Stanford में Sundar Pichai के भाषण में बवाल, Free Palestine के नारों के साथ छात्रों का वॉकआउट

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में गूगल सीईओ सुंदर पिचाई के ग्रेजुएशन भाषण के दौरान, छात्रों ने फिलिस्तीन के समर्थन में वॉकआउट किया। यह विरोध गूगल के इजरायल सरकार के साथ 1.2 अरब डॉलर के 'प्रोजेक्ट निंबस' सौदे के खिलाफ था, जिसके चलते छात्र 'फ्री पैलेस्टाइन' के नारे लगाते हुए समारोह से बाहर चले गए।
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई रविवार को अपने पुराने कॉलेज, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के 135वें ग्रेजुएशन सेरेमनी में 2026 बैच के छात्रों को मोटिवेट करने पहुंचे थे। वह यहां मुख्य मेहमान के तौर पर भाषण दे रहे थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने बोलना शुरू किया, फिलिस्तीन के सपोर्ट में करीब 200 छात्र उनके भाषण के बीच से उठकर बाहर चले गए। इस समारोह में 3,600 स्टूडेंट्स समेत 20,000 से ज्यादा लोग मौजूद थे।
झंडे और सीटी के साथ छात्रों का प्रोटेस्ट
वहां मौजूद लोगों के मुताबिक, जब पिचाई स्टेज पर बोल रहे थे, तब छात्रों के कुछ ग्रुप्स ने बैनर दिखाए, सीटियां बजाईं और फिलिस्तीनी झंडे लहराए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में छात्र 'फ्री पैलेस्टाइन' के नारे लगाते हुए सेरेमनी से बाहर जाते दिख रहे हैं। यह पूरा प्रोटेस्ट 'स्टूडेंट्स फॉर जस्टिस इन पैलेस्टाइन' और 'नो टेक फॉर अपार्टहेड' जैसे ग्रुप्स ने मिलकर प्लान किया था। हालांकि, भारतीय-अमेरिकी इन्वेस्टर विनोद खोसला ने छात्रों के इस तरह वॉकआउट करने की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना की है।
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आखिर क्यों हुआ सुंदर पिचाई का विरोध?
प्रोटेस्ट कर रहे छात्र गूगल के इजरायल सरकार के साथ बिजनेस रिलेशंस से नाराज थे। छात्र खासकर 2021 में हुए 'प्रोजेक्ट निंबस' नाम के एक विवादित सौदे का विरोध कर रहे थे, जो कि 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर का एक क्लाउड कंप्यूटिंग एग्रीमेंट है। इसके अलावा, छात्र पिछले तीन सालों से इजरायल-गाजा युद्ध और कॉलेज कैंपस में फिलिस्तीन समर्थकों पर यूनिवर्सिटी के एक्शन के खिलाफ भी लगातार गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
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पिचाई ने शेयर की अपनी लाइफ और करियर की जर्नी
हंगामे के बीच सुंदर पिचाई ने छात्रों से अपने दिल की बात कही और चेन्नई से कैलिफोर्निया तक के अपने सफर के लाइफ लेसन्स शेयर किए। उन्होंने बताया कि हर पीढ़ी के सामने अपनी चुनौतियां होती हैं। उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए कहा, "मैं चेन्नई के एक मिडिल क्लास परिवार में पला-बढ़ा, जहां हमने सूखे और पानी की किल्लत का सामना किया। हमें एक फोन, टीवी या फ्रिज के लिए भी सालों इंतजार करना पड़ता था। जब मेरा स्टैनफोर्ड में सिलेक्शन हुआ, तो मेरे पिता ने अपनी पूरे एक साल की सैलरी खर्च करके मेरे लिए फ्लाइट का टिकट खरीदा था। वह मेरी पहली हवाई यात्रा थी।"
पिचाई ने आगे बताया कि वह यहां पीएचडी करने आए थे, लेकिन हालात के चलते उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी और स्टैनफोर्ड ने उन्हें मास्टर डिग्री दी। उन्होंने युवाओं से कहा कि कॉलेज छोड़ने के 10 साल बाद तक भी वह सही रास्ते की तलाश में भटक रहे थे, इसलिए शुरुआती असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए।
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