अमेरिका का बड़ा कदम, ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण नाकाबंदी का ऐलान

अमेरिका ने घोषणा की है कि वह सोमवार को पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करेगा। ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने कहा कि यह नाकेबंदी ‘‘सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी’’ जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं।
अमेरिका ने घोषणा की है कि वह सोमवार को पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करेगा। ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने कहा कि यह नाकेबंदी ‘‘सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी’’ जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं।
इसमें कहा गया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। युद्धविराम के बाद भी जलडमरूमध्य में यातायात सीमित रहा है। जानकारों के अनुसार युद्धविराम शुरू होने के बाद से 40 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों ने जलडमरूमध्य पार किया है।
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ईरान की नौसैनिक घेराबंदी
अमेरिका और ईरान ने शनिवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में लगातार 21 घंटे तक बातचीत की, लेकिन वे अपने बीच का गतिरोध खत्म करने में नाकाम रहे, जबकि पूरी दुनिया इन बातचीत पर करीब से नज़र रखे हुए थी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जेडी वेंस ने कहा कि वॉशिंगटन द्वारा अपना "अंतिम और सबसे अच्छा" प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद वे किसी आम सहमति पर नहीं पहुँच सके। वेंस ने कहा कि अमेरिका को इस बात की गारंटी चाहिए कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा; हालाँकि उन्होंने इस बारे में ज़्यादा विस्तार से कुछ नहीं बताया।
दूसरी ओर, ईरान ने बातचीत के पटरी से उतरने के पीछे अमेरिका की "अतार्किक" माँगों को ज़िम्मेदार ठहराया। ईरानियों ने कहा कि किसी समझौते तक पहुँचने के लिए अमेरिका को अपनी 'तानाशाही' वाली सोच छोड़ देनी चाहिए। लेकिन इसके तुरंत बाद, ट्रंप ने सोमवार से ईरान के सभी बंदरगाहों और तटीय इलाकों की नौसैनिक घेराबंदी करने की घोषणा कर दी।
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इस नौसैनिक घेराबंदी से मध्य-पूर्व में स्थिति के और अधिक जटिल होने की आशंका है, और इससे वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ भी और बाधित हो सकती हैं, जो पहले से ही इस संघर्ष के कारण दबाव में हैं।
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