12 हजार करोड़ के स्वदेशी ड्रोन तैयार कर रहा है भारत, दुश्मनों के छूटेंगे पसीने!

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अभिनय आकाश । Mar 9 2026 10:59AM

सोलर डिफेंस एंड एरोस्पेस लिमिटेड कंपनी के चेयरमैन सत्यनारायण नवाल ने बताया कि आज दुनिया भर में जिस तरह के युद्ध हो रहे हैं उसे देखते हुए अब टेक्नोलॉजी ही असली ताकत बनती जा रही है। इसलिए कंपनी ने तय किया है कि वो डीप टेक डिफेंस प्रोजेक्ट में बड़ा कदम उठाएगी।

मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच भारत की डिफेंस टेक्नोलॉजी से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। जहां नागपुर में एक ऐसी हाईटेक फैक्ट्री बनने जा रही है जो आने वाले समय में युद्ध के तरीके ही बदल सकती है। भारत की डिफेंस कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयररोस्पेस लिमिटेड ने यह घोषणा की है कि वो करीब ₹1800 करोड़ का बड़ा निवेश करने जा रही है। यह निवेश रोबोट ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स में किया जाएगा। नागपुर में बनने वाली इस नई सुविधा में हर साल लगभग 10,000 अलग-अलग प्रकार के ड्रोन बनाए जा सकेंगे।

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इसके साथ ही करीब 1000 रोबोट भी हर साल तैयार किए जाएंगे। ये ड्रोन छोटे से लेकर बड़े और अलग-अलग मिशनों के लिए डिजाइन किए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट पर आने वाले 3 से 4 सालों में 12,800 करोड़ का निवेश किया जाएगा। हालांकि यह पूरा प्रोजेक्ट महाराष्ट्र सरकार की मेगा प्रोजेक्ट पॉलिसी के तहत अगले 10 सालों में पूरी तरह से विकसित किया जाएगा। सबसे दिलचस्प बात यह है कि कंपनी का कहना है कि पहला रोबोट प्रोटोटाइप अगले साल के भीतर तक कंपनी तैयार कर देगी। 

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सोलर डिफेंस एंड एरोस्पेस लिमिटेड कंपनी के चेयरमैन सत्यनारायण नवाल ने बताया कि आज दुनिया भर में जिस तरह के युद्ध हो रहे हैं उसे देखते हुए अब टेक्नोलॉजी ही असली ताकत बनती जा रही है। इसलिए कंपनी ने तय किया है कि वो डीप टेक डिफेंस प्रोजेक्ट में बड़ा कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि 10,000 नंबर पर अलग-अलग टाइप के जो भी जरूरत है वो चाहे 15 कि.मी. से लगाकर 1000 कि.मी. और मेल सिस्टम तक हमने यह पूरा का पूरा ये यहां पर फैसिलिटी है। और दूसरी चीज है कि रोबोटिक। आने वाले टाइम में रोबोट जो है ये अपने आप में रक्षा के क्षेत्र में बहुत ही ज्यादा ये इंपॉर्टेंट रोल ये ये करेगा। तो हमने यह सोच के कि आज हमारे पास में भले ही कोई ऑर्डर कोई इंश्योरेंस कुछ भी नहीं है। लेकिन हमने निश्चित किया के कम से कम 1000 रोबोट हम बना सके यहां पर और वह भी पर्टिकुलर डिफेंस सेक्टर के लिए। वो हमने यहां पर इसका ये किया है और एआई का जो उपयोग है जैसे रॉकेट रॉकेट के बाद में गाइडेंस सिस्टम पिट सीकर लेकिन उसके अंदर भी एक लेयर यदि एआई की आती है तो उसको और वो ज्यादा स्ट्रेटेजिक का उसका चेंज कर सकता है। तो ये सब कुछ सोच के ही हमने पूरा का पूरा के यूएईवी रोबोट वि एआई ये पूरे के पूरे यहां पर यह प्रोडक्शन का हमने यह पूरा का पूरा प्लान किया है जो एक साल के अंदर यह पूरी फैसिलिटी हमने निश्चित किया कि एक साल के अंदर यह पूरी की पूरी फैसिलिटी हम यह यहां पर कंप्लीट कर लें और उसके इमीडिएट बाद में मैं समझता हूं के एक साल के बाद में विद विदिन मंथ और टू हम एक प्रोटोटाइप रोबोट और ये चीजें ये जितनी भी यूएवी है वो हम इसको यहां पर शुरू कर देंगे।

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इसके साथ ही कंपनी के अन्य अधिकारियों के मुताबिक यह प्रोजेक्ट भारत में डीप टेक इनोवेशन के क्षेत्र में बड़ा कदम होगा। इससे ना सिर्फ भारत की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी बल्कि सिविलियन और इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी नई टेक्नोलॉजी मिलेगी। इस फैक्ट्री को भारत का पहला एआई पावर्ड इंडस्ट्री 5.0 मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने की योजना है। यानी कि यहां पर एडवांस रोबोटिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट ऑटोमेशन का इस्तेमाल होगा। साथ ही में ध्यान रखा जाएगा कि मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया सस्टेनेबल और जिम्मेदार रहे। पहले चरण में कंपनी जिन मुख्य प्रोडक्ट्स पर काम करेगी उनमें सबसे अहम होंगे एडवांस पावर ड्रोन। खासतौर पर ऐसे ड्रोन जो मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंडोरेंस यानी कि माले कैटेगरी में आते हैं। यह वही ड्रोन होते हैं जो लंबी दूरी तक उड़ान भर सकते हैं और कई घंटों तक हवा में बने रहकर निगरानी मिशन को पूरा कर सकते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो यह प्रोजेक्ट भारत की डिफेंस इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा गेम चेंजर साबित होगा। 

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