America के नाक के नीचे परमाणु रिएक्टर पर मोदी का बड़ा खेल! भारत ने रच दिया इतिहास

पीएफबीआर ने क्रिटिकिटी हासिल कर ली है। यानी कि बता दें कि अब यह जो रिएक्टर है यह खुद से न्यूक्लियर रिएक्शन को बनाए रख सकता है। और वो भी बिना किसी बाहरी सहायता के। बता दें कि यह वही मोमेंट है। यह वही पल है जब भारत ने ऑफिशियली अपने थ्री स्टेज न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण में एंट्री कर ली।
भारत ने वो कर दिखाया है जिसे पश्चिमी देश कहते थे कि यह हो ही नहीं सकता। टेक्नोलॉजिकली यह पॉसिबल ही नहीं है। भारत ने आज बता दें कि इतिहास रच दिया है। तमिलनाडु के कलपक्कम परमाणु परिसर में मौजूद प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर यानी कि पीएफबीआर ने क्रिटिकिटी हासिल कर ली है। यानी कि बता दें कि अब यह जो रिएक्टर है यह खुद से न्यूक्लियर रिएक्शन को बनाए रख सकता है। और वो भी बिना किसी बाहरी सहायता के। बता दें कि यह वही मोमेंट है। यह वही पल है जब भारत ने ऑफिशियली अपने थ्री स्टेज न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण में एंट्री कर ली।
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बता दें कि खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को भारत की सिविल न्यूक्लियर जर्नी का एक निर्णायक मोड़ भी बताया। उन्होंने अपने संदेश में यह साफ कहा। यह साफ लिखा कि भारत ने अपनी वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का एक बेहतरीन उदाहरण दुनिया के सामने एक बार फिर प्रस्तुत किया है। यह उपलब्धि, ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। देश के वैज्ञानिक और जो इंजीनियर्स हैं उनको मैं बधाई देना चाहता हूं जिसने इस पूरे जटिल तकनीक को सफल बनाया। दरअसल यह कोई सामान्य रिएक्टर नहीं है। यह है ब्रीडर रिएक्टर यानी एक ऐसा रिएक्टर जो जितना ईंधन जलाता है, उससे कई गुना ज्यादा नया ईंधन यह पैदा करता है। यह प्लूटोनियम 239 बनाता है और भविष्य के लिए ईंधन का भंडार तैयार करता है। यानी ईंधन जो है वो खत्म नहीं होगा। ईंधन बढ़ता ही जाएगा। पश्चिम इसमें फेल हुआ लेकिन भारत सफल रहा। अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस सभी ने इस टेक्नोलॉजी पर अरबों डॉलर खर्च किए। लेकिन बता दें कि सोडियम लीक फायर एक्सपेंसिव है यह सिस्टम।
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बता दें कि कई देशों ने इस प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा। लेकिन भारत ने 20 साल की कड़ी मेहनत के बाद और स्वदेशी टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल करके और धैर्य के साथ इस मिशन को ना सिर्फ पूरा किया बल्कि इसे सफल भी बनाया। भारत अब कहां पर खड़ा है? उस पर नजर डालते हैं। बता दें कि रूस और भारत के पास ही कमर्शियल स्केल फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है। यानी भारत जो है वो अब न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के टॉप क्लब में शामिल हो चुका है। तीन स्टेज का यह गेम चेंजर प्लान है। यह सब कुछ बता दें कि यह सब कुछ तब शुरू हुआ था जब महान वैज्ञानिक होमी भाबा के विज़न से इसे शुरू किया गया।
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