भारत का बड़ा खेल, अचानक अमेरिका जा रहे मोदी, टेंशन में चीन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल के अंत में दिसंबर के महीने में अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं और अगले साल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के भारत आने की खबर भी सामने आई हैं। अगर ऐसा होता है तो यह सिर्फ दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं होगी बल्कि एशिया की रणनीतिक राजनीति को भी प्रभावित करने वाली घटनाएं यह साबित हो सकती है।
कुछ महीने पहले तक भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर लगातार कई सारे सवाल उठ रहे थे। कभी ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी, कभी पाकिस्तान को लेकर दिए गए बयान और कभी पाकिस्तान के सेना प्रमुख यानी कि असीम मुनीर के प्रति अमेरिका की दिखाई गई नरमी। इन सब ने नई दिल्ली को अलर्ट कर दिया था। सतर्क कर दिया था। लेकिन अब जो है तस्वीर अचानक से बदलती हुई दिखाई दे रही है। यह खबर सामने आई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल के अंत में दिसंबर के महीने में अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं और अगले साल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के भारत आने की खबर भी सामने आई हैं। अगर ऐसा होता है तो यह सिर्फ दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं होगी बल्कि एशिया की रणनीतिक राजनीति को भी प्रभावित करने वाली घटनाएं यह साबित हो सकती है। क्योंकि इस एक दौरे से सबसे ज्यादा नजर जो होगी वह तीन देशों पर होगी। चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश।
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भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने यह कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल दिसंबर में अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं। हालांकि आपको यह बता दें कि भारत सरकार ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि अचानक अब यह सब कुछ क्यों हो रहा है? वजह है बदलता वैश्विक माहौल। अमेरिका के सामने चीन सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बना हुआ है और हिंद प्रशांत क्षेत्र में उसका मुकाबला करने के लिए भारत उसकी सबसे अहम साझेदारियों में से एक है। दूसरी तरफ भारत भी चीन के बढ़ते प्रभाव और क्षेत्रीय चुनौतियों को लेकर लगातार सतर्क है। यानी दोनों देशों के हित कई मामलों में एक दूसरे से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। और यही वजह है कि अगर मोदी और ट्रंप की मुलाकात होती है तो सिर्फ यह एक औपचारिक बातचीत नहीं होगी। एक तरफ होगा अरबों डॉलर के व्यापार की चर्चा तो वहीं दूसरी तरफ हाईटेक टेक्नोलॉजी और डिफेंस सहयोग पर भी दोनों देशों के नेताओं की बातचीत होगी और तीसरी तरफ इंडोपेसिफिक में चीन को संतुलित करने की भी रणनीति पर दोनों देशों का फोकस हो सकता है और यहीं से शुरू होती है तीन देशों की टेंशन।
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पहला है चीन। अगर भारत और अमेरिका रक्षा सेमीकंडक्टर इतना ही नहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कि एआई क्रिटिकल मिनरल्स और सुरक्षा सहयोग को नई गति देते हैं तो चीन के सामने एक और मजबूत रणनीतिक साझेदारी खड़ी हो सकती है। दूसरा देश जो टेंशन में आएगा वो है पाकिस्तान। पिछले कुछ समय से पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने रिश्ते बेहतर करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अगर वाशिंगटन का फोकस फिर भारत की तरफ बढ़ता है तो इस्लामाबाद की रणनीतिक अहमियत सीमित हो सकती है। लिमिटेड हो सकती है। हालांकि अमेरिका पाकिस्तान से पूरी दूरी भी नहीं बनाएगा क्योंकि अफगानिस्तान और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर उसकी जरूरत अब भी वहां पर बनी हुई है। वहीं तीसरा देश जो टेंशन में आएगा वो है बांग्लादेश। हाल के महीनों में चीन और बांग्लादेश के बीच बढ़ते सहयोग पर भारत लगातार नजर बनाए हुए हैं। अगर भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी और भी ज्यादा मजबूत होती है इस मीटिंग के बाद तो ढाका पर भी अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है। अब बात उन डील्स की जिन पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है भारत और अमेरिका के बीच। अमेरिकी राजदूत के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता आखिरी चरण में है। अगर यह समझौता पूरा होता है तो व्यापार, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा और हाईटेक सेक्टर में बड़े समझौते हो सकते हैं। यानी आर्थिक साझेदारी के साथ-साथ रणनीतिक सहयोग भी नए स्तर पर पहुंच सकता है।
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