अमेरिका के लिए जासूसी कर रहे हैं मुनीर? ईरान में एंट्री से मचा बड़ा बवाल

तेहरान पहुंचे मुनीर का यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि ईरान में मुस्तबा खामने के नए सुप्रीम लीडर बनने के बाद यह पहला बड़ा विदेशी दौरा है। आमतौर पर ऐसे मौके पर शीर्ष स्तर के मुलाकातें होती हैं। लेकिन इस बार मुनीर और खामने की संभावित मुलाकात को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। जानकारों का मानना है कि इस दौरे के कई संकेत हो सकते हैं। एक तरफ पाकिस्तान और ईरान के बीच संबंध को मजबूत करने की कोशिश भी छुपी हो सकती है।
क्या पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर का ईरान दौरा सिर्फ एक आम डिप्लोमेटिक यात्रा है या इसके पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है? यह सवाल इस समय इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। तेहरान पहुंचे मुनीर का यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि ईरान में मुस्तबा खामने के नए सुप्रीम लीडर बनने के बाद यह पहला बड़ा विदेशी दौरा है। आमतौर पर ऐसे मौके पर शीर्ष स्तर के मुलाकातें होती हैं। लेकिन इस बार मुनीर और खामने की संभावित मुलाकात को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। जानकारों का मानना है कि इस दौरे के कई संकेत हो सकते हैं। एक तरफ पाकिस्तान और ईरान के बीच संबंध को मजबूत करने की कोशिश भी छुपी हो सकती है।
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वहीं दूसरी तरफ कुछ जानकारों का यह मानना है कि यह यात्रा शायद मुनीर अमेरिका के लिए रणनीतिक जानकारी जुटाने के लिए कर रहे हैं। यह अटकलें इसलिए भी तेज हो गई है क्योंकि पाकिस्तान हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम में एक और दिलचस्प पहलू जुड़ता है अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का। ट्रंप कई मौकों पर जनरल मुनीर की तारीफ कर चुके हैं और पाकिस्तान की शांति प्रयासों में भूमिका की सराहना भी की है। उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि अगर हालात अनुकूल रहते हैं तो ईरान के साथ चल रहे तनाव सीज फायर को आगे बढ़ाया जा सकता है। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि क्या पाकिस्तान वाकई एक निष्पक्ष देश है या किसी बड़े वैश्विक एजेंडे का हिस्सा। तेहरान में अपने दौरे के दौरान मुनीम ने ईरानी संसद के स्पीकर से मुलाकात की।
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हालांकि इस मुलाकात के बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ना ही ईरान की तरफ से और ना ही पाकिस्तान की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान सामने आया है। जिससे रहस्य और बढ़ गया है। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत भी अहम मोड़ पर है। वाइट हाउस के अनुसार दोनों देशों के बीच बातचीत में कुछ प्रगति हुई है। सीज फायर बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान की भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण होगी। खासकर अगर इस्लामाबाद में शांति वार्ता फिर आयोजित होती है। पूरे घटनाक्रम को देखें तो यह साफ है कि यह दौर केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं है। इसके पीछे कई परते, कूटनीति, रणनीति और संभावित खुफिया गतिविधियां भी शामिल है।
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