पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुने गए भारत को बधाई देने से इनकार किया

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पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुने गए भारत को बधाई देने से इनकार करते हुए बृहस्पतिवार को उस पर कश्मीर को लेकर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। भारत को दो साल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुना गया है।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुने गए भारत को बधाई देने से इनकार करते हुए बृहस्पतिवार को उस पर कश्मीर को लेकर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। भारत को दो साल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुना गया है। बुधवार को पांच अस्थायी सीटों के लिए हुए चुनाव में एशिया-प्रशांत देशों की श्रेणी से उम्मीदवार भारत को 192 मतों में से 184 मत मिले।

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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता आयशा फारूकी ने नियमित मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि महासभा ने दो साल के लियेसुरक्षा परिषद के चार अस्थायी सदस्यों का चुनाव किया है, जिनका कार्यकाल 1 जनवरी 2021 से शुरू होगा। उन्होंने कहा, हम आयरलैंड, नॉर्वे और मैक्सिको को बधाई देते हैं। भारत के चुनाव से कुछ मौलिक प्रश्न उठते हैं।

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प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर में सुरक्षा परिषद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा, भारत सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों का उल्लंघन करता रहा है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के लोगों को आत्मनिर्णय के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल करने के लिये संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में जनमत संग्रह कराने का प्रस्ताव शामिल है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सुरक्षा परिषद के बाकी सदस्यों के साथ दक्षिण एशिया और उसके बाहर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा कायम रखने के लिये मिलकर काम करता रहेगा।

भारत और चीन की सेनाओं के बीच लद्दाख में टकराव पर फारूकी ने कहा कि चीन-भारत सीमा क्षेत्रों में नए सिरे से झड़पें इसलिये हुईं क्योंकि चीन, भारत के साथ शांतिपूर्ण तरीके और आपसी सहमति से संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत कर रहा था। उन्होंने आरोप लगाया, पड़ोसी देशों से लगी सीमाओं में एकतरफा बदलाव की भारत की शत्रुतापूर्ण नीतियां और प्रयास इस क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं। इससे क्षेत्र में स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए प्रयास कमजोर पड़ रहे हैं।

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