाहिए और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के नियमों को सख्ती से लागू करना चाहिए। इसके साथ ही भारत ने चिंता जताई कि आतंकवादी अब नई तकनीकों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की बैठक में इस तकनीकी खतरे से निपटने पर कोई ठोस फैसला न हो पाना काफी निराशाजनक है।
सभी धर्मों के खिलाफ नफरत का हो विरोध
भारत ने साफ किया कि वह किसी भी धर्म, जाति या नस्ल के खिलाफ होने वाली नफरत की कड़ी निंदा करता है। भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को सिर्फ कुछ गिने-चुने धर्मों के खिलाफ होने वाली नफरत तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हिंदू, सिख और बौद्ध जैसे अन्य सभी धर्मों के खिलाफ फैलाई जाने वाली नफरत को भी स्वीकार करना और रोकना चाहिए।
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30 साल की देरी अब और नहीं
भारत ने याद दिलाया कि उसने करीब 30 साल पहले अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर एक वैश्विक कानून बनाने का प्रस्ताव दिया था, जो आज तक लटका हुआ है। इस कानूनी ढांचे के न होने से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ रही है। भारत ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि दुनिया के देश अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएं और इस कानून को तुरंत पास करें, ताकि आतंकवादियों को छिपने की जगह, पैसा और हथियार न मिल सकें।
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