China के पड़ोस में भारत का बड़ा खेल, जयशंकर ने दुनिया को दिखाया, बीजिंग अलर्ट

एक ऐसा देश जिसकी जमीन के नीचे यूरेनियम, सोना, तांबा इतना ही नहीं लिथियम और रेयर अर्थ मिनरल्स का भी विशाल खजाना छिपा है। एक ऐसा देश जहां भारत सिर्फ दोस्ती नहीं निभा रहा बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण संसाधनों तक पहुंच का रास्ता भी अपना बना रहा है। इसी देश मंगोलिया पहुंचे हैं भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर।
चीन के पड़ोस में भारत की मदद से 1.7 अरब डॉलर की एक ऐसी मेगा परियोजना तैयार हो रही है जो सिर्फ तेल नहीं बल्कि यूरेनियम सोना, तांबा और भविष्य की ताकत की कहानी लिख सकती है। एक ऐसा देश जो चीन और रूस के बीच स्थित है। एक ऐसा देश जिसकी जमीन के नीचे यूरेनियम, सोना, तांबा इतना ही नहीं लिथियम और रेयर अर्थ मिनरल्स का भी विशाल खजाना छिपा है। एक ऐसा देश जहां भारत सिर्फ दोस्ती नहीं निभा रहा बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण संसाधनों तक पहुंच का रास्ता भी अपना बना रहा है। इसी देश मंगोलिया पहुंचे हैं भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर। ऐसे में सवाल है कि आखिर भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने मंगोलिया में भारत की 1.7 अरब डॉलर की रिफाइनरी परियोजना का निरीक्षण क्यों किया?
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बता दें कि रूस और चीन के बीच स्थित एक लैंड लॉक्ड देश है। इसकी आबादी करीब 35 लाख है और यह दुनिया के प्रमुख बौद्ध देशों में गिना जाता है। भारत और मंगोलिया के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं है बल्कि सांस्कृतिक भी है। भारत मंगोलिया को अपना स्पिरिचुअल नेबर यानी कि आध्यात्मिक पड़ोसी भी मानता है। अब बात करते हैं भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के दौरे की। दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने मंगोलिया की विदेश मंत्री के साथ और उनके कई शीर्ष नेताओं के साथ यहां पर मुलाकात की। उन्होंने कहा कि भारत मंगोलिया के साथ अपने करीबी और दोस्ताना रिश्तों को और भी ज्यादा मजबूत करने के लिए तैयार है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस समय तेज हुई जब उन्होंने भारत की मदद से बन रही 1.7 अरब डॉलर की मेगा ऑयल रिफाइनरी परियोजना का निरीक्षण किया। डॉ. एस जयशंकर ने। यही कारण है कि जयशंकर ने सिर्फ यहां पर नेताओं से मुलाकात नहीं की बल्कि खुद जाकर इस परियोजना की प्रगति का जायजा भी लिया। यह रिफाइनरी भारत द्वारा दिए गए लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत बनाई जा रही है और इसे भारत मंगोलिया सहयोग की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में भी गिना जाता है। लेकिन असल कहानी उस खजाने की है जो मंगोलिया की जमीन के नीचे दबा हुआ है।
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मंगोलिया दुनिया के सबसे खनिज समृद्ध देशों में गिना जाता है। देश की जीडीपी का करीब 1/4 हिस्सा माइनिंग सेक्टर से आता है। जबकि उसके कुल निर्यात का लगभग 90% हिस्सा खनिजों से जुड़ा हुआ है। यहां 80 से ज्यादा प्रकार के खनिजों के 1000 से अधिक भंडार मौजूद है। मंगोलिया के पास करीब 1,90 हजार टन तक के अनुमानित यूरेनियम संसाधन हैं। जिन्हें दुनिया के सबसे बड़े अविकसित यूरेनियम भंडारों में गिना जाता है। यही नहीं आपको बता दें कि इस देश में 56 मिलियन टन से ज्यादा तांबा भी मौजूद है और ओयू तोलगोई खदान दुनिया के सबसे बड़े कॉपर गोल्ड डिपॉजिट में शामिल है। इसके अलावा सोना और 36 बिलियन टन कोयला लिथियम और रेयर अर्थ मिनरल्स के बड़े भंडार भी मंगोलिया को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाते हैं। और यही वजह है कि भारत अब मंगोलिया को सिर्फ एक मित्र देश के रूप में नहीं बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के बड़े स्रोत के रूप में इस वक्त देख रहा है। भारत पहले से ही मंगोलिया के साथ यूरेनियम सहयोग पर बातचीत कर रहा है। वहीं आपको बता दें कि भारत अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए यूरेनियम आयात के स्रोतों में विविधता लाना चाहता है और मंगोलिया इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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