भारत से पंगा पड़ा बहुत महंगा, ब्लैकलिस्ट की कगार पर पहुंचा नेपाल

Nepal
AI Image
अभिनय आकाश । May 20 2026 1:07PM

एक तरफ नेपाल अपनी आंतरिक राजनीति और चीन के बढ़ते प्रभाव में फंसकर भारत से दूरियां बढ़ाता रहा और दूसरी तरफ उसके घर के भीतर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग का काला खेल चलता रहा। अब खबर यह है कि एफएटीएफ यानी कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की क्षेत्रीय शाखा एपीजी ने नेपाल को आखिरी चेतावनी दी। नेपाल के पास सिर्फ 4 महीने का वक्त है वरना वह दुनिया की आर्थिक व्यवस्था से काट दिया जाएगा।

वो देश जो कभी भारत की दोस्ती पर गर्व करता था। वो देश जिसने पिछले कुछ समय में अपनी सीमाओं को लेकर भारत को आंखें दिखाने की कोशिश की। आज वही नेपाल एक ऐसे दलदल में फंस चुका है जहां से निकलना उसके लिए लगभग नामुमकिन सा लग रहा है। दरअसल मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को रोकने वाली दुनिया की सबसे बड़ी संस्था एफएटीएफ ने नेपाल को वह अल्टीमेटम दे दिया है जिससे काठमांडू से लेकर दिल्ली तक खलबली मच चुकी है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक पुरानी कहावत है। दुश्मन सोच समझकर चुनिए, लेकिन दोस्त कभी मत खोइए। नेपाल ने शायद यही गलती कर दी। एक तरफ नेपाल अपनी आंतरिक राजनीति और चीन के बढ़ते प्रभाव में फंसकर भारत से दूरियां बढ़ाता रहा और दूसरी तरफ उसके घर के भीतर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग का काला खेल चलता रहा। अब खबर यह है कि एफएटीएफ यानी कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की क्षेत्रीय शाखा एपीजी ने नेपाल को आखिरी चेतावनी दी। नेपाल के पास सिर्फ 4 महीने का वक्त है वरना वह दुनिया की आर्थिक व्यवस्था से काट दिया जाएगा। 

इसे भी पढ़ें: भारत ने कर डाला नेपाल का इलाज, चकरा गया बालेन शाह का दिमाग!

रिपोर्ट के मुताबिक एशिया पेसिफिक ग्रुप यानी कि एपीजी के एक हाई लेवल डेलीगेशन ने हाल ही में काठमांडू का दौरा किया। इस डेलीगेशन की अगुवाई कर रहे थे डेविड शेन जो 2002 से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं और दुनिया के सबसे अनुभवी समीक्षकों में से एक हैं। उनकी मौजूदगी ही यह बताने के लिए काफी है कि मामला कितना सीरियस है। अब काठमांडू पोस्ट के मुताबिक यह नेपाल के लिए अंतिम उच्च स्तरीय हस्तक्षेप है। यानी अब और कोई मोहलत नहीं मिलेगी नेपाल को। सितंबर 2026 में होने वाली निर्णायक समीक्षा से पहले नेपाल को ठोस नतीजे दिखाने ही होंगे। एपीजी के अधिकारियों ने नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, नेपाल सेना और पुलिस के आला अधिकारियों के साथ बैठक की। सूत्रों की मानें तो इन बैठकों में एपीजी ने नेपाल की अब तक की प्रगति को बेहद निराशाजनक बताया। उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि सुधर जाओ वरना ब्लैक लिस्ट होने के लिए तैयार रहो। 

इसे भी पढ़ें: India MEA Briefing: भारत-पाक सैन्य संघर्ष के दौरान Pakistan की मदद करने China से India ने पूछ लिया बड़ा तीखा सवाल

पिछले कुछ सालों में नेपाल की राजनीति में एक अजीब सा बदलाव देखा गया। कम्युनिस्ट सरकारों के दौर में नेपाल ने अपनी सीमाओं को लेकर भारत के साथ विवाद खड़ा किया। नए नक्शे जारी किए और कई बार ऐसे ऐसे बयान दिए जिससे सदियों पुराने रिश्ते में खटास आ गई। लेकिन जब आप अपने सबसे बड़े आर्थिक और रणनीतिक साझेदार यानी भारत को नजरअंदाज करते हैं तो आपकी आंतरिक व्यवस्था कमजोर होने लगती है। भारत ने हमेशा नेपाल की सुरक्षा वित्तीय स्थिरता में मदद की है। लेकिन जब नेपाल का ध्यान राष्ट्रवाद के नाम पर भारत से भिड़ने में रहा तो उसके घर के अंदर मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले सोने की तस्करी करने वाले और संदिग्ध संगठनों को फंड देने वाले लोग सक्रिय हो गए। आज हालात यह है कि नेपाल की जांच एजेंसियां जैसे कि मनी लॉन्ड्रिंग जांच विभाग और नेपाल पुलिस इन अपराधियों पर लगाम लगाने में पूरी तरह से नाकाम रही हैं। एफएटीएफ ने पाया कि नेपाल में मनी लॉन्डिंग के जो केस दर्ज किए गए हैं उनकी संख्या ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

इसे भी पढ़ें: Turkish Airlines Fire | काठमांडू एयरपोर्ट पर टर्किश एयरलाइंस के विमान में लगी आग, बाल-बाल बचे 277 यात्री

बड़ी मछलियां खुलेआम घूम रही हैं और कानूनी प्रवर्तन एजेंसियां ढीली पड़ रही हैं। दूसरी बड़ी वजह है हाई रिस्क सेक्टर्स में धांधली। इन क्षेत्रों में रेगुलेशन ना के बराबर है। तीसरी वजह है राजनीतिक अस्थिरता। नेपाल में सरकारें गिरती बनती रहती हैं। अधिकारियों का तर्क यह है कि बार-बार चुनाव और राजनीतिक बदलाव के कारण जरूरी सुधार लागू नहीं हो पाए हैं। लेकिन दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस बहाने को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। चौथी वजह है रिपोर्ट में देरी। नेपाल को नवंबर 2025 तक एक नेशनल रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट देनी थी जो आज तक अधूरी है। यह नेपाल की गंभीरता की कमी को दिखाता है। 

All the updates here:

अन्य न्यूज़