Yamuna Expressway बस हादसे पर Allahabad High Court सख्त, यूपी सरकार से मांगा जवाब

Yamuna Expressway बस हादसे पर Allahabad High Court सख्त, यूपी सरकार से मांगा जवाब
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत के मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को 13 अक्टूबर से पहले हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्लीपर बसों के परमिट, सुरक्षा मानकों और चालक-परिचालक के प्रशिक्षण की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यमुना एक्सप्रेसवे पर एक स्लीपर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत के मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने अधिकारियों से पूछा कि पिछले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश में कितनी स्लीपर बसों को परमिट जारी किए गए और परमिट जारी करने से पहले क्या निर्धारित मानकों का सत्यापन किया गया था। अदालत ने यह भी जानकारी मांगी कि क्या सुरक्षा मानकों से समझौता करते हुए बसों के डिजाइन में बदलाव किए गए या उनमें वाणिज्यिक पार्सल ढोए जा रहे थे।

उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को 13 अक्टूबर से पहले हलफनामा दाखिल कराने को कहा। अदालत ने हलफनामे में यह भी बताने को कहा कि निरीक्षकों ने यात्रियों के बयान दर्ज किए या नहीं, अग्निशमन उपकरणों की जांच की गई या नहीं और चालक एवं परिचालक प्रशिक्षित हैं या नहीं, इसकी पुष्टि की गई या नहीं। अदालत ने पिछले तीन वर्षों में इसी तरह की दुर्घटनाओं में की गई कार्रवाई का विवरण भी अगली सुनवाई में पेश करने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय ने एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट और राज्यसभा में पेश आंकड़ों का संज्ञान लिया। खबर के मुताबिक, जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच देश में स्लीपर बसों में आग लगने की 45 घटनाएं हुईं, जिनमें 64 लोगों की मौत हुई और 145 लोग झुलसे। अदालत ने कहा, ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि एसी स्लीपर बसें उचित जांच और सुरक्षा उपायों के बिना सड़कों पर दौड़ रही हैं।

यह भी प्रतीत होता है कि इन बसों के चालक और परिचालक किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी से कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित नहीं हैं।’’ अदालत ने यह निर्देश भी दिया कि अगर दुर्घटनाग्रस्त बस के मामले में सरकारी नियमों का पालन नहीं पाया जाता है तो चालक, परिचालक और लाइसेंस धारक के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अदालत ने कहा कि साथ ही ऐसे लाइसेंस धारक की बसों के परिचालन पर रोक लगाने पर भी विचार किया जाए।

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